युद्ध की आहट से कच्चे तेल में लगी आग, क्या बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल और खाद के दाम? जानिए सरकार का प्लान

युद्ध की आहट से कच्चे तेल में लगी आग, क्या बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल और खाद के दाम? जानिए सरकार का प्लान


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अमेरिका और ईरान के बीच फिर से युद्ध भड़कने की आशंका है. इसी के चलते कच्‍चे तेल के दाम 115 डॉलर बैरल के पार चला गया है. इससे भारत का आयात बिल बढ़ रहा है. इसका असर व्यापार घाटे और चालू खाता घाटे पर पड़ रहा है. तेल कंपनियों की अंडर रिकवरी बढ़ रही है. उर्वरकों के दाम भी बढ़ गए हैं.

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कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर देश के आयात बिल, व्यापार घाटे और रुपये की विनिमय दर पर पड़ रहा है.

नई दिल्‍ली. अमेरिका ने ईरान पर फिर से हमले करने की धमकी दी है. पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा फिर मंडराने से कच्चे तेल का रेट चढ़ गया है. अक्टूबर में भारतीय रिफाइनरियों के लिए कच्चे तेल की औसत कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई. यह बीते 12 वर्षों का सबसे ऊंचा मासिक औसत स्तर है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल की औसत कीमत 140 डॉलर प्रति बैरल और डीजल की कीमत 154 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है. उर्वरकों के दाम भी वैश्विक बाजार में चढ़े हैं. ऐसे में अब सवाल यह है कि क्‍या आने वाले समय में पेट्रोल, डीजल और उर्वरकों के दाम भारत में बढ़ सकते हैं.

भारतीय तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ज्‍यातर कच्‍चा तेल आयात करती हैं. इसलिए वैश्विक स्तर पर कीमतों के इस उफान से सरकारी तेल कंपनियों का अंडर-रिकवरी और घाटा तेजी से बढ़ रहा है. चूंकि सरकार पहले ही एक्साइज ड्यूटी में रियायतें दे चुकी है, इसलिए राजकोषीय मोर्चे पर केंद्र के पास कंपनियों को राहत देने का दायरा अब काफी सीमित हो चुका है. पहले से ही ईंधन और उर्वरक पर दी जाने वाली सब्सिडी पिछले साल के स्तर से काफी अधिक हो चुकी है.

माल ढुलाई 10 गुना तक महंगी हुई

पश्चिम एशिया में तनाव का असर लॉजिस्टिक्स और शिपिंग पर देखने को मिल रहा है. प्रमुख व्यापारिक मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों और चालक दल की सुरक्षा को लेकर जोखिम बहुत बढ़ गया है.

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (FIEO) के मुताबिक, पश्चिम एशिया के बंदरगाहों तक कंटेनर भेजने की दरें 800 डॉलर से बढ़कर सीधे 8,000 से 10,000 डॉलर तक पहुंच गई हैं. 22 अक्टूबर को ड्र्यूरी वर्ल्ड कंटेनर इंडेक्स में 40 फीट के कंटेनर का भाड़ा 4,585 डॉलर पर पहुंच गया. एक साल पहले यह 1,746 डॉलर था. माल ढुलाई का खर्च बढ़ने से भारत में आयातीत सामान महंगा होने की आशंका पैदा हो गई है.

क्या बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल और खाद के दाम?

टाइम्‍स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, राहत की बात यह है कि देश में उर्वरक की कीमतें बढ़ने का खतरा नहीं है. पर फिलहाल तत्काल खतरे के आसार कम हैं. सरकार के वरिष्‍ठ अधिकारियों के अनुसार, उर्वरक कंपनियों ने कीमतें नीचे रहने के दौरान ही अगले सीजन की जरूरतों के लिए पर्याप्त स्टॉक खरीद लिया था. हालांकि, अगर खाड़ी देशों का यह संकट लंबे समय तक खिंचता है, तो भविष्य में सरकार को उर्वरक सब्सिडी का बोझ बढ़ाना पड़ सकता है ताकि किसानों पर सीधी मार न पड़े.

सरकार का क्‍या है प्‍लान?

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर देश के आयात बिल, व्यापार घाटे और रुपये की विनिमय दर पर पड़ रहा है. इसके बावजूद सरकार वित्तीय मोर्चे पर संभली हुई स्थिति में दिख रही है. बजट अनुमानों से अधिक विनिवेश प्राप्तियों, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से मिले शानदार डिविडेंड और मजबूत बने हुए टैक्स कलेक्शन सरकार को बड़ा सहारा मिला है. केंद्र सरकार को भरोसा है कि चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.3 फीसदी के तय लक्ष्य के भीतर ही रहेगा.



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