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Success Story: मप्र के छतरपुर के रहने वाले डॉ विदित सोनकिया जिनका सपना हड्डी रोग विशेषज्ञ बनना था. हालांकि, उनके घर में कोई डॉक्टर नहीं था. फिर भी अपनी मेहनत से उन्होंने मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम पास कर एमबीबीएस पूरा किया और डॉक्टर बनें. फिलहाल, वह 1 साल से छतरपुर के नर्मदा केयर हॉस्पिटल में सेवाएं दे रहे हैं. साथ ही फ्री हेल्थ कैंप में सेवाएं भी देते हैं.
Success Story: छतरपुर के रहने वाले डॉ विदित सोनकिया जिनका सपना हड्डी रोग विशेषज्ञ बनना था. हालांकि, उनके घर में कोई डॉक्टर नहीं था. छतरपुर में रहकर 12वीं पास की. राजस्थान के कोटा में मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी की. फिर उज्जैन के मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस पूरा किया. फिर आर्थोपेडिक में पीजी किया. 2 साल यूपी में रहकर मरीजों की सेवा की. अभी 1 साल से छतरपुर के नर्मदा केयर हॉस्पिटल में सेवाएं दे रहे हैं. साथ ही फ्री हेल्थ कैंप में सेवाएं भी देते हैं.
डॉ विदित सोनकिया बताते हैं कि वह छतरपुर जिले के नर्मदा केयर अस्पताल में हड्डी विशेषज्ञ के तौर पर सेवाएं देते हैं. साथ ही जिले में होने वाले फ्री हेल्थ कैंप में जाते रहते हैं. फिलहाल, वह लवकुश नगर के फ्री हेल्थ कैंप में पहली बार आए हैं. मरीजों को मुफ्त में सेवा देते हैं. मुफ्त में ही मरीजों की जांच करते हैं और दवाइयां भी फ्री में देते हैं. जहां भी निशुल्क स्वास्थ्य शिविर में उन्हें बुलाया जाता है. वहां जरूर जाते हैं.
डॉक्टर बनने का सफर
डॉ विदित बताते हैं कि बचपन में देखते थे कि उनके आसपास स्वास्थ्य शिविर लगाए जाते थे तो उस शिविर में मरीजों की सेवा करने के लिए दूर-दूर से डॉक्टर आते थे. उन्हें देखकर मुझे भी मन में लगा करता था कि बड़े होकर मैं भी डॉक्टर बनूंगा और मरीजों की सेवा के लिए गांव-गांव तक जाऊंगा. हालांकि, मुझे पता नहीं था कि डॉक्टर कैसे बनते हैं और कौन सी पढ़ाई करनी होती है?
डॉ विदित बताते हैं कि उन्होंने छतरपुर में रहकर ही 12वीं की पढ़ाई की है. इसके बाद राजस्थान के कोटा में जाकर तैयारी की. पहले ही प्रयास में मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम क्रैक किया और उज्जैन से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उत्तरप्रदेश से ओर्थोपेडिक्स में पीजी किया है. 2 साल तक यूपी में ही प्रैक्टिस की है. पिछले साल से छतरपुर में प्रैक्टिस कर रहे हैं.
डॉ विदित बने हड्डी विशेषज्ञ
डॉ विदित बताते हैं कि मुझे बचपन से ही हड्डी विशेषज्ञ बनने में इंटरेस्ट था. हमारे परिचित भी हड्डी विशेषज्ञ थे. वह हड्डियों का इलाज करते थे. उन्हें देखकर मोटि वेट और इंस्पायर होता था. हालांकि, मेरे घर में कोई डॉक्टर नहीं था. लेकिन आसपास के माहौल को देखा करता था तो मन में डॉक्टर बनने की ललक थी.
डॉ विदित बताते हैं कि अगर आप डॉक्टर बनना चाहते हैं तो अपने अंदर मरीजों की सेवा का भाव लाइए तभी आपके मन में डॉक्टर बनने का जुनून रहेगा. स्कूल के दौरान ही तय कर लें कि मुझे डॉक्टर बनना है. 10वीं के बाद ही यूजी नीट की तैयारी शुरू कर दें. अब तो कोचिंग के लिए राजस्थान के कोटा जाने की जरूरत भी नहीं है.
डॉ बताते हैं कि वह हड्डियों के डॉक्टर हैं. लोगों में हड्डियों की समस्याएं 60 के बाद आती हैं लेकिन अधिक स्टेरॉयड दवाएं लेने से 60 की उम्र से पहले ही हड्डियों में समस्याएं देखने को मिल रही हैं.