नई दिल्ली. भारतीय शेयर बाजार में पिछले सप्ताह बिकवाल हावी रहे. बीते हफ्ते बीएसई सेंसेक्स 1,605 अंक और एनएसई निफ्टी 546 अंक लुढ़क कर बंद हुए थे. अगले हफ्ते भी बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है. पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर फैसले और कच्चे तेल की की कीमत बाजार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएगी. इसके अलावा, जियो प्लेटफॉर्म्स की शेयर बाजार में लिस्टिंग, विदेशी निवेशकों का रुख और वैश्विक बाजारों के रुझान भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित करेंगे.
बाजार के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द पश्चिम एशिया का तनाव बना हुआ है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर दोबारा सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दिए जाने के बाद वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ गई है. एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर के अनुसार, इस तनाव की वजह से कच्चे तेल के दामों में तेजी भारत के लिए दोहरी मार साबित हो सकती है. भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में क्रूड का महंगा होना देश के ऊर्जा आयात बिल को बढ़ाएगा, जिससे महंगाई बढ़ने, रुपये के कमजोर होने और कंपनियों के मार्जिन पर सीधा असर पड़ने की आशंका है.
अमेरिकी फेडरल रिजर्व का रुख
वैश्विक मोर्चे पर निवेशकों की नजरें अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 27-28 अक्टूबर को होने वाली अहम बैठक पर टिकी हैं. रेलिगेयर ब्रोकिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) अजित मिश्रा का कहना है कि ब्याज दर संबंधी घोषणा इस सप्ताह वैश्विक बाजारों के लिए सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम रहेगी. निवेशक ब्याज दर पर फैसले के साथ ही फेडरल रिजर्व के नीतिगत बयान और अधिकारियों की टिप्पणियों का विश्लेषण करेंगे, ताकि भविष्य में ब्याज दर की दिशा का संकेत मिल सके.
मिश्रा का कहना है कि यदि अमेरिकी केंद्रीय बैंक महंगाई पर सख्त रुख बनाए रखता है, तो अमेरिकी बॉण्ड प्रतिफल और डॉलर में मजबूती आ सकती है. इससे उभरते बाजारों में विदेशी निवेश का प्रवाह प्रभावित हो सकता है. वहीं, यदि फेडरल रिजर्व संतुलित रुख अपनाता है, तो वैश्विक बाजारों को अस्थायी राहत मिल सकती है.
एचएसटी वेल्थ के संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) हरिसेल्वन राधाकृष्णन ने कहा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 27-28 अक्टूबर की बैठक वैश्विक बाजारों के लिए प्रमुख कारक होगी. बाजार को फिलहाल ब्याज दर में बदलाव की उम्मीद कम है, ऐसे में फेडरल रिजर्व का नीतिगत रुख और भविष्य को लेकर उसके संकेत अधिक महत्वपूर्ण होंगे.
कंपनियों के तिमाही नतीजे
राधाकृष्णन के अनुसार, घरेलू स्तर पर औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े और कंपनियों के तिमाही नतीजे यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि की संभावनाएं वैश्विक दबाव का कितना मुकाबला कर पाती हैं. इस सप्ताह टीवीएस मोटर, एशियन पेंट्स, ट्रेंट, सन फार्मा, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, इंडियन ऑयल, बैंक ऑफ बड़ौदा और गेल इंडिया समेत कई कंपनियां अपने वित्तीय परिणाम घोषित करेंगी. जियो प्लेटफॉर्म्स का शेयर 28 अक्टूबर को शेयर बाजार में सूचीबद्ध होगा. इस घटनाक्रम पर निवेशकों की नजर रहेगी और इसका प्राथमिक बाजार की धारणा पर भी असर पड़ सकता है.
कच्चे तेल की कीमत
एनरिच मनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पोनमुडी आर ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतें बाजार के लिए चिंता का प्रमुख विषय बनी हुई हैं. पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच तेल की कीमतों में तेजी भारत के ऊर्जा आयात बिल को बढ़ा सकती है. इससे महंगाई का दबाव बढ़ने, रुपये पर दबाव पड़ने और कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका है.