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Sharad Purnima Nadia Couple Worships Daughter as Lakshmi: पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में एक परिवार ने लक्ष्मी पूजा के दौरान अनोखी पहल की है. जिसकी खूब चर्चा हो रही है. एक कपल ने मिट्टी की मूर्ति के बजाय अपनी 8 साल की बेटी श्रुति को देवी लक्ष्मी के रूप में सजाया. पुजारी ने धार्मिक विधि से पूजा कराई. परिवार का कहना है कि इस पहल का मकसद महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा खत्म करने तथा बेटियों को बराबरी का सम्मान देने का संदेश फैलाना है.
मिट्टी की मूर्ति नहीं, अपनी बेटी में देखी मां लक्ष्मी, शरद पूर्णिमा पर बंगाल के इस परिवार ने क्यों अपनाया अनोखा तरीका?
Lakshmi Puja 2026: शरद पूर्णिमा पर आमतौर पर घरों में मां लक्ष्मी की प्रतिमा रखकर पूजा की जाती है. लेकिन पश्चिम बंगाल के एक परिवार ने इस बार अलग तरीका अपनाया. यहां माता-पिता ने अपनी 8 साल की बेटी को ही मां लक्ष्मी के रूप में सजाकर पूजा की. इस पहल के पीछे धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक संदेश भी है. परिवार चाहता है कि बेटियों को सम्मान मिले और महिलाओं तथा बच्चों के खिलाफ हिंसा खत्म हो. आखिर इस पूजा के पीछे की वजह क्या है?
मिट्टी की मूर्ति की जगह बेटी को बनाया लक्ष्मी
मीडिया में छपी खबर के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के कृष्णगंज स्थित शिवनिवास हलदरपाड़ा में रहने वाले देबाशीष विश्वास और उनकी पत्नी लक्ष्मी विश्वास ने कोजागरी लक्ष्मी पूजा पर अपनी 8 साल की बेटी श्रुति को देवी लक्ष्मी की तरह सजाया. बच्ची को एक आसन पर बैठाया गया. इसके बाद पुजारी को बुलाकर धार्मिक रीति-रिवाजों से पूजा की गई. परिवार की इस पहल को देखने के लिए आसपास के लोग भी पहुंचे. इलाके में इस अनोखी पूजा की चर्चा होने लगी. दंपती ने बेटी को देवी का रूप देकर समाज में महिलाओं के सम्मान और लड़के-लड़कियों के बीच भेदभाव खत्म करने का संदेश देने की कोशिश की.
महिलाओं के खिलाफ हिंसा से चिंतित परिवार
कोलकाता में आरजी कर अस्पताल में महिला डॉक्टर की हत्या, कुलतली में उमा के साथ दुष्कर्म और हत्या और कृष्णानगर में लक्ष्मी पूजा के दिन एक युवती के साथ दुष्कर्म, हत्या और शव जलाने को देखते हुए इन घटनाओं ने महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं. ऐसे माहौल में विश्वास दंपती ने अपनी बेटी की पूजा के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि महिलाओं और बच्चियों को सम्मान और सुरक्षा मिलनी चाहिए. परिवार चाहता है कि समाज में बेटियों को कमतर समझने की सोच बदले.
‘हर परिवार अपनी बेटी को लक्ष्मी माने’
श्रुति की मां लक्ष्मी विश्वास ने कहा कि हर परिवार को अपनी बेटी को लक्ष्मी के रूप में देखना चाहिए. उन्होंने कहा कि महिलाएं मातृशक्ति का स्रोत हैं और उन्हें अपनी बेटी की इस तरह पूजा करने पर गर्व है. देबाशीष विश्वास के मुताबिक, बेटी के जन्म के बाद उनके परिवार में काफी सुधार हुआ. उनका मानना है कि बेटियों की उपेक्षा नहीं होनी चाहिए. लड़के और लड़कियों के बीच अंतर किए बिना दोनों को बराबर सम्मान देना जरूरी है. परिवार की यह पहल इसी सोच को आगे बढ़ाने की कोशिश है.
पुजारी ने भी बताया सामाजिक जागरूकता का संदेश
स्थानीय पुजारी तरुण बनर्जी ने विश्वास परिवार की पहल को सामाजिक जागरूकता से जुड़ा कदम बताया. उनके मुताबिक, बेटियां मां के समान हैं. उन्हें प्यार और सम्मान के साथ बड़ा करने से अगली पीढ़ी पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है. पूजा के दौरान देबाशीष विश्वास ने उन लोगों के लिए भी प्रार्थना की, जिन्होंने योग्य होने के बावजूद अपनी नौकरी खो दी है. उन्होंने अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे लोगों के जीवन में फिर से खुशहाली आने की कामना की.
पूजा के जरिए बेटियों के सम्मान की अपील
विश्वास परिवार की पहल को देखने के लिए पड़ोसी उनके घर पहुंचे. परिवार को उम्मीद है कि इस तरह के कदमों से बेटियों के प्रति समाज की सोच बदलने में मदद मिलेगी. साथ ही महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता भी बढ़ेगी. दंपती का संदेश है कि बेटी को सम्मान देना केवल पूजा या किसी त्योहार तक सीमित नहीं होना चाहिए. रोजमर्रा की जिंदगी में भी बेटियों को बराबरी का दर्जा मिलना चाहिए. परिवार ने अपनी इस पहल के जरिए इसी विचार को सामने रखा.