China Afghanistan Rail Route News: चीन से अफगानिस्तान के लिए रवाना हुई पहली मालगाड़ी, क्या-क्या लेकर जा रही, भारत को क्यों रखनी चाहिए नजर?

China Afghanistan Rail Route News: चीन से अफगानिस्तान के लिए रवाना हुई पहली मालगाड़ी, क्या-क्या लेकर जा रही, भारत को क्यों रखनी चाहिए नजर?


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China-Afghanistan Train: चीन के शेडोंग प्रांत से अफगानिस्तान के हैरातान के लिए पहली मालगाड़ी रवाना हुई है. इसमें करीब 80 लाख युआन यानी लगभग 11.5 करोड़ रुपये का सामान है. खेप में कपड़ा, रासायनिक कच्चा माल, औजार और निर्माण मशीनरी शामिल हैं. ट्रेन कजाखस्तान और उज्बेकिस्तान से होकर करीब 20 दिन में अपनी मंजिल तक पहुंच सकती है. चीन को उम्मीद है कि इस रेल मार्ग से परिवहन खर्च घटेगा और अफगानिस्तान के साथ कारोबारी रिश्ते मजबूत होंगे.

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चीन ने अफगानिस्तान के लिए पहली मालगाड़ी भेजी है. (Reuters/AI जेनेरेटेड)

Afghanistan China News: चीन अब अफगानिस्तान तक सामान पहुंचाने के लिए रेल नेटवर्क का इस्तेमाल बढ़ा रहा है. चीन के शेडोंग प्रांत से अफगानिस्तान के हैरातान के लिए पहली मालगाड़ी रवाना हुई है. तालिबान के आने के बाद यह पहली मालगाड़ी है. शुक्रवार को इस ट्रेन में करीब 80 लाख युआन यानी लगभग 11.4 करोड़ रुपये का सामान लदा है. इसमें कपड़ा, रासायनिक कच्चा माल, औजार और निर्माण मशीनरी शामिल हैं. ट्रेन को अपनी मंजिल तक पहुंचने में करीब 20 दिन लगने का अनुमान है. इस नए रेल रूट से चीन और अफगानिस्तान के बीच कारोबार आसान होने और सामान ढोने का खर्च घटने की उम्मीद जताई जा रही है. इस रेल रूट के जरिए चीन ने सीधे तौर पर पाकिस्तान को बाईपास कर दिया है. वहीं भारत के लिए भी यह नजर रखने वाली चीज है कि चीन और अफगानिस्तान के तालिबान में रिश्ते बढ़ रहे हैं. वहीं इससे पहले सितंबर 2019 में हैरातान से चीन के लिए एक ट्रेन 41 कंटेनरों में करीब 1,100 टन टैल्क लेकर रवाना हुई थी. इससे पता चलता है कि इस रास्ते का इस्तेमाल दोनों दिशाओं में कारोबार के लिए किया जा सकता है.

चीन से अफगानिस्तान कैसे पहुंचेगी ट्रेन?

चीन और अफगानिस्तान की सीमा वखान कॉरिडोर के जरिए मिलती है. लेकिन यहां से दोनों देशों के बीच कोई रेल रूट नहीं है. इसका सबसे बड़ा कारण है कि ये पहाड़ी इलाका है. चीनी मीडिया आउटलेट शिन हुआंगहे के मुताबिक, यह ट्रेन शेडोंग प्रांत के लिनई शहर में तैयार किए गए सामान को लेकर रवाना हुई है. रास्ते में यह पहले कजाकिस्तान और फिर उज्बेकिस्तान से गुजरेगी. इसके बाद उज्बेकिस्तान के तर्मेज बॉर्डर क्रॉसिंग से अफगानिस्तान में दाखिल होगी. ट्रेन की मंजिल अफगानिस्तान के बल्ख प्रांत में स्थित हैरातान पोर्ट है. यहां तक पहुंचने में करीब 20 दिन लग सकते हैं.

हैरातान अफगानिस्तान के लिए सामान लाने का एक अहम रास्ता है. यह उज्बेकिस्तान के तर्मेज शहर के पास स्थित है. दोनों जगहों के बीच अमू दरिया नदी पर बना फ्रेंडशिप ब्रिज रेल और सड़क यातायात को जोड़ता है. हैरातान से आगे रेल लाइन मजार-ए-शरीफ तक जाती है, जिससे सामान अफगानिस्तान के अंदर तक पहुंच सकता है. हालांकि, इस ट्रेन के चीन से बाहर निकलने के लिए किस खास सीमा मार्ग का इस्तेमाल किया जाएगा, इसकी जानकारी रिपोर्ट में नहीं दी गई है.

ट्रेन में क्या-क्या सामान भेजा गया है?

इस मालगाड़ी में करीब 80 लाख युआन कीमत का सामान लदा है. इसमें मुख्य रूप से चार तरह के सामान शामिल हैं.

  • कपड़ा: लिनई में तैयार किए गए टेक्सटाइल उत्पाद.
  • रासायनिक कच्चा माल: उद्योगों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री.
  • औजार: अलग-अलग कामों में इस्तेमाल होने वाले टूल्स.
  • निर्माण मशीनरी: निर्माण से जुड़े कामों में इस्तेमाल होने वाली मशीनें.

इस ट्रेन की खास बात यह है कि यह शेडोंग प्रांत से हैरातान के लिए चलने वाली पहली समर्पित मालगाड़ी है. इसका मतलब यह नहीं है कि चीन और अफगानिस्तान के बीच रेल से कारोबार पहली बार हो रहा है. इससे पहले भी दोनों देशों के बीच रेल के जरिए सामान पहुंचाया जा चुका है.

रेल रूट क्यों हो रहा इस्तेमाल

अब तक शेडोंग से अफगानिस्तान भेजे जाने वाले सामान को मुख्य रूप से सड़क या सड़क और रेल के मिले-जुले रास्तों से पहुंचाया जाता था. चीनी अधिकारियों के मुताबिक, इन तरीकों में खर्च ज्यादा आता था और सामान कब पहुंचेगा, इसका अनुमान लगाना भी मुश्किल होता था. हालांकि, इस खास ट्रेन से वास्तव में कितनी बचत होगी, इसके आंकड़े अभी उपलब्ध नहीं हैं.

चीन-अफगानिस्तान व्यापार के लिए क्यों अहम है यह कदम?

शेडोंग से हैरातान तक नई मालगाड़ी शुरू होना चीन और अफगानिस्तान के बीच सामान की आवाजाही को बेहतर बनाने की कोशिश है. इससे चीन के अलग-अलग प्रांतों के कारोबारियों को अफगानिस्तान तक माल भेजने का एक और विकल्प मिल सकता है. फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस रेल सेवा को नियमित बनाया जाएगा और क्या आगे दूसरे चीनी शहरों से भी ऐसी ट्रेनें चलेंगी. अगर ऐसा होता है, तो मध्य एशिया के रास्ते चीन और अफगानिस्तान के बीच व्यापार के लिए रेल नेटवर्क की भूमिका और बढ़ सकती है.



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