भारत के आर्थिक उत्थान का अगला पड़ाव, सजेगा पश्चिमी भारत का महामंच
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Rising Bharat Summit: 7.7 फीसदी की मजबूत जीडीपी विकास दर, 825.3 बिलियन डॉलर के ऐतिहासिक निर्यात और एमएसएमई सेक्टर की अदम्य ताकत के दम पर भारत अब केवल उद्योग लगाने वाला देश नहीं, बल्कि टिकाऊ और वैश्विक संस्थाएं गढ़ने वाला ‘उद्यमशील राष्ट्र’ बनने की दिशा में कदम बढ़ा चुका है.
‘राइजिंग भारत समिट – वेस्ट एडिशन’ में आर्थिक भविष्य पर महामंथन होगा.
जैसे-जैसे भारत आर्थिक गति से वैश्विक महत्वाकांक्षा की ओर बढ़ रहा है, पश्चिमी भारत की पूंजी, उद्योग और उद्यमशीलता की ऊर्जा भविष्य को आकार देने में मदद कर रही है. ‘न्यूज़18 राइजिंग भारत समिट – वेस्ट एडिशन’ उन लोगों और विचारों को एक मंच पर लाएगा जो इस बदलाव को आगे बढ़ा रहे हैं. भारत की उद्यम यात्रा (Enterprise Journey) एक महत्वपूर्ण मोड़ पर आ गई है. व्यवसाय बनाने, निवेश आकर्षित करने और बड़े पैमाने पर निर्माण करने की अपनी क्षमता साबित करने के बाद, अब देश को टिकाऊ संस्थानों का विकास करना होगा, उद्योगों को नए सिरे से ढालना होगा और वैश्विक नेतृत्व के लिए प्रतिस्पर्धा करनी होगी.
‘भारतीय उद्यम का अगला चरण’ (The Next Phase of Indian Enterprise) विषय के तहत, ‘न्यूज़18 राइजिंग भारत समिट – वेस्ट एडिशन’ इस बदलाव को चर्चा के केंद्र में लाएगा. इसमें यह पता लगाया जाएगा कि कैसे पूंजी, नीति, तकनीक, बुनियादी ढांचा और प्रतिभा मिलकर भारत के विकास के अगले दशक को गति दे सकते हैं. भारत इस चरण में काफी मजबूत आर्थिक गति के साथ प्रवेश कर रहा है. वित्त वर्ष 2025-26 में वास्तविक जीडीपी (GDP) में 7.7% की वृद्धि का अनुमान है, सकल स्थिर पूंजी निर्माण (Gross Fixed Capital Formation) जीडीपी का 30% रहने का अनुमान है, और वित्त वर्ष 2024-25 में वस्तुओं और सेवाओं का कुल निर्यात 825.3 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है.
वहीं, एमएसएमई (MSMEs) का जीडीपी में 31.1%, विनिर्माण क्षेत्र में 35.4% और निर्यात में 48.58% योगदान है. ये आंकड़े एक ऐसी अर्थव्यवस्था को दर्शाते हैं जो निवेश, उद्यमशीलता और वैश्विक बाजारों की जरूरतों को पूरा करने की बढ़ती क्षमता से संचालित है. इस विकास गाथा में पश्चिमी भारत की भूमिका केंद्रीय है. महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और गोवा जैसे राज्यों को मिलाकर, यह क्षेत्र वित्तीय बाजारों, औद्योगिक समूहों, बंदरगाहों और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, विनिर्माण क्षमताओं, तकनीकी केंद्रों, नवीकरणीय ऊर्जा और एक मजबूत सेवा अर्थव्यवस्था को एक साथ लाता है.
पूंजी, बुनियादी ढांचे और उद्यमशीलता की महत्वाकांक्षाओं का यह संगम पश्चिमी भारत को विचारों को निवेश से, उद्योगों को बाजारों से, और क्षेत्रीय क्षमताओं को राष्ट्रीय स्तर से जोड़ने में सक्षम बनाता है. यह सब मिलकर पश्चिमी भारत को एक ‘उद्यमशील राष्ट्र’ (Enterprise Nation) के निर्माण में एक शक्तिशाली ताकत बनाता है.