Last Updated:
मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में स्थित लखबरिया केव्स अपनी प्राचीन गुफाओं, धार्मिक स्थलों और पौराणिक मान्यताओं के लिए पहचानी जाती हैं.लखबरिया गुफाओं के बारे में यह मान्यता प्रचलित है कि जब पांडव अज्ञातवास में थे, तब उन्होंने राजा विराट के क्षेत्र में शरण ली थी. इसी कथा को इन गुफाओं से जोड़कर देखा जाता है. ऐसा कहा जाता है कि पांडवों ने यहां गुफाओं का निर्माण किया
मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में स्थित लखबरिया केव्स अपनी प्राचीन गुफाओं, धार्मिक स्थलों और पौराणिक मान्यताओं के लिए पहचानी जाती हैं. यहां लाल बलुआ पत्थर की विशाल चट्टानों में बनी गुफाएं और उनके भीतर स्थित धार्मिक स्थल लोगों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इन गुफाओं का गहरा संबंध महाभारत काल में पांडवों के अज्ञातवास से जोड़ा जाता है.
पांडवों के अज्ञातवास की मान्यता
लखबरिया गुफाओं के बारे में यह मान्यता प्रचलित है कि जब पांडव अज्ञातवास में थे, तब उन्होंने राजा विराट के क्षेत्र में शरण ली थी. इसी कथा को इन गुफाओं से जोड़कर देखा जाता है. ऐसा कहा जाता है कि पांडवों ने यहां गुफाओं का निर्माण किया और कुछ समय बिताया था. हालांकि पांडवों द्वारा इन गुफाओं के निर्माण की ऐतिहासिक पुष्टि के लिए पुरातात्विक साक्ष्यों की आवश्यकता बताई गई है.
गुफाओं की बनावट और संरचना
उपलब्ध विवरण के अनुसार लखबरिया गुफाओं का यह क्षेत्र करीब 300 मीटर लंबा और 200 मीटर चौड़ा है। यहां लाल बलुआ पत्थर की विशाल चट्टानों के बीच गुफाएं निर्मित हैं. उत्तर दिशा में तीन और पश्चिम दिशा में लगभग सात गुफाओं का उल्लेख मिलता है. इसके अलावा दक्षिण दिशा में तीन गुफाएं बताई जाती हैं, जबकि पूर्व दिशा में कुछ संरचनाएं अधूरी होने की जानकारी सामने आई है. इन गुफाओं के निर्माण को पांडुवंशी राजाओं से भी जोड़ा जाता है और प्रचलित विवरणों के अनुसार इनका निर्माण कार्य दूसरी सदी में शुरू होकर छठवीं सदी तक चलने की बात कही जाती है, हालांकि इसकी पुष्टि के लिए पुरातत्व विभाग के अभिलेखों की जांच जरूरी है.
शिवलिंग और अन्य मंदिर
लखबरिया गुफाओं के भीतर एक अर्धनारीश्वर शिवलिंग मौजूद है जिसके बारे में बताया जाता है कि यह गुफा में खुदाई के दौरान मिला था। इसके अतिरिक्त यहां रामलला मंदिर भी है जिसमें भगवान राम और माता जानकी की प्रतिमाएं विराजमान हैं। स्थानीय मान्यता भगवान राम के वनवास को भी इस स्थान से जोड़ती है। परिसर में सीता माता की रसोई के नाम से प्रसिद्ध स्थल, राधा-कृष्ण मंदिर और शनिदेव मंदिर भी स्थित हैं, जिनके दर्शन करने के लिए आसपास के क्षेत्रों के साथ दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।