‘अपने गिरेबान में झांको’, भारत ने पाकिस्तान को UN में फिर दिखाई औकात
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India-Pakistan News: भारत ने पाकिस्तान को एक बार फिर से UN के मंच पर बेनकाब किया है. पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों की स्थिति के बारे में सभी जानते हैं. खासकर हिन्दू बहन-बेटियों के साथ जिस तरह से बर्बरता होती है, उसकी चर्चा इंटरनेशनल लेवल पर होती है. वही पाकिस्तान दुनिया के सबसे मंच पर अल्पसंख्यकों के अधिकार को लेकर ज्ञान दे रहा था. भारत ने ऐसा धोया कि कहीं मुंह छुपाने की जगह नहीं मिली.
India-Pakistan News: पाकिस्तान भारत फोबिया से किस तरह से ग्रसित है, इसका नमूना एक बार फिर से दुनिया के सबसे बड़े मंच UN में देखने को मिला. पाकिस्तान ने अल्पसंख्यकों के अधिकार को लेकर भारत को ज्ञान देने की कोशिश कर रहा था, पर भारतीय प्रतिनिधि ने ऐसा जवाब दिया कि पड़ोसी देश बगले झांकने लगा. पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों खासकर हिन्दुओं की स्थिति के बारे में पूरी दुनिया जानती है. हिन्दू समुदाय की बहन-बेटियों के साथ जिस तरह से बर्बरता की जाती है, वह किसी से छुपी नहीं है. ईश निंदा कानून का विरोध करने पर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गवर्नर सलमान तासीर को गोलियों से छलनी कर दिया गया था. हिन्दुओं के साथ अत्याचार की घटनाओं की लंबी फेहरिस्त है. पाकिस्तान में लगातार घटती हिन्दू आबादी इस बात का प्रमाण है कि पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों को किस तरह की बर्बरता का सामना करना पड़ता है. जब वही देश अल्पसंख्यकों के अधिकार की बात करने लगा तो भारत ने उसको उसकी औकात दिखाई.
UNGA (संयुक्त राष्ट्र महासभा) की थर्ड कमेटी में भारत ने पाकिस्तान को कड़ा जवाब दिया है. भारत की ओर से फर्स्ट सेक्रेटरी रघु पुरी ने कहा कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करना हर देश की संप्रभु जिम्मेदारी है और दूसरे देशों के आंतरिक मामलों को उनके नियमों के तहत ही देखा जाना चाहिए. भारत ने कहा कि वह दुनिया का सबसे बहुधार्मिक, बहुजातीय और बहुभाषी समाज है, जहां विविधता सभ्यता का अहम हिस्सा रही है। भारतीय संविधान में धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए ठोस प्रावधान हैं.
दुष्प्रचार के लिए यूएन फोरम का इस्तेमाल
पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए रघु पुरी ने कहा कि उसका प्रतिनिधिमंडल भारत के खिलाफ दुष्प्रचार के लिए UN के मंच का इस्तेमाल कर रहा है. उन्होंने पाकिस्तान में खस्ताहाल अर्थव्यवस्था, कानून-व्यवस्था और मानवाधिकार उल्लंघनों का मुद्दा उठाया. जम्मू-कश्मीर पर भारत ने दोहराया कि यह देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है. भारत ने कहा कि अब एकमात्र मुद्दा पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले क्षेत्र को खाली कराने का है.
भारत ने धार्मिक स्वतंत्रता पर दिखाया था आईना
इससे पहले भारत ने पाकिस्तान से धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर सवाल किया था. इस्लामाबाद से इसका जवाब देते नहीं बना था. साथ ही भारत ने प्रवासियों के मानवाधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र के स्पेशल रैपोर्टियर की एक रिपोर्ट को भी खारिज कर दिया था. भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र में देश की प्रथम सचिव (फर्स्ट सेक्रेटरी) भाविका मंगलानंदन ने जवाब दिया था. रिपोर्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मंगलानंदन ने कहा कि इसमें यह बताया गया है कि कोविड-19 महामारी के दौरान सभी गलत चीजें केवल ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) में हुईं, जबकि विकसित देशों में भी ऐसी ही दुखद स्थितियां थीं, जिन्हें पूरी तरह से अनदेखा कर दिया गया.
दो टूक जवाब
भाविका मंगलानंदन ने दो टूक कहा था कि मानवाधिकारों की पैरवी करने वाले आतंकियों के हक में खड़े हो जाते हैं. निर्दोष पीड़ितों के दर्द को पूरी तरह भुला दिया जाता है. उन्होंने आतंकवाद को पनाह देने वाले मुल्कों के दोहरे चरित्र को बेनकाब करते हुए UN के वैश्विक मंच पर कड़ा संदेश दिया. इस दोहरे मापदंड को कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. भारत ने स्पष्ट किया कि पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाना दुनिया की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए.