1 एकड़ में मालामाल! चिया सीड्स की खेती भर देगी तिजोरी, कमाई का पूरा गणित
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Chia Seeds Farming Tips: खेती में नई फसल आजमाकर कमाई बढ़ाना चाहते हैं, तो चिया सीड्स आपके लिए एक विकल्प हो सकता है. इसके छोटे-छोटे बीजों की मांग हेल्थ फूड के बाजार में है लेकिन बुवाई से पहले यह जानना जरूरी है कि इसकी बिक्री कहां होगी और खर्च काटकर कितना मुनाफा बच सकता है.
सतना. खेती में अच्छी कमाई करने के लिए हर बार ज्यादा पानी, महंगे खाद और बड़े खेत की जरूरत नहीं होती. अगर फसल का चुनाव सही हो और बाजार में उसे बेचने की अच्छी व्यवस्था हो, तो कम लागत में भी बेहतर आमदनी का रास्ता खुल सकता है. चिया सीड्स की खेती इसी तरह का एक विकल्प है, जिसकी मांग हेल्थ फूड के बाजार में देखी जाती है. इस फसल की खास बात यह है कि इसे कम पानी में उगाया जा सकता है और करीब चार महीने में फसल तैयार हो जाती है. लोकल 18 को जानकारी देते हुए सतना के किसान अंशुमान सिंह ने बताया कि चिया सीड्स की खेती के लिए अक्टूबर के आखिरी सप्ताह से नवंबर के मध्य तक का समय उपयुक्त रहता है. यह रबी सीजन की फसल है और इस दौरान मिलने वाला तापमान इसके बीजों के अंकुरण के लिए अनुकूल रहता है. सही समय पर बुवाई करने से फसल को बढ़ने के लिए बेहतर परिस्थितियां मिलती हैं.
चिया सीड्स की खेती के लिए सबसे पहले खेत की अच्छी तरह तैयारी करना जरूरी है. इसके लिए दो से तीन बार जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बनाया जाता है और खेत को समतल किया जाता है. ध्यान रखें कि खेत में पानी जमा न हो क्योंकि ज्यादा जलभराव से पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है और उनके सड़ने का खतरा रहता है. फसल की बुवाई के लिए एक एकड़ में करीब एक से डेढ़ किलोग्राम बीज की जरूरत होती है. बीजों को कतार में बोना बेहतर रहता है. वहीं इसके लिए एक लाइन से दूसरी लाइन के बीच लगभग 30 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे के बीच 10 से 15 सेंटीमीटर की दूरी रखी जाती है और बीज को करीब एक सेंटीमीटर की गहराई पर बोया जाता है. चिया सीड्स के बीज काफी बारीक होते हैं, इसलिए इन्हें सूखी मिट्टी या रेत में मिलाकर बोने से खेत में समान रूप से फैलाने में आसानी होती है.
सिर्फ कुछ सिंचाई में फसल तैयार
चिया सीड्स की खेती में पानी की जरूरत बाकी फसलों की तुलना में कम होती है. सामान्य परिस्थितियों में पूरी फसल के दौरान दो से तीन हल्की सिंचाई की जरूरत पड़ सकती है. पहली सिंचाई बुवाई के बाद मिट्टी में नमी बनाए रखने के लिए, दूसरी फूल आने के समय और तीसरी दाने बनने के दौरान की जाती है. वहीं अगर खेत में पहले से पर्याप्त नमी है, तो जरूरत से ज्यादा पानी देने से बचना चाहिए. चिया के पौधों की पत्तियों में खास गंध होती है, जिसके कारण नीलगाय, बंदर और दूसरे आवारा पशु आमतौर पर इन्हें कम नुकसान पहुंचाते हैं. इससे किसानों को फसल की रखवाली में कुछ राहत मिल सकती है.
110 से 120 दिनों में फसल कटाई
चिया सीड्स की फसल लगभग 110 से 120 दिनों में तैयार हो जाती है. कटाई का सही समय पहचानने के लिए पौधों और बालियों पर ध्यान देना जरूरी है. जब पौधों की पत्तियां पीली पड़कर गिरने लगें और बालियां भूरी होकर सूख जाएं, तब फसल कटाई के लिए तैयार मानी जाती है. इस दौरान सावधानी बरतना जरूरी है ताकि दाने खेत में बिखरकर बर्बाद न हों. कटाई के बाद पौधों से बीज निकालने के लिए हाथों से मड़ाई या थ्रेशर का इस्तेमाल किया जा सकता है. सही परिस्थितियों और बेहतर फसल प्रबंधन में एक एकड़ से करीब 4 से 6 क्विंटल तक उपज मिलने की संभावना बताई जाती है.
बाजार भाव और बिक्री का सही तरीका
चिया सीड्स की कीमत बाजार में करीब 15 हजार रुपये से 25 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक जाती है. इस हिसाब से एक एकड़ से मिलने वाली उपज का सकल मूल्य लगभग 60 हजार से 1.5 लाख रुपये तक हो सकता है. इसमें से बीज, खेत की तैयारी, मजदूरी, सिंचाई, कटाई, सफाई, पैकिंग और परिवहन जैसे खर्च घटाने के बाद भी बढ़िया प्रॉफिट निकल जाएगा.
किसान बेहतर कमाई के लिए अपनी उपज बेचने के पारंपरिक तरीकों के साथ दूसरे बाजारों की संभावनाएं भी तलाश सकते हैं. इसके लिए बड़े शहरों के हेल्थ फूड स्टोर, आयुर्वेदिक कंपनियों और ऑनलाइन बिक्री करने वाले प्लेटफॉर्म से संपर्क करना बेहतर रहता है. सीधे खरीदार मिलने पर बिचौलियों पर निर्भरता कम हो जाती है. इसके अलावा किसान चिया सीड्स की अच्छी तरह सफाई और ग्रेडिंग करके छोटे पैकेटों में बेचने की योजना बना सकते हैं. इस तरह उपज में मूल्य संवर्धन किया जा सकता है और अपनी पहचान वाला ब्रांड भी तैयार किया जा सकता है.