कभी बॉलीवुड की टॉप सिंगर थीं अनुराधा पौडवाल, फिर करियर के शिखर पर लिया बड़ा फैसला, 1 झटके में बदल गई पूरी जिंदगी


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हिंदी सिनेमा में कई ऐसे गायक और गायिकाएं रहे हैं, जिनकी आवाज आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई है. अनुराधा पौडवाल भी ऐसी ही एक मशहूर गायिका हैं. 80 और 90 के दशक में उनके गानों का जबरदस्त क्रेज था. रोमांटिक गानों से लेकर दर्द भरे नगमों तक, उनकी आवाज हर तरह के गानों में खूब पसंद की जाती थी. एक दौर ऐसा भी था, जब उनकी तुलना दिग्गज गायिका लता मंगेशकर से होने लगी थी. ‘आशिकी’, ‘तेजाब’ और ‘बेटा’ जैसी फिल्मों के गानों ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई. लेकिन जब उनका करियर बुलंदियों पर था, तभी उन्होंने एक ऐसा फैसला लिया, जिसने उनके पूरे करियर की दिशा बदल दी. उन्होंने फिल्मी गानों से दूरी बनाकर भक्ति संगीत की दुनिया में कदम बढ़ा दिए.

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कभी बॉलीवुड की टॉप सिंगर थीं अनुराधा पौडवाल, फिर 1 फैसले ने बदल दी पूरी जिंदगीZoom

उतार-चढ़ाव भरी रही सिंगर की जिदंगी

नई दिल्ली. अनुराधा पौडवाल का जन्म 27 अक्टूबर 1954 को हुआ था और उनका बचपन मुंबई में बीता. उन्हें बचपन से ही संगीत और फिल्मों में दिलचस्पी थी. इसी लगाव ने उन्हें गायिकी की दुनिया तक पहुंचाया. साल 1973 में रिलीज हुई अमिताभ बच्चन और जया बच्चन की फिल्म ‘अभिमान’ से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की.

शुरुआत में अनुराधा को धीरे-धीरे मौके मिले, लेकिन उनकी आवाज ने जल्द ही संगीतकारों का ध्यान खींचना शुरू कर दिया. फिल्म ‘आप बीती’ में उन्हें एकल गीत गाने का मौका मिला. इसके बाद उन्होंने कई संगीतकारों के साथ काम किया और अपनी सुरीली आवाज के दम पर फिल्म इंडस्ट्री में पहचान बनाने लगीं. अनुराधा पौडवाल के करियर को बड़ी पहचान फिल्म ‘हीरो’ के गानों से मिली. इस फिल्म के संगीत ने उन्हें दर्शकों के बीच खासा लोकप्रिय बना दिया. संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के साथ उनकी जोड़ी भी खूब जमी. इसके बाद उन्होंने ‘मेरी जंग’, ‘राम लखन’ और ‘तेजाब’ जैसी फिल्मों में अपनी आवाज का जादू चलाया.

‘आशिकी’ से मिली बड़ी पहचान

उनके करियर को एक नई ऊंचाई फिल्म ‘आशिकी’ ने दी. 90 के दशक में रिलीज हुई इस फिल्म के गाने लोगों की जुबान पर चढ़ गए. ‘नजर के सामने’, ‘धीरे-धीरे से मेरी जिंदगी में आना’ और ‘जाने जिगर जानेमन’ जैसे गानों ने अनुराधा पौडवाल को घर-घर में मशहूर कर दिया. आज भी इन गानों को लोग उतने ही चाव से सुनते हैं. उस दौर में अनुराधा बॉलीवुड की सबसे लोकप्रिय पार्श्वगायिकाओं में शामिल थीं. उनकी आवाज की मिठास और गाने को भावनाओं के साथ पेश करने का अंदाज उन्हें दूसरी गायिकाओं से अलग बनाता था.

जब करियर के पीक पर फिल्मी गानों से बना ली दूरी

आमतौर पर कोई भी कलाकार सफलता मिलने के बाद अपने करियर को और आगे ले जाना चाहता है, लेकिन अनुराधा पौडवाल ने अपने लिए एक अलग रास्ता चुना. जब वह बॉलीवुड में लगातार हिट गाने दे रही थीं, उसी दौरान उन्होंने फिल्मी गानों से दूरी बनानी शुरू कर दी.उनके इस फैसले ने संगीत की दुनिया में काफी चर्चा बटोरी. जिस गायिका की आवाज फिल्मों में खूब सुनाई देती थी, वह धीरे-धीरे पार्श्वगायिकी से दूर होने लगीं. इसके बाद उन्होंने अपना ज्यादा समय भक्ति संगीत को देना शुरू कर दिया. यह उनके करियर का ऐसा मोड़ था, जिसने उनकी पहचान को एक नया रूप दे दिया.

भजन और देवी गीतों से घर-घर में बनाई पहचान

फिल्मी गानों से दूरी बनाने के बाद अनुराधा पौडवाल ने भक्ति संगीत में अपनी अलग जगह बनाई. उनके भजन और देवी गीत लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हुए. नवरात्रि के दौरान उनके गाए माता के भजन खूब सुनाई देते हैं. वहीं, दिवाली और छठ पूजा जैसे मौकों पर भी उनके भक्ति गीत कई घरों में बजते हैं.अनुराधा की आवाज ने भक्ति संगीत के श्रोताओं के बीच भी वही जगह बनाई, जो कभी फिल्मी गानों के जरिए हासिल की थी. यही वजह है कि आज उनकी पहचान सिर्फ बॉलीवुड की हिट सिंगर के तौर पर ही नहीं, बल्कि भक्ति संगीत की लोकप्रिय आवाज के रूप में भी होती है.

कई बड़े पुरस्कारों से हो चुकी हैं सम्मानित

अनुराधा पौडवाल ने अपने लंबे संगीत सफर में कई उपलब्धियां हासिल की हैं. उनके योगदान के लिए उन्हें चार फिल्मफेयर पुरस्कार और एक राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. इसके अलावा, साल 2017 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री पुरस्कार भी दिया.अनुराधा पौडवाल की कहानी इस बात की मिसाल है कि किसी कलाकार की पहचान सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहती. उन्होंने बॉलीवुड में सफलता की ऊंचाइयां छुईं और फिर भक्ति संगीत को अपना रास्ता बनाया. आज भी उनके पुराने फिल्मी गाने और भजन लोगों के बीच लोकप्रिय हैं और उनकी आवाज संगीत प्रेमियों के दिलों में खास जगह रखती है.



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