Mecca Pact News Hindi: अमेरिका और ईरान के बीच फिर से जंग भड़कने का खतरा बढ़ रहा है. पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ईरान पहुंचे थे, ताकि इस संघर्ष को खत्म किया जा सके. लेकिन ईरान ने उन्हें उल्टे पैर लौटा दिया था. इसके बाद अब युद्ध रोकने के लिए मक्का पैक्ट के तीन देश यानी पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की साथ आए हैं. मक्का पैक्ट से जुड़े टॉप अधिकारियों की सोमवार को ईरान की राजधानी तेहरान में मीटिंग होने वाली है, जिसमें आसिम मुनीर भी होंगे. यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है, जब यमन के हूती विद्रोहियों के हमले सऊदी अरब पर तेज हो गए हैं. सऊदी अरब को मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ रहा है.
वहीं अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी भी तेज हो गई है. इस बैठक का मकसद क्षेत्र में तनाव कम करने और कूटनीतिक रास्ता तलाशने की कोशिशों को आगे बढ़ाना है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब की ओर से रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान, पाकिस्तान की ओर से सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और तुर्की की ओर से खुफिया प्रमुख इब्राहिम कालिन इस बातचीत में हिस्सा लेंगे. ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर चर्चा होनी है. हालांकि मीटिंग का सबसे बड़ा कारण हूतियों का हमला है, क्योंकि ये सीधे सऊदी की अर्थव्यवस्था को निशाना बना रहे हैं. तेल के उन ठिकानों पर हमले हो रहे हैं, जहां तबाही मचने से लंबे समय तक सऊदी उठ नहीं पाएगा. ईरान क्योंकि हूतियों को समर्थन देते है, इस वजह से माना जा रहा है कि ईरान ही युद्ध रुकवा सकता है. वहीं दूसरा कारण 3 नवंबर को अमेरिका में होने वाला मिडटर्म चुनाव भी है.
मक्का पैक्ट के बाद पहली बड़ी बैठक
इस बैठक को इसलिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि मक्का पैक्ट के तीनों सदस्य देशों के प्रतिनिधि पहली बार ईरान के साथ इस स्तर पर एक साथ बातचीत कर रहे हैं. अगस्त में हुए इस रक्षा समझौते के तहत किसी एक सदस्य देश पर सशस्त्र हमला बाकी सदस्यों पर हमला माना जाएगा. इस समझौते की अहमियत ऐसे समय बढ़ गई है, जब सऊदी अरब पर लगातार हमले हो रहे हैं. इसी महीने मक्का पैक्ट के सदस्य देशों के मंत्रियों ने रियाद में इमरजेंसी मीटिंग की थी. उस बैठक में सऊदी अरब में सैन्य बलों और उनकी क्षमताओं की तेजी से तैनाती सुनिश्चित करने पर सहमति बनी थी. हालांकि, समझौते पर अमल की प्रक्रिया अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. पाकिस्तान ने पिछले सप्ताह इसे मंजूरी दे दी थी, जबकि तुर्की की संसद में अभी इसका पास होना बचा है.
पाकिस्तान कौन करा रहा
ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, इस बैठक की पहल पाकिस्तान की ओर से हुई. पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर पिछले सप्ताह तेहरान गए थे, जहां उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की थी. ईरानी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, उस दौरान ईरानी अधिकारियों ने मुनीर से कहा था कि जब तक तेहरान की मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक अमेरिका के साथ बातचीत नहीं होगी. इससे पहले पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता से जून में एक अंतरिम शांति समझौता कराने में मदद मिली थी. हालांकि, कुछ ही सप्ताह बाद अमेरिका और ईरान के बीच फिर लड़ाई शुरू हो गई और वह समझौता टिक नहीं सका. दूसरी तरफ कतर भी तनाव कम करने की कोशिशों में जुटा है. कतर के मध्यस्थों ने रविवार को तेहरान में ईरानी अधिकारियों से मुलाकात की थी.
हूती हमलों से बढ़ी सऊदी अरब की मुश्किल
इस पूरे घटनाक्रम में यमन के हूती विद्रोहियों की भूमिका सबसे खास है. रविवार को सऊदी अरब ने मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने का दावा किया. हूती हमले अमेरिका और इजरायल की ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई से जुड़े क्षेत्रीय संघर्ष को और अस्थिर कर रहे हैं. इससे अमेरिका के सहयोगी सऊदी अरब पर दबाव बढ़ा है. मक्का पैक्ट के तहत सदस्य देशों की साझा सुरक्षा प्रतिबद्धता के कारण ऐसे हमले पूरे समझौते की परीक्षा भी बन सकते हैं. सऊदी अरब के सार्वजनिक कूटनीति मामलों के उपमंत्री रायद क्रीमली ने कहा कि तेहरान की यह यात्रा मौजूदा संकट को कम करने, कूटनीतिक समाधान को बढ़ावा देने और कतर तथा पाकिस्तान की मध्यस्थता को समर्थन देने की कोशिशों का हिस्सा है.
ट्रंप की चेतावनी से बढ़ा जंग का खतरा
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव भी लगातार बढ़ रहा है. अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म इलेक्शन से पहले ट्रंप ईरान पर अपनी जीत दिखाना चाहते हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा था कि अमेरिका ईरान के खिलाफ एक और सैन्य अभियान चला सकता है. इसके जवाब में ईरानी नेतृत्व ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने फिर सैन्य कार्रवाई की, तो इस बार जवाब पहले से ज्यादा कड़ा होगा. रिपोर्ट के मुताबिक, दोबारा हमले की स्थिति में ईरानी सुरक्षा अधिकारियों ने खाड़ी क्षेत्र में समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबल्स को काटने की धमकी दी है.