सर्बिया चुनाव में ‘कॉकरोचों’ की जीत, युवाओं के विद्रोह ने खत्‍म की अलेक्जेंडर वुचिच की बादशाहत


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सर्बिया चुनाव में ‘कॉकरोचों’ की जीत, पुतिन के चहेते की बादशाहत खत्‍म

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Serbia Election Results: यूरोप के कई देशों में इन दिनों विरोध-प्रदर्शन का दौर चल रहा है. इटली से लेकर फ्रांस और सर्बिया तक में प्रदर्शन की आग भड़की हुई है. इन सबके बीच, सर्बिया में हुए चुनाव के नतीजे सामने आ गए हैं. कद्दावर नेता अलेक्जेंडर वुचिच के एक दशक से भी ज्‍यादा के शासन का अंत हो गया है.

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सर्बिया चुनाव में 'कॉकरोचों' की जीत, पुतिन के चहेते की बादशाहत खत्‍मZoom

छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के बीच सर्बिया में हुए चुनाव में अलेक्जेंडर वुचिच को हार का सामना करना पड़ा है. (फोटो: AP)

Serbia Election Results: यूरोप के कई देशों में इन दिनों हिंसक विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं. फ्रांस और इटली जैसे देश इसकी आग में जल रहे हैं. सेंट्रल यूरोप के देश सर्बिया में भी युवा और छात्र सड़कों पर थे. ठीक उसी तरह जैसे भारत में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की अगुआई में विरोध-प्रदर्शन किया गया. उसी सर्बिया में लोकतांत्रिक तरीके से सत्‍ता परिवर्तन हो गया है. सेंट्रल यूरोप के इस देश में चुनाव कराया गया था, जिसमें तकरीबन डेढ़ दशक से सत्‍ता पर काबिज कद्दावर नेता अलेक्जेंडर वुचिच को हार का सामना करना पड़ा है. इस तरह यूरोपीय देश में ‘कॉकरोचों’ की जीत हुई है.

सर्बिया में लंबे समय से सत्ता पर काबिज राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुचिच को संसदीय चुनाव में हार स्वीकार करनी पड़ी है. भ्रष्टाचार और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के आरोपों के खिलाफ दो साल से आंदोलन कर रहे छात्रों के समर्थन वाले विपक्षी गठबंधन ‘स्टूडेंट्स लिस्ट’ को 250 सदस्यीय संसद में जीत हासिल की है. वहीं, अलेक्जेंडर वुचिच की दक्षिणपंथी सर्बियाई प्रोग्रेसिव पार्टी (एसएनएस) स्‍टूडेंट्स लिस्‍ट से पिछड़ गई है. इस चुनाव को बाल्कन देश की राजनीति में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है. अलेक्जेंडर वुचिच की पार्टी पिछले 14 वर्षों से सत्ता में प्रभावशाली स्थिति में थी. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का समर्थन प्राप्त अलेक्जेंडर वुचिच ने छात्र आंदोलन को विदेशी ताकतों के इशारे पर चलाया जा रहा अभियान बताया था.

वोटिंग खत्‍म होने के डेढ़ घंटे बाद ही अलेक्जेंडर वुचिच ने स्‍वीकारी हार

मतदान समाप्त होने के करीब डेढ़ घंटे बाद अलेक्जेंडर वुचिच ने अपनी हार स्वीकार करते हुए कहा, ‘अब यह स्पष्ट है कि हम हार गए हैं और स्टूडेंट्स लिस्ट जीत गई है.’ उन्होंने हालांकि अपनी हार के लिए स्वतंत्र मीडिया और कुछ यूरोपीय देशों के कथित हस्तक्षेप को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने एक कथित ‘अमेरिकी डीप स्टेट’ पर भी आरोप लगाए. अलेक्जेंडर वुचिच के अनुसार, उनकी पार्टी को लगभग 17 लाख वोट मिले, जबकि छात्र समर्थित विपक्ष को करीब 22 लाख वोट हासिल हुए. चुनाव में लगभग 70 प्रतिशत मतदान होने का अनुमान है, जो वर्ष 2000 के बाद देश में सबसे अधिक मतदान में से एक होगा.

बेलग्रेड समेत कई शहरों में जश्न

चुनाव परिणाम सामने आने के बाद राजधानी बेलग्रेड सहित सर्बिया के कई शहरों में लोगों ने सड़कों पर उतरकर जश्न मनाया. समर्थकों ने कारों के हॉर्न बजाए, गाने गाए और ‘अलेक्जेंडर चला गया’ के नारे लगाए. बेलग्रेड में अलेक्जेंडर वुचिच समर्थकों के एक साल से अधिक समय से डेरा डाले जाने वाले केंद्रीय पार्क में लोगों ने बाड़ और तंबू हटाने शुरू कर दिए. खाली हो चुके शिविर में बाद में एक तंबू में आग लगा दी गई. कुछ युवाओं द्वारा पीछे हट रहे पुलिस वाहनों के काफिले पर पत्थर फेंकने की भी खबर है. तनाव को देखते हुए पुलिस ने चुनाव आयोग के मुख्यालय के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी थी. दंगा-रोधी उपकरणों से लैस पुलिसकर्मियों और विशेष वाहनों को संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया गया था. स्टूडेंट्स लिस्ट के उम्मीदवार राडोमिर साइसिच ने कहा कि यह जीत केवल चुनावी नतीजों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन लोगों की जीत है जिन्होंने विश्वास बनाए रखा और संघर्ष जारी रखा. उन्होंने इसे भय के खिलाफ नागरिकों की जीत बताते हुए कहा कि इसके साथ बड़ी जिम्मेदारी भी आती है.

भ्रष्टाचार के आरोपों से कमजोर हुई अलेक्जेंडर वुचिच की पकड़

अलेक्जेंडर वुचिच की लोकप्रियता वर्ष 2024 में नोवी साद रेलवे स्टेशन पर कंक्रीट की छतरी गिरने की घटना के बाद कमजोर होने लगी थी. इस हादसे में 16 लोगों की मौत हो गई थी. छात्रों ने निर्माण कार्य में कथित भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और सरकारी लापरवाही को हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए व्यापक आंदोलन शुरू किया था. हादसे में अपने बेटे को खोने वाली दिजाना ह्रका भी जश्न मनाने वालों में शामिल थीं. उन्होंने कहा कि वह पिछले दो वर्षों से इस क्षण का इंतजार कर रही थीं और अब उम्मीद करती हैं कि जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाएगा.

लोकतंत्र बहाली के वादे पर लड़ा चुनाव

स्टूडेंट्स लिस्ट का नेतृत्व विश्वविद्यालय के छात्रों ने किया, हालांकि छात्र स्वयं उम्मीदवारों की सूची में शामिल नहीं थे. इसके बजाय इसमें विशेषज्ञों, खिलाड़ियों, किसानों और कलाकारों जैसे लोगों को जगह दी गई. आंदोलन ने अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करने का वादा किया. यूरोपीय संघ ने भी चुनाव पर करीबी नजर रखी. यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने छात्र आंदोलन को बधाई देते हुए कहा कि सर्बिया के लोगों ने बड़ी संख्या में मतदान कर अपने देश का भविष्य तय किया है. उन्होंने कानून के शासन, मीडिया की स्वतंत्रता, भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने में सहयोग की पेशकश की.



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