Moringa Powder Business I विदेशों में सुपरफूड की धूम, भारत में सहजन पाउडर का बिजनेस बना कमाई का नया जरिया

Moringa Powder Business I विदेशों में सुपरफूड की धूम, भारत में सहजन पाउडर का बिजनेस बना कमाई का नया जरिया


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हैदराबाद में सहजन पाउडर का कारोबार, एक्सपोर्ट मार्केट में 1200 किलो तक भाव

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Moringa Powder Business: हैदराबाद में सहजन की पत्तियों से बनने वाला मोरिंगा पाउडर सुपरफूड के तौर पर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, इसकी लागत 120 से 180 रुपए प्रति किलो बताई जा रही है, जबकि एक्सपोर्ट मार्केट में अच्छी क्वालिटी के पाउडर का भाव 1200 रुपए प्रति किलो तक पहुंच सकता है. जानिए कैसे सहजन की खेती और प्रोसेसिंग बन सकती है कमाई का नया जरिया.

हैदराबाद. पारंपरिक खेती के मुकाबले एग्री-प्रोसेसिंग में कितना तगड़ा मुनाफा हो सकता है इसका बेहतरीन उदाहरण सहजन की पत्तियां बन चुकी हैं. पहले जहां सहजन को केवल सब्जी तक सीमित माना जाता था, वहीं अब इसकी पत्तियों से बनने वाला ग्रीन पाउडर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सुपरफूड के तौर पर भारी मांग में है. आधुनिक प्रोसेसिंग यूनिट्स के जरिए रोजाना टनों मोरिंगा पाउडर तैयार कर विदेशों में एक्सपोर्ट किया जा रहा है, जिससे उद्यमियों को बंपर रिटर्न मिल रहा है. लागत, बाजार भाव और मुनाफे का गणित मोरिंगा की खेती और प्रोसेसिंग बिजनेस में कमाई का दायरा काफी बड़ा है.

पेद्दिसेट्टी से मिली जानकारी अनुसार 1 किलो मोरिंगा पाउडर तैयार करने की लागत औसतन 120 से 180 रुपए के बीच आती है. वहीं एक्सपोर्ट मार्केट में अच्छी क्वालिटी का मोरिंगा पाउडर 600 से लेकर 1,200 रुपए प्रति किलो तक बिकता है. घरेलू रिटेल बाजार में भी 100 ग्राम का पैक 150 से 250 रुपए तक आसानी से बिक जाता है. एक एकड़ मोरिंगा की खेती से साल भर में लगभग 5 से 6 टन सूखी पत्तियां प्राप्त की जा सकती हैं. इन्हें प्रोसेस करके पाउडर के रूप में बेचने पर किसान या उद्यमी सालाना 3 लाख से 5 रुपए लाख प्रति एकड़ तक का शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं.

पूरी प्रक्रिया वैज्ञानिक मानकों पर आधारित

इस यूनिट से रोजाना टनों पाउडर सीधे विदेशों में निर्यात हो रहा है और साथ ही घरेलू स्तर पर बल्क और रिटेल सप्लाई भी की जा रही है. इतने बड़े वॉल्यूम की वजह से मासिक टर्नओवर और मुनाफा लाखों रुपये में पहुंच जाता है. वैज्ञानिक और हाइजीनिक प्रोसेसिंग का तरीका एक्सपोर्ट क्वालिटी पाउडर तैयार करने के लिए पूरी प्रक्रिया वैज्ञानिक मानकों पर आधारित है. खेतों से ताजी पत्तियां तोड़कर लाने के बाद उन्हें साफ पानी से अच्छी तरह धोया जाता है, ताकि मिट्टी और धूल पूरी तरह निकल जाए. पत्तियों के प्राकृतिक पोषक तत्वों और हरे रंग को सुरक्षित रखने के लिए इन्हें सीधे तेज धूप में नहीं सुखाया जाता.

पहले सोलर ड्रायर और फिर आधुनिक इलेक्ट्रिक मशीनों की ट्रे में रखकर इन्हें पूरी तरह नमी-मुक्त सुखाया जाता है. पत्तियां सूखने के बाद हाइजीनिक मशीनों में पीसकर बारीक हरा पाउडर तैयार किया जाता है. इस यूनिट की खासियत यह भी है कि फार्मिंग और प्रोसेसिंग सेक्टर में आने वाले नए उद्यमियों के लिए हर हफ्ते वर्कशॉप आयोजित की जाती हैं जहां रियल-टाइम प्रैक्टिकल नॉलेज दी जाती है. ऑर्डर देने और वर्कशॉप में शामिल होने के लिए स्क्रीन पर दिए गए व्हाट्सएप नंबर 7032328397 पर संपर्क किया जा सकता है. कम लागत में बेहतरीन एक्सपोर्ट मार्जिन देने वाला यह बिजनेस मॉडल नए एग्री-स्टार्टअप्स के लिए एक मजबूत विकल्प बनकर उभरा है.



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