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Gariyaband News: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में घायल पेड़ों का इलाज किया जा रहा है. अतिक्रमणकारियों ने करीब 3500 पेड़ों की छाल खींचकर उन्हें बर्बाद कर दिया. टाइगर रिजर्व के उप-निदेशक वरुण जैन की पहल पर पेड़ों का इलाज किया जा रहा है. इसके लिए कर्नाटक के मशहूर ‘ट्री डॉक्टर’ विजय निशांत को बुलाया गया है.
‘ट्री डॉक्टर’ विजय निशांत घायल पेड़ों का इलाज कर रहे हैं.
रिपोर्ट- शेख इमरान, गरियाबंद. छत्तीसगढ़ के गरियाबंद के उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में जख्मी पेड़ों का इलाज किया जा रहा है. टाइगर रिजर्व के उप-निदेशक वरुण जैन की पहल पर पेड़ों का ट्रीटमेंट हो रहा है. दरअसल अतिक्रमणकारियों ने लगभग 3500 पेड़ों की छाल खींचकर उन्हें बर्बाद कर दिया. पेड़ों का जीवन बचाने के लिए उप-निदेशक वरुण जैन आगे आए और अब जंगल के सभी घायल पेड़ों का इलाज किया जा रहा है. कर्नाटक के मशहूर ‘ट्री डॉक्टर’ विजय निशांत को इसका जिम्मा सौंपा गया है. वह आधुनिक पद्धति ‘ब्रिज ग्राफ्टिंग’ के जरिए पेड़ों को पुनर्जीवित कर रहे हैं. अतिक्रमणकारी बीते 10 साल में सवा लाख पेड़ों की बलि ले चुके हैं.
जख्मी पेड़ों के इलाज से एक बार फिर इनके जीवन की उम्मीद बची है. डॉ विजय निशांत वन विभाग के अमले के साथ जख्मी पेड़ों की स्थिति का आकलन कर रहे हैं. पेड़ों को बचाने के इस अभियान में हर पेड़ का एक जैसा इलाज करने के बजाय उसकी क्षतिपूर्ति और जीवित रहने की संभावना के आधार पर रणनीति तैयार की जा रही है.
सैटेलाइट इमेज से अध्ययन
उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप-निदेशक वरुण जैन ने बताया कि अरसीकन्हार रेंज के अंतर्गत करका वन क्षेत्र में पेड़ों की अवैध कटाई की जानकारी मिलने के बाद सैटेलाइट से तस्वीरें मंगाकर अध्ययन कराया गया था. साल 2016 की तस्वीरों में यह इलाका घने और हरे-भरे जंगलों से ढका दिखाई देता है लेकिन इसके बाद धीरे-धीरे पेड़ों की कटाई और अतिक्रमण का विस्तार होता चला गया.
10 साल में चार गुना से ज्यादा अतिक्रमण
उन्होंने आगे बताया कि जंगल के तुलनात्मक अध्ययन में साल 2016 के 22 हेक्टेयर के मुकाबले साल 2026 में अतिक्रमण का क्षेत्रफल 102.47 हेक्टेयर तक पहुंच गया. इस तरह 10 साल में अतिक्रमण का दायरा चार गुना से भी ज्यादा हो गया. वन विभाग ने अतिक्रमण के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई भी प्रस्तावित की है. वन क्षेत्र में केवल पेड़ों की कटाई ही नहीं बल्कि उन्हें धीरे-धीरे सुखाकर खत्म करने की कोशिशें भी की गई हैं.
गर्डलिंग ने उजागर किया खतरा
बताते चलें कि जंगल में पेड़ों को काटे बिना भी उन्हें धीरे-धीरे सुखाया जा सकता है. जंगल में करीब 3500 पेड़ों के तनों की छाल चारों ओर से काटने यानी गर्डलिंग ने इसी खतरे को उजागर किया है. दरअसल पेड़ की छाल के भीतर मौजूद जीवित ऊतक पोषक तत्वों के प्रवाह में अहम भूमिका निभाते हैं. तने के चारों ओर छाल काट दिए जाने से जड़ों में बने पोषक तत्वों का पेड़ के ऊपरी हिस्सों तक पहुंचना बाधित हो जाता है. इसका असर फौरन दिखाई नहीं देता लेकिन धीरे-धीरे पेड़ सूखने लगता है.