Sebi New Rules: शेयर बाजार के ‘खिलाड़ियों’ की गर्दन मरोड़ने जा रहा SEBI, ट्रेडिंग टर्मिनल का खेल होगा खत्म

Sebi New Rules: शेयर बाजार के ‘खिलाड़ियों’ की गर्दन मरोड़ने जा रहा SEBI, ट्रेडिंग टर्मिनल का खेल होगा खत्म


शेयर बाजार में पैसा लगाने वाले आम निवेशकों और स्टॉक ब्रोकरों को राहत म‍िलने वाली है.SEBI ने कुछ ब्रोकरों की मनमानी और पर्दे के पीछे चल रहे उनके खेल पर लगाम कसने की पूरी तैयारी कर ली है. सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा क‍ि ट्रेडिंग टर्मिनल के गलत इस्तेमाल को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए एक बेहद सख्त और नया फ्रेमवर्क लाया जा रहा है. हम बाजार में पारदर्शिता लाने जा रहे हैं, नियमों की धज्जियां उड़ने से रोकेंगे और आम निवेशकों का पैसा सुरक्षित होगा. इसका छोटे न‍िवेशकों को बड़ा फायदा म‍िलने वाला है.

सेबी के रडार पर वो ब्रोकर आ गए हैं, जो अपने खुद के खाते का इस्तेमाल करके दूसरे ट्रेडरों को चोरी-छिपे ट्रेडिंग करने की सुविधा दे रहे थे. मनीकंट्रोल (Moneycontrol) की रिपोर्ट के मुताबिक, होता यह था कि कुछ ब्रोकिंग कंपनियां अपने ट्रेडिंग टर्मिनल से बाहरी ट्रेडरों को सौदे मारने की छूट दे देती थीं. इसके बदले में ये ब्रोकर उन ट्रेडरों से मोटी फीस या मुनाफे का एक बड़ा हिस्सा वसूलते थे. आसान भाषा में समझें तो, शेयर बाजार के जो सख्त नियम-कानून और मार्जिन की शर्तें आम निवेशक के लिए हैं, ये ब्रोकर और ट्रेडर इस ‘किराए के खाते’ वाले जुगाड़ से उन नियमों को खुलेआम चकमा दे रहे थे. सेबी की नजर इस खेल पर पड़ गई है और अब इसे हमेशा के लिए बंद करने का नियम लाया जा रहा है.

बड़े और छोटे ब्रोकरों को एक ही लाठी से नहीं हांका जाएगा

अब तक छोटे और बड़े सभी ब्रोकरों के लिए लगभग एक जैसे नियम होते थे. लेकिन अब सेबी वन साइज फिट्स ऑल यानी एक नियम सबके लिए का तरीका बदलने पर विचार कर रहा है. सेबी का मानना है कि एक ऐसा बड़ा ब्रोकर जिसके पास लाखों ग्राहक और हाई-टेक सिस्टम हैं, और एक ऐसा छोटा ब्रोकर जिसके पास गिने-चुने ग्राहक हैं, दोनों के काम करने का तरीका और जोखिम बिल्कुल अलग होता है. इसलिए, सेबी अब ब्रोकिंग कंपनियों के आकार, ग्राहकों की संख्या, उनकी तकनीक और बाजार में उनके जोखिम के हिसाब से अलग-अलग नियम लागू करने की संभावना तलाश रहा है.

शॉर्ट सेलिंग और शेयर उधार लेने के नियमों की होगी मरम्मत

बात सिर्फ ट्रेडिंग टर्मिनल तक ही सीमित नहीं है. सेबी शॉर्ट सेलिंग और सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग (SLB) के नियमों की भी गहरी समीक्षा कर रहा है. शॉर्ट सेलिंग वह तरीका है जिसमें ट्रेडर शेयर की कीमत गिरने की उम्मीद में पहले शेयर बेच देता है और बाद में सस्ते में खरीदकर मुनाफा कमाता है. वहीं, SLB व्यवस्था के तहत तय शर्तों पर शेयरों को उधार लिया और दिया जाता है. सेबी इन दोनों व्यवस्थाओं के नियमों की समीक्षा कर रहा है ताकि बाजार में शेयरों की खरीद-बिक्री की स्थिति और बेहतर हो सके और शेयरों का सही भाव तय करने की प्रक्रिया में कोई झोल न रहे.

कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में आएगी जान

अगर आप कॉरपोरेट बॉन्ड यानी कंपनियों द्वारा पैसा जुटाने के लिए जारी किए गए कर्ज में निवेश करते हैं, तो अक्सर उन्हें बीच में बेचना मुश्किल होता है क्योंकि बाजार में उस समय कोई खरीदार ही नहीं मिलता. इस परेशानी को दूर करने के लिए सेबी एक मार्केट मेकिंग फ्रेमवर्क ला रहा है. मार्केट मेकर वे खास संस्थाएं होती हैं, जो हर वक्त बाजार में खरीदने और बेचने का भाव उपलब्ध कराती हैं. इससे निवेशकों के लिए अपने बॉन्ड बेचना और जरूरत पड़ने पर पैसा निकालना एकदम आसान हो जाएगा.

बायबैक और OFS का रास्ता होगा सस्ता और झंझट-मुक्त

जब भी कोई कंपनी अपने शेयर वापस खरीदती है यानी बाय बैक करती है, या प्रमोटर ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए अपने शेयर बाजार में बेचते हैं, तो उन्हें बहुत सारे कागजी झमेलों, लंबी प्रक्रियाओं और भारी खर्चों से गुजरना पड़ता है. सेबी अब इन टेंडर ऑफर प्रक्रियाओं को आसान बनाने और कंप्‍लायंस का बोझ और लागत घटाने के विकल्पों पर भी काम कर रहा है.



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