न सीमेंट, न कंक्रीट, फिर भी सैकड़ों साल कैसे खड़े रहते थे पुराने मकान? इंजीनियर से जानें मजबूत दीवारों का राज

न सीमेंट, न कंक्रीट, फिर भी सैकड़ों साल कैसे खड़े रहते थे पुराने मकान? इंजीनियर से जानें मजबूत दीवारों का राज


Last Updated:

Old House Building Techniques: चित्रकूट समेत बुंदेलखंड के कई ग्रामीण इलाकों में आज भी पुराने मकान देखने को मिलते हैं, जिनकी दीवारें दशकों से लेकर सैकड़ों साल तक खड़ी हैं. इन मकानों को बनाने में सीमेंट और कंक्रीट की जगह चूना, गारा, मिट्टी और स्थानीय स्तर पर मिलने वाली दूसरी सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता था. इंजीनियर रवि द्विवेदी के मुताबिक, चूने के साथ गुड़ बनाने की प्रक्रिया से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थ छोया को मिलाकर भी मसाला तैयार किया जाता था. इसी से पत्थरों और ईंटों को जोड़ा जाता था. जानिए, पुराने समय में इन सामग्रियों से मकान कैसे बनाए जाते थे.

चित्रकूट: आज के दौर में घर बनाने के लिए सीमेंट, कंक्रीट, सरिया और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. शहरों से लेकर गांवों तक बड़ी-बड़ी इमारतें बनाई जा रही हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पुराने समय में, जब सीमेंट और कंक्रीट का प्रचलन नहीं था, तब भी लोग इतने मजबूत मकान कैसे बनाते थे, जो दशकों से लेकर सैकड़ों साल तक खड़े रहते थे. इनमें से कई मकानों में आज भी लोग रहते हैं. आइए जानते हैं कि इन घरों के मजबूत होने का क्या राज था और इन्हें कैसे बनाया जाता था.

चित्रकूट समेत बुंदेलखंड के कई ग्रामीण इलाकों में आज भी पुराने मकान देखने को मिलते हैं. इन घरों में कहीं पत्थरों से बनी मोटी दीवारें हैं, तो कहीं मिट्टी, चूने और ईंटों से तैयार मजबूत मकान दिखाई देते हैं. खास बात यह है कि इन मकानों को बनाने में आज की तरह सीमेंट और कंक्रीट का इस्तेमाल नहीं किया जाता था. इसके बजाय चूना, गारा और छोया जैसी सामग्रियों का इस्तेमाल करके मकान बनाए जाते थे. इनसे बने मकान मजबूत होते थे और कम खर्च में तैयार हो जाते थे.

चूना, छुईया और गारे से तैयार होता था मसाला

इस बारे में इंजीनियर रवि द्विवेदी ने लोकल 18 को बताया कि पुराने समय में मकान बनाने के लिए सीमेंट की जगह चूना, छुईया और गारे जैसी सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता था. इन सामग्रियों को मिलाकर एक खास तरह का मसाला तैयार किया जाता था, जिसका उपयोग पत्थरों और ईंटों को आपस में जोड़ने के लिए किया जाता था. उन्होंने बताया कि पारंपरिक निर्माण में चूने के साथ गन्ने से गुड़ बनाने की प्रक्रिया में निकलने वाले बचे हुए वेस्ट का भी इस्तेमाल किया जाता था. इसे स्थानीय स्तर पर छोया कहा जाता है. इन सामग्रियों को मिलाकर तैयार किया गया मसाला दीवारों और पत्थरों को आपस में जोड़ने में मदद करता था.

मिट्टी सोख लेती थी नमी
पुराने मकानों में इस्तेमाल होने वाली मिट्टी और चूने जैसी सामग्रियों की एक खासियत यह भी थी कि वे नमी को सोख लेती थीं. इससे घरों में नमी की समस्या कम होती थी. हालांकि, आज के दौर में लोग मकान बनाने के लिए सीमेंट, बालू और कंक्रीट का ही इस्तेमाल करते हैं.



Source link