वैवाहिक जीवन में शारीरिक संबंध से इनकार क्रूरता… जस्टिस कोशी के वो 3 अहम फैसले, अब बनेंगे दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस


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शादी में रहते हुए शारीरिक संबंध से इनकार क्रूरता… जस्टिस कोशी के 3 अहम फैसले

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तेलंगाना हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस पी. सैम कोशी दिल्ली हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस होंगे. सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने उनके नाम की सिफारिश की है. तेलंगाना से पहले पी. सैम कोशी लंबे समय तक छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जस्टिस के तौर पर सेवा कर चुके हैं. वह अपने कई फैसलों को लेकर चर्चा में रहे हैं.

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शादी में रहते हुए शारीरिक संबंध से इनकार क्रूरता... जस्टिस कोशी के 3 अहम फैसलेZoom

जस्टिस पी. सैम कोशी दिल्ली हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस होंगे. (फोटो-CBI कोर्ट हैदराबाद)

दिल्ली हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस पी. सैम कोशी होंगे. CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने सोमवार को इसकी सिफारिश की. पी. सैम कोशी अभी तेलंगाना में कार्यवाहक चीफ जस्टिस हैं. इससे पहले वह छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में भी जस्टिस रह चुके हैं. वह अब तक अपने कई फैसलों को लेकर चर्चा में रहे हैं. उसका ऐसा ही एक फैसला वैवाहिक जीवन में शारीरिक संबंधों को लेकर था. 2022 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का जस्टिस रहते हुए उन्होंने वैवाहिक जीवन में शारीरिक संबंध से इनकार करने को क्रूरता माना था. इसके अलावा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में ट्रांसफर से इनकार करने पर भी वह चर्चा में रहे थे, जिसकी वजह से सुप्रीम कोर्ट को कोलेजियम में बदलाव करना पड़ा था.

जस्टिस पी. सैम कोशी दिल्ली हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय की जगह लेंगे. जस्टिस उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में प्रमोशन के बाद 5 अक्टूबर को ये पद छोड़ दिया था. वर्तमान में दिल्ली हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव साम्ब्रे हैं. जस्टिस पी. सैम कोशी को न्यायिक व्यवस्था का लंबा अनुभव है. जजशिप लेने से पहले उन्होंने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में लंबे समय तक अधिवक्ता के तौर पर प्रैक्टिस की है.

कौन हैं जस्टिस पी. सैम कोशी?

तेलंगाना की महबूबनगर जिला कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक जस्टिस पी. सैम कोशी का जन्म 30 अप्रैल 1967 को हुआ था. प्रारंभिक शिक्षा जबलपुर से पूरी करने के बाद उन्होंने 1987 में जी.एस कॉलेज जबलपुर से बीकॉम किया और फिर रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर से कानून की डिग्री हासिल की. 1991 में एक अधिवक्ता के तौर पर पंजीकरण कराने के बाद उन्होंने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर में प्रैक्टिस की.

नवंबर 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद वे बिलासपुर शिफ्ट हो गए और 2013 तक वहां प्रैक्टिस करते रहे. इस बीच 2002 से 2004 तक वे छत्तीसगढ़ सरकार के सरकारी अधिवक्ता और 2005-06 में उप महाधिवक्ता भी रहे. वे कई सरकारी बैंकों व संस्थाओं के स्थायी वकील भी रहे.2013 में उन्होंने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में एडीशनल जज के तौर पर जजशिप स्वीकार और 2016 में स्थायी न्यायाधीश बने. 2023 से वे तेलंगाना हाईकोर्ट में जस्टिस हैं. हाल ही में उन्होंने कार्यवाहक चीफ जस्टिस बनाया गया था.

जस्टिस कोशी के अहम फैसले

1- शादी में रहते हुए शारीरिक संबंध न बनाना क्रूरता

जस्टिस पी. सैम कोशी उस दो सदस्यीय बेंच का हिस्सा थे, जिसने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में वैवाहिक संबंधों को लेकर अहम फैसला सुनाया था.बेंच ने शादी में रहते हुए बिना उचित कारण शारीरिक संबंध से इनकार को क्रूरता माना था. उनके इस फैसले पर देश भर में बहस शुरू हो गई थी कि क्या वैवाहिक जीवन के सबसे निजी पहलू को तलाक के आधार के तौर पर इतना सख्त माना जाना चाहिए. हालांकि एक बहुत बड़े वर्ग से इस फैसले को व्यावहारिक माना था. 25 फरवरी 2022 को सुनाए गए इस फैसले में हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13(1)(i-a) को आधार माना गया था, जिसमें लिखा है कि पति-पत्नी के बीच शारीरिक संबंध वैवाहिक जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा हैं. बिना किसी उचित कारण के जीवनसाथी को इससे वंचित रखना मानसिक क्रूरता के समान है.

2- रेप के मामले में दोषमुक्ति

जस्टिस पी. सैम कोशी की पीठ ने साक्ष्यों और त्रुटिपूर्ण पुलिस जांच के आधार पर रेप के आरोपी को बरी कर दिया था. मामले में निजी अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया था. मामला जब जस्टिस पीएम सैम कोशी की पीठ के सामने पहुंचा तो सामने आया कि पुलिस ने डीएनए व अन्य मेडिकल साक्ष्यों को नजरअंदाज किया. जो साक्ष्य कोर्ट को दिए गए वे आरोप साबित करने के लिए काफी नहीं थी. मामले में कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि न्याय भावनाओं से नहीं बल्कि ठोस सबूतों के आधार पर होता है.

3- PMLA के तहत चोरी-छिपे जमानत पर रोक

जस्टिस कोशी की पीठ ने ED और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले एक सख्त आदेश सुनाया था. दरअसल अदालत के सामने आया कि कई रसूखदार आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए रिट याचिकाएं दायर कर रहे हैं, ताकि उन्हें अग्रिम जमानत के तौर पर राहत मिल सके. जस्टिस कोशी की पीठ ने इस पर आपत्ति जताई थी. उन्होंने पीएमएलए के तहत गिरफ्तारी के खिलाफ दायर इन याचिकाओं पर कहा था कि इन्हें चोरी छिपे जमानत की सुनवाई में बदलने नहीं दिया जा सकता. यदि आरोपी को राहत चाहिए तो उसे नियमित प्रक्रिया तक तहत आना चाहिए.

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में ट्रांसफर से कर दिया था इनकार

जस्टिस पी. सैम कोशी ने 2023 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में ट्रांसफर से इनकार कर दिया था. दरअसल सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उनका ट्रांसफर छत्तीसगढ़ से मध्य प्रदेश करने की सिफारिश की थी. जस्टिस कोशी ने खुद वहां जाने से इनकार कर दिया और अन्य किसी भी राज्य में भेजने की इच्छा जताई थी. बाद में कॉलेजियम ने अपनी सिफारिश बदली थी और उनका ट्रांसफर तेलंगाना हाईकोर्ट किया था.



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