856 KM का ‘शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे’: देवी के दरबारों को जोड़ेगा यह हाईवे, 409 गांवों में नाप-जोख तेज

856 KM का ‘शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे’: देवी के दरबारों को जोड़ेगा यह हाईवे, 409 गांवों में नाप-जोख तेज


महाराष्ट्र से गोवा की दूरी को समेटने और सफर को बेहद शानदार बनाने वाले 856 किलोमीटर लंबे ‘शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे’ (Nagpur-Goa Shaktipeeth Expressway) का सपना अब तेजी से जमीन पर उतरने लगा है. यह महज एक सड़क नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र के विदर्भ, मराठवाड़ा और पश्चिम महाराष्ट्र को सीधे गोवा से जोड़ने वाला एक ऐसा महाप्रोजेक्ट है, जो विकास के नए दरवाजे खोलेगा. सरकार ने इसके लिए कमर कस ली है और 13 जिलों के 409 गांवों में जमीन की नाप-जोख (Joint Measurement Survey) का काम युद्ध स्तर पर शुरू हो गया है. आइए इस पूरे प्रोजेक्ट की ए टू जेड डिटेल, इसका रूट और भविष्य के पूरे प्लान को आसान भाषा में समझते हैं.

इस एक्सप्रेसवे का नाम ‘शक्तिपीठ’ रखने के पीछे एक बहुत बड़ा आध्यात्मिक कारण है. दरअसल, यह हाईवे एक ‘आध्यात्मिक कॉरिडोर’ (Spiritual Corridor) की तरह काम करेगा. महाराष्ट्र में देवी के कई प्रमुख शक्तिपीठ और बड़े तीर्थ स्थल मौजूद हैं. यह एक्सप्रेसवे कोल्हापुर की महालक्ष्मी, धाराशिव की तुलजा भवानी और माहूर की रेणुका माता जैसे प्रमुख शक्तिपीठों को एक सीधे और सुगम रास्ते से जोड़ेगा. इसके अलावा, यह पंढरपुर, अक्कलकोट और गजानन महाराज (शेगांव) जैसे पवित्र स्थानों तक जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी वरदान साबित होगा. तीर्थयात्रा को आसान और सुरक्षित बनाने के इसी विजन के कारण इसे शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे का नाम दिया गया है.

जमीन अधिग्रहण का काम कहां तक पहुंचा?

इस प्रोजेक्ट के लिए कुल 409 गांवों की जमीन ली जानी है. ताज़ा अपडेट के मुताबिक कुल 409 गांवों में से 155 गांवों में जॉइंट मेजरमेंट सर्वे यानी जमीन की नाप-जोख का काम पूरी तरह से खत्म हो चुका है.विदर्भ क्षेत्र के वर्धा और यवतमाल जैसे जिलों में यह सर्वे अपनी मंजिल तक पहुंच चुका है.

पश्चिम महाराष्ट्र के सांगली, सोलापुर और कोल्हापुर जिलों में हाल ही में नए सिरे से जमीन नापने का काम शुरू किया गया है.फिलहाल बाकी बचे 254 गांवों में प्रशासन और इंजीनियरों की टीमें लगातार सर्वे के काम में जुटी हुई हैं.

कितना विशाल है यह प्रोजेक्ट?

शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे के विशाल आकार का अंदाजा इसके भौगोलिक फैलाव से लगाया जा सकता है. यह कोई आम हाईवे नहीं है; इसके लिए भारी-भरकम पैमाने पर संसाधनों की जरूरत होगी. इस पूरे 856 किलोमीटर के एक्सप्रेसवे को बिछाने के लिए करीब 8,760 हेक्टेयर जमीन की जरूरत होगी. यह एक्सप्रेसवे महाराष्ट्र के 13 बड़े जिलों और उनकी 40 तहसीलों का सीना चीरता हुआ गुजरेगा, जिससे इन इलाकों में कनेक्टिविटी का पूरा ढांचा ही बदल जाएगा.

महाराष्ट्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट को कागजों से निकालकर हकीकत में बदलने के लिए 16 महीने का एक सख्त और स्पष्ट एक्शन प्लान तैयार किया है.सरकार की योजना है कि दिसंबर 2027 तक पूरी 8,760 हेक्टेयर जमीन का भौतिक अधिग्रहण (Physical Acquisition) पूरा कर लिया जाए और किसानों व जमीन मालिकों को उनका मुआवजा सौंप दिया जाए.

जनवरी 2028 से शुरू होगा निर्माण: जमीन पूरी तरह हाथ में आते ही, बिना कोई समय गंवाए, जनवरी 2028 से बुलडोजर और मशीनें मैदान में उतर जाएंगी और एक्सप्रेसवे का वास्तविक निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा.

किस जिले से कितना गुजरेगा शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे?

संशोधित अलाइनमेंट के मुताबिक, एक्सप्रेसवे का रूट तय कर लिया गया है. सबसे ज्यादा फायदा यवतमाल, सोलापुर और कोल्हापुर जिलों को होने वाला है, क्योंकि एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा हिस्सा इन्हीं जिलों से होकर गुजरेगा.

वर्धा: 35 किलोमीटर

यवतमाल: 137 किलोमीटर (सबसे बड़ा हिस्सा)

नांदेड़: 20 किलोमीटर

हिंगोली: 70 किलोमीटर

परभणी: 60 किलोमीटर

बीड: 39 किलोमीटर

लातूर: 43 किलोमीटर

धाराशिव: 40 किलोमीटर

सोलापुर: 130 किलोमीटर

सतारा: 49 किलोमीटर

सांगली: 72 किलोमीटर

कोल्हापुर: 125 किलोमीटर

सिंधुदुर्ग: 36 किलोमीटर

कुल लंबाई: 856 किलोमीटर

विकास के नए दरवाजे खोलेगा यह हाईवे

शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे के बनने से नागपुर से गोवा के बीच का सफर न केवल घंटों कम हो जाएगा, बल्कि यह महाराष्ट्र के उन पिछड़े और ग्रामीण इलाकों विशेषकर मराठवाड़ा और विदर्भ के कुछ हिस्से के लिए भी संजीवनी बनेगा, जो अब तक तेज यातायात की सुविधा से महरूम थे. बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से इन 13 जिलों में कृषि उत्पादों को बड़े बाजारों तक ले जाना आसान होगा, उद्योगों के लिए नया इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होगा और धार्मिक पर्यटन में भारी उछाल आएगा. जब जनवरी 2028 में इसका काम शुरू होगा, तो यह समृद्धि महामार्ग के बाद महाराष्ट्र का दूसरा सबसे बड़ा गेम-चेंजर प्रोजेक्ट साबित होगा.



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