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माइक्रोसॉफ्ट में छंटनी पर अमेरिकी कर्मचारियों ने सवाल उठाया है. पूछा है कि अगर कंपनी के पास जरूरत से ज्यादा लोग हैं और वह उन्हें जाने के लिए कह रही है, तो फिर वह विदेशी कर्मचारियों को क्यों रख रही है?
माइक्रोसॉफ्ट अपने हजारों कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने का ऑफर दे रही है. (Image:News18)
दिग्गज टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट इन दिनों अपने ही कर्मचारियों के विरोध का सामना कर रही है. कंपनी ने अमेरिका, ब्रिटेन और भारत में अपने करीब 60000 कर्मचारियों को स्वैच्छिक एग्जिट पैकेज का ऑफर दिया है. लेकिन इसके बाद सोशल मीडिया में कुछ इंटरनल मैसेज वायरल हो रहे हैं, जिस पर विवाद हो गया है. इसमें कंपनी के कर्मचारी पूछ रहे हैं कि अगर कंपनी के पास जरूरत से ज्यादा लोग हैं और वह उन्हें जाने के लिए कह रही है, तो फिर वह H-1B वीजा वाले कर्मचारियों को क्यों रख रही है?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कथित इंटर्नल चैट्स के अनुसार, अमेरिकी कर्मचारियों का सीधा सवाल है कि जब कंपनी खुद हजारों लोगों की संख्या कम करना चाह रही है, तो वह H-1B वीजा वाले विदेशी कर्मचारियों को बाहर का रास्ता क्यों नहीं दिखा रही? कर्मचारियों का तर्क है कि अगर कंपनी को स्टाफ कम करना पड़ रहा है, तो उसका यह दावा झूठा साबित होता है कि अमेरिका में योग्य कर्मचारियों की कमी के कारण विदेशी लोगों को काम पर रखा जा रहा है. इसके अलावा, कंपनी के मुनाफे में 31 फीसदी की बढ़ोतरी का हवाला देते हुए कर्मचारियों ने पूछा है कि इतनी अच्छी कमाई के बावजूद कर्मचारियों को जाने के लिए क्यों कहा जा रहा है.
सरकार की जांच से बढ़ा दबाव
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी सरकार माइक्रोसॉफ्ट समेत कई कंपनियों द्वारा विदेशी कर्मचारियों को ‘ग्रीन कार्ड’ दिलाने की प्रक्रिया की जांच कर रही है. प्रशासन को आशंका है कि कंपनियां स्थानीय अमेरिकी नागरिकों की जगह विदेशी कर्मचारियों को तरजीह दे रही हैं.
माइक्रोसॉफ्ट की सफाई
इन आरोपों और इंटर्नल विवाद पर माइक्रोसॉफ्ट ने स्पष्टीकरण दिया है. कंपनी का कहना है कि पिछले वित्त वर्ष में उनके द्वारा किए गए 80 फीसदी H-1B आवेदन नई भर्तियों के लिए नहीं, बल्कि पहले से काम कर रहे मौजूदा कर्मचारियों के वीजा रिन्यूअल के लिए थे. कंपनी ने यह भी साफ किया कि वह सभी कर्मचारियों को वीजा नियमों के तहत समान वेतन देती है और किसी तरह का भेदभाव नहीं करती.
फिलहाल यह साफ है कि 60 हजार कर्मचारियों को दिया गया यह ऑफर जबरन छंटनी नहीं है, और कर्मचारियों के पास इसे स्वीकार करने या ठुकराने के लिए इस साल के अंत तक का समय है. लेकिन इस कदम ने विदेशी बनाम स्थानीय कर्मचारियों की बहस को फिर से हवा दे दी है.