FPI ने दबाया ‘सेल’ बटन, 2026 में अब तक निकाले ₹3 लाख करोड़, जानिए शेयर बाजार में क्यों मची है भगदड़?

FPI ने दबाया ‘सेल’ बटन, 2026 में अब तक निकाले ₹3 लाख करोड़, जानिए शेयर बाजार में क्यों मची है भगदड़?


नई दिल्‍ली. भारतीय शेयर बाजार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) उल्‍टे पैर भाग रहे हैं. अक्टूबर में एफपीआई अब तक घरेलू इक्विटी बाजार से ₹48,056 करोड़ निकाल चुक हैं. इसके साथ ही वर्ष 2026 में अब तक FPI की कुल निकासी का आंकड़ा ₹3.08 लाख करोड़ तक पहुंच चुका है. पिछले साल यानी 2025 की एफपीआई की कुल निकासी ₹1.66 लाख करोड़ रही थी. यानी अब तक पिछले साल के मुकाबले वे लगभग दोगुने मूल्‍य के भारतीय शेयर अब तक बेच चुके हैं.

हालांकि, पिछले सप्ताह के दौरान उनकी बिकवाली की रफ्तार में उल्लेखनीय कमी आई और दो कारोबारी सत्रों में वे शुद्ध खरीदार भी रहे. सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (सीडीएसएल) के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने सितंबर में भारतीय शेयरों से 35,861 करोड़ रुपये निकाले थे. इससे पहले जुलाई में उन्होंने 20,200 करोड़ रुपये और अगस्त में 29,631 करोड़ रुपये का निवेश किया था.

क्‍यों बिकवाल बने एफपीआई

चॉइस वेल्थ के मुख्य निवेश रणनीति अधिकारी धीरज गौड़ के अनुसार, विदेशी निवेशकों की इस भगदड़ के पीछे कई बड़े वैश्विक और घरेलू कारक जिम्मेदार हैं. कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, पश्चिम एशिया तनाव, कंपनियों के कमजोर नतीजे, महंगाई की आशंकाएं और घरेलू बाजार में नकदी की उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता प्रमुख कारण हैं. पश्चिम एशिया में तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर करीब 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं. इसके अलावा, घरेलू कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजे और बाजार में नकदी (लिक्विडिटी) को लेकर बनी अनिश्चितता ने माहौल को और बिगाड़ा है. वहीं, ₹30,213 करोड़ के विशालकाय जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ ने भी बाजार से नकदी को अस्थायी रूप से सोख लिया, जिससे बिकवाली का दबाव और बढ़ गया.

जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा कि 23 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कमी आने के पीछे अमेरिकी बॉण्ड प्रतिफल में गिरावट, रुपये में मजबूती और आकर्षक शेयर मूल्यांकन जैसे कारक रहे. अमेरिका में 10 साल के बॉण्ड पर प्रतिफल 5.36 प्रतिशत से घटकर करीब पांच प्रतिशत पर आ गया, जबकि रुपया मजबूत होकर 94.94 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया. खासतौर पर बड़ी कंपनियों के शेयरों का मूल्यांकन निवेशकों को आकर्षक लगा.

क्या वाकई गंभीर है संकट?

निवेश मंच ट्रैक के सह-संस्थापक और सीईओ वेदांत गुप्ते का मानना है कि निकासी का यह आंकड़ा पहली नजर में जितना डरावना दिखता है, असल स्थिति उतनी खराब नहीं हो सकती. भारतीय शेयर बाजार में FPI की हिस्सेदारी पहले ही कई वर्षों के निचले स्तर पर आ चुकी है, जबकि घरेलू संस्थागत और खुदरा निवेशकों (DIIs) की बढ़ती भागीदारी ने बाजार को सहारा दिया है. इसके अलावा, आईपीओ जैसे नए अवसरों में विदेशी पूंजी का आना यह दिखाता है कि विदेशी निवेशक भारतीय बाजार को पूरी तरह अलविदा नहीं कह रहे, बल्कि अपने पोर्टफोलियो को रीबैलेंस कर रहे हैं.

बॉन्ड मार्केट से भी पैसे खींच रहे विदेशी निवेशक

विदेशी निवेशक अक्टूबर में भारतीय ऋण या बॉण्ड बाजार में भी शुद्ध बिकवाल रहे. उन्होंने पूर्ण सुलभ मार्ग (एफएआर) के तहत 3,858 करोड़ रुपये और स्वैच्छिक प्रतिधारण मार्ग (वीआरआर) के तहत 1,332 करोड़ रुपये की निकासी की. हालांकि, सामान्य मार्ग के जरिये उन्होंने 3,737 करोड़ रुपये का निवेश किया.



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