मूंगफली में फूल आने के 60-65 दिन बाद करें ये काम, फलियों के विकास में मदद
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बलिया. मूंगफली की खेती किसानों के लिए आय का एक नया स्रोत बन सकती है. जिले की बलुई दोमट और करईल मिट्टी में मूंगफली की खेती की संभावनाओं पर कृषि विभाग और एमएससी के छात्र शोध कर रहे हैं. श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय के मृदा विज्ञान और कृषि रसायन विभाग के एचओडी प्रो. अशोक कुमार सिंह के मुताबिक, अच्छी पैदावार के लिए बुवाई के समय पोषक तत्वों का ध्यान रखना, टिक्का रोग से बचाव करना और फली बनने के दौरान सही समय पर मिट्टी चढ़ाना जरूरी है.
बलिया की मिट्टी में मूंगफली की खेती की संभावना: बलिया की बलुई दोमट और करईल मिट्टी में मूंगफली की खेती की संभावनाओं पर कृषि विभाग और एमएससी के छात्र शोध कर रहे हैं. इसका उद्देश्य जैविक और रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल से उत्पादन और गुणवत्ता पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करना है.
बुवाई के समय पोटाश और गंधक का प्रयोग: श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय के मृदा विज्ञान और कृषि रसायन विभाग के एचओडी प्रो. अशोक कुमार सिंह के अनुसार, बुवाई के समय प्रति बीघा 12 किलोग्राम पोटाश और लगभग 15 किलोग्राम गंधक का प्रयोग करना चाहिए. उर्वरकों की मात्रा मिट्टी की जांच और स्थानीय कृषि सलाह के अनुसार तय करें.
टिक्का रोग के लक्षण पहचानें: मूंगफली में टिक्का रोग फफूंद से होने वाली बीमारी है. इसमें पत्तियों पर गोल धब्बे दिखाई दे सकते हैं. समय रहते लक्षणों की पहचान और उचित प्रबंधन से फसल को होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है.
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फफूंदनाशक का इस्तेमाल सावधानी से करें: खबर में कॉपर ऑक्सीक्लोराइड, डाईथेन एम-45 और इन्डोफिल एम-45 जैसे फफूंदनाशकों का उल्लेख किया गया है. किसी भी दवा का छिड़काव करने से पहले उत्पाद के लेबल और कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही सही मात्रा तय करें.
फली बनने से पहले चढ़ाएं मिट्टी: मूंगफली में फूल आने के लगभग 60 से 65 दिन बाद फूल मिट्टी में धंसकर फली बनाते हैं. खबर के मुताबिक, इस प्रक्रिया से करीब 10 दिन पहले पौधों के पास मिट्टी चढ़ाने से फूलों को मिट्टी में धंसने और फलियों के विकास में मदद मिलती है.
फली बनते समय फसल की देखभाल करें: फलियों के विकास के दौरान खेत की नियमित निगरानी करें. कौवों से फसल की सुरक्षा के लिए भी जरूरी उपाय अपनाएं. सही समय पर देखभाल करने से फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में मदद मिल सकती है.