2 कट्ठा में लगा दें यह घास, 2 गाय और 20 बकरियों को 365 दिन खाएंगी हरा चारा, 12 साल तक रहेगी हरी-भरी

2 कट्ठा में लगा दें यह घास, 2 गाय और 20 बकरियों को 365 दिन खाएंगी हरा चारा, 12 साल तक रहेगी हरी-भरी


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Animal Husbandry Napier Grass: बिहार के गयाजी में पशुपालक किसानों के लिए नेपियर घास हरा चारे का बेहतरीन विकल्प बन रही है. इसे एक बार लगाकर कई साल तक चारा मिल सकता है. गया के किसान जीवेश कुमार इसकी खेती कर अन्य किसानों को डंठल बेचकर कमाई कर रहे हैं. आइये जानते हैं इसकी पहली कटाई कितने दिनों में कर सकते हैं.

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गयाजी: गाय, भैंस और बकरी पालन करने वाले किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनके लिए हरा चारा एकत्र करना है. इसकी नियमित उपलब्धता और उसकी बढ़ती लागत से हर किसान परेशान रहता है. ऐसे में नेपियर घास बिहार के किसानों के लिए उपयोगी विकल्प बन सकती है. इसे एक बार खेत में लगाने के बाद उचित देखभाल और प्रबंधन से कई वर्षों तक हरा चारा प्राप्त किया जा सकता है. इसकी कुछ उन्नत किस्में अच्छी परिस्थितियों में लगभग 10-12 साल तक उत्पादन दे सकती हैं. आइये जानते हैं इसके बारे में.

ये हरा चारा भी बेचकर कर सकते हैं कमाई

नेपियर घास का उत्पादन किस्म, मिट्टी, पानी, खाद, मौसम और कटाई की संख्या पर निर्भर करता है. अच्छी परिस्थितियों में 1 कट्ठा जमीन पर साल भर 2 जानवरों के लिए हरा चारा प्राप्त किया जा सकता है. बिहार के किसान यदि स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार इसकी खेती करें, तो वे अपने पशुओं के लिए हरे चारे की उपलब्धता बढ़ा सकते हैं और चारा खरीदने पर होने वाला खर्च कम करने में मदद पा सकते हैं. इसके अतिरिक्त चारा बेचकर आय अर्जित करने का अवसर भी मिल सकता है.

किसान जीवेश ने की है 2 कट्ठे में खेती

गया जिले में भी कुछ किसान सुपर नेपियर घास की खेती कर रहे हैं, जिसमें मानपुर प्रखंड के महुआर नवादा गांव के किसान जीवेश कुमार यादव भी हैं. जीवेश पिछले 3 साल से नेपियर घास की खेती कर रहे हैं और दो जानवर के साथ 20 बकरियों के लिए हरा चारा साल भर उगा रहे हैं. किसान जीवेश की मानें तो उन्होंने मथुरा से 3 साल पहले 15 फीट का डंठल लेकर आए थे. उसे अपने नर्सरी में लगा दिया. धीरे-धीरे उन्होंने इसे बढाया और 2 कट्ठे में लगा दिया. अब जिले के अन्य किसानों को भी 5 रुपये में एक डंठल बेच रहे हैं.

जानें कब कर सकते हैं पहली कटाई

नेपियर घास बहुवर्षीय फसल है. पहली कटाई सामान्यतः रोपाई के लगभग 60-90 दिन बाद की जा सकती है. इसके बाद मौसम और बढ़वार के अनुसार लगभग 30-45 दिनों के अंतराल पर कटाई संभव हो सकती है. सर्दियों में इसकी बढ़वार धीमी हो सकती है. इसकी खेती से किसानों को हर बार नई फसल लगाने की जरूरत कम पड़ती है. इससे लंबे समय तक चारे की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिल सकती है. पर्याप्त चारा उपलब्ध होने पर पशुओं के आहार का प्रबंधन आसान हो सकता है.

पोषक तत्वों से भरपूर होता है ये चारा

इसमें नमी, रेशा और अन्य पोषक तत्व होते हैं. हालांकि पशु वैज्ञानिक के अनुसार पशुओं को केवल नेपियर घास खिलाना पर्याप्त नहीं है. संतुलित आहार में सूखा चारा, उपयुक्त मात्रा में दाना या अन्य ऊर्जा एवं प्रोटीन स्रोत, खनिज मिश्रण और साफ पानी भी शामिल होने चाहिए. पशु को खिलाने से पहले घास को साफ करके छोटे टुकड़ों में काटना बेहतर होता है. इससे उसे खाने में आसानी होती है और चारा बर्बाद होने की संभावना कम होती है.



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