India US trade Deal: यूरोप की धरती से पीयूष गोयल ने भारत-अमेर‍िका ट्रेड डील पर द‍िया अपडेट

India US trade Deal: यूरोप की धरती से पीयूष गोयल ने भारत-अमेर‍िका ट्रेड डील पर द‍िया अपडेट


India US trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित ट्रेड डील पर अब फाइनल मुहर लगने का वक्त करीब आ गया है. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने नीदरलैंड दौरे के बीच यह बड़ी जानकारी साझा की है. उन्होंने कहा क‍ि अमेरिका के साथ बातचीत का सबसे बड़ा और अहम हिस्सा पूरा हो चुका है और अब दोनों पक्ष सिर्फ इस समझौते की बारीकियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं.

यूरोप को दी सख्त नियमों में ढील देने की नसीहत

हेग में आयोजित इंडिया-नीदरलैंड बिजनेस फोरम में पीयूष गोयल ने सिर्फ अमेरिका की बात नहीं की, बल्कि यूरोपीय देशों को एक बड़ी व्यावसायिक सलाह भी दी. उन्होंने कहा कि यूरोप को अपने कड़े व्यापारिक नियमों में थोड़ी ढील देनी चाहिए, ताकि विदेशी निवेश और कारोबार ज्यादा रफ्तार पकड़ सके. हालांकि, नीदरलैंड के व्यापार मंत्री ने इस पर सधी हुई प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नियमों को ढीला करने की भी अपनी एक सीमा होती है.

भारत-नीदरलैंड के बीच 23.3 अरब डॉलर का कारोबार

यह दौरा नीदरलैंड के साथ भारत के व्यापारिक रिश्ते और मजबूत करने के लिए भी बेहद अहम है. वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों पर नजर डालें तो दोनों देशों के बीच कुल 23.3 अरब डॉलर का बंपर कारोबार हुआ है. व्यापार का गणित कुछ ऐसा है कि भारत नीदरलैंड को पेट्रोलियम उत्पाद, जीवनरक्षक दवाएं, ऑर्गेनिक केमिकल, कपड़े और भारी मात्रा में स्टील बेचता है. वहीं, बदले में वहां से मशीनरी, एडवांस मेडिकल उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदता है.

सेमीकंडक्टर और ग्रीन एनर्जी फ्यूचर का गेम चेंजर

अब दोनों देशों की नजर भविष्य की तकनीक यानी सेमीकंडक्टर और ग्रीन एनर्जी सेक्टर पर टिक गई है. भारत की टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और नीदरलैंड की दिग्गज चिप मेकर कंपनी एएसएमएल (ASML) के बीच हुआ करार इस साझेदारी की सबसे मजबूत और अहम कड़ी साबित होने जा रहा है.

FDI में नीदरलैंड भारत का चौथा सबसे बड़ा पार्टनर

कारोबार के मोर्चे पर दोनों देशों का तालमेल गजब का है. नीदरलैंड की करीब 300 कंपनियां जैसे फिलिप्स , सिग्निफाई और एनएक्सपी भारत में बड़े पैमाने पर अपना कारोबार चला रही हैं. वहीं, पलटवार में भारत की भी लगभग 300 कंपनियां, जिनमें TCS, Infosys और HCL Tech जैसे बड़े नाम शामिल हैं, नीदरलैंड में झंडे गाड़ रही हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि भारत में आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के मामले में नीदरलैंड दुनिया का चौथा सबसे बड़ा देश बन चुका है.



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