जुम्मन भारत में रह गया, साहिदा पहुंच गई बांग्लादेश… SIR में कटा था नाम, क्या वोटर लिस्ट से तय होती है नागरिकता?


Agency:एजेंसियां

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कोलकाता हाईकोर्ट में एक पति ने याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि उसकी पत्नी को जबरन बांग्लादेश भेज दिया गया है. याचिकाकर्ता जुम्मन का आरोप है कि पत्नी का नाम SIR में कट गया था. बीएसएफ ने उसे वेरिफिकेशन के लिए हिरासत में लिया था जो लौटी ही नहीं.

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जुम्मन भारत में रह गया, साहिदा पहुंच गई बांग्लादेश... SIR में कटा था नामZoom

जुम्मन ने कोलकाता हाईकोर्ट में याचिका दायर की है.

पति भारत में रह रहा हो और पत्नी को जबरन बांग्लादेश भेज दिया जाए तो. कोलकाता हाईकोर्ट में एक ऐसा ही मामला सामने आया है. याचिकाकर्ता जुम्मन का आरोप है कि सीमा सुरक्षा बल ने उसकी 28 साल की पत्नी को अवैध रूप से बांग्लादेश भेज दिया है. उसने अदालत से मांग की है कि उसे पत्नी की भारतीय नागरिकता साबित करने का मौका दिया जाए. कोर्ट ने याचिकाकर्ता ओ 25 नवंबर तक हलफनामा और संबंधित दस्तावेज जमा करने की अनुमति दी है.

हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले उत्तर 24 परगना जिले के निवासी जुम्मन फकीर है. जो अपनी पत्नी साहिदा फकीर के साथ मुंबई में रह रहे थे. TOI की एक रिपोर्ट में जुम्मन के हवाले से बताया गया है कि पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान पत्नी का नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया था. इस फैसले के खिलाफ उन्होंने अपील भी की थी जो लंबित है. उनका आरोप है कि 19 जुलाई को मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच साहिदा को अपने साथ ले गई. उनका दावा है कि उन्हें ये यकीन दिलाया गया था कि वेरिफिकेशन के बाद पत्नी को रिहा कर दिया जाएगा, मगर उन्हें 23 जुलाई को बांग्लादेश भेज दिया गया.

SIR का फुल फॅर्म स्पेशल इंटेसिव रिवीजन है. यानी मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण. इसका उद्देश्य मतदाता सूची की जांच करना है, ताकि यह सुनिश्चित हो कि सूची में सिर्फ पात्र मतदाता ही रहें. इसीलिए SIR का प्रावधान किया गया है. इसमें उन लोगों के नाम हटाए दिए जाते हैं, जिनके एक से ज्यादा स्थान पर नाम दर्ज हों. उनकी मृत्यु हो गई हो. सामान्य निवास से जुड़ा कोई बदलाव हो या दस्तावेजों में गलत जानकारी के आधार पर नाम जोड़ा गया हो. ऐसे लोगों का निर्धारित प्रक्रिया के तहत नाम हटाया जाता है. इससे पहले संबंधित व्यक्ति को सूचना दी जाती है और उसे अपनी पात्रता सिद्ध करने का मौका भी दिया जाता है.

भारत में वोटर लिस्ट में नाम होने या न होने से नागरिकता का कोई संबंध नहीं है. दरअसल देश में नागरिकता का निर्धारण नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत होता है. इसके तहत भारत का नागरिक उसे माना जाता है, जिसका जन्म भारत में हुआ हो या उसके माता-पिता भारत के नागरिक हों. कुछ निश्चित शर्तों के साथ लंबे समय में भारत में रहने वाले विदेशी व्यक्तियों को भी नागरिकता दी जाती है.

इसमें नागरिकता छोड़े जाने के नियमों का भी प्रावधान है. इसमें कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से नागरिकता छोड़ सकता है. अगर वह दूसरे देश की नागरिकता लेता है तो उसकी भारतीय नागरिकता अपने आप खत्म हो जाती है. कई बार देश के खिलाफ साजिश रचने, युद्ध करने जैसे अपराधों की वजह से भी नागरिकता समाप्त कर दी जाती है.

किसी व्यक्ति को देश से बाहर तभी भेजा जा सकता है, जब वह भारत में अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाए. हालांकि इसकी एक पूरी कानूनी प्रक्रिया है. कोलकाता हाईकोर्ट ने फिलहाल इस मामले जुम्मन को 25 नवंबर तक हलफनामे और दस्तावेज जमा करने का मौका दिया है. जुम्मन को इन दस्तावेजों में ये साबित करना होगा कि साहिदा भारत की ही नागरिक है. मामले की अगली सुनवाई 26 नवंबर को होगी.

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