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Parwal Ki Kheti Success Story: सीतामढ़ी के किसान दिनेश महतो ने परवल की आधुनिक खेती से अपनी तकदीर बदल ली है. वे 18 कट्ठे जमीन पर परवल उगाकर रोजाना लगभग 3000 रुपये की शुद्ध बचत कर रहे हैं. सालभर अन्य मौसमी फसलें भी उगाकर बंपर मुनाफा कमा रहे हैं. इनसे जानें खेती के बेहतर मैनेजमेंट टिप्स और सफलता की कहानी.
Parwal Kheti Success Story: सीतामढ़ी जिले के मदनपुर के किसान दिनेश महतो ने खेती में एक अनोखी मिसाल पेश की है. वह पारंपरिक फसलों से हटकर आधुनिक और मुनाफे वाली खेती की ओर बढ़े हैं. वर्तमान में वह करीब 18 कट्ठे जमीन पर देहाती प्रजाति के परवल की खेती कर रहे हैं. तीन साल पहले उन्होंने अपने एक रिश्तेदार और अमरीश जी की सलाह पर इस फसल की शुरुआत की थी. शुरुआत में वे लगभग 200 पौधे लेकर आए थे, जिससे उन्होंने अपनी सफलता की नींव रखी.
खुद तैयार करते हैं नर्सरी और बढ़ा रहे हैं रकबा
दिनेश महतो अब किसी पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि वे खुद अपने खेतों में परवल की नर्सरी तैयार करते हैं. एक प्लॉट से लत्ती काट-छांटकर वे धीरे-धीरे अपने खेती के दायरे को बढ़ाते जा रहे हैं. उनकी इस मेहनत और लगन को देखकर आसपास के अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे हैं. खास बात यह है कि यदि कोई जरूरतमंद किसान उनसे पौधा या लत्ती मांगने आता है, तो वे इसे पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराते हैं.
दैनिक बंपर पैदावार और शानदार मुनाफा
अपनी इस 18 कट्ठे की फसल से दिनेश रोज लगभग एक क्विंटल परवल की तोड़ाई करते हैं. बाजार में अच्छी मांग के चलते वर्तमान में परवल का भाव 4,000 से 4,500 रुपये प्रति क्विंटल तक चल रहा है. लेबर और मजदूरी का सारा खर्च निकालने के बाद भी उन्हें प्रतिदिन लगभग 3,000 रुपये की शुद्ध बचत हो जाती है. वे साल में करीब 5 महीने लगातार परवल की फसल की तोड़ाई करते हैं, जिससे उनकी बंपर कमाई होती है.
सालों भर कमाई का अचूक तरीका
परवल की फसल का सीजन समाप्त होने के बाद दिनेश खेत खाली नहीं छोड़ते हैं. वे पौधे की मुख्य जड़ को छोड़कर खेत में गोभी, आलू और चुकंदर जैसी अन्य मौसमी फसलें भी उगा लेते हैं. सर्दियों के मौसम में ये फसलें दो-तीन महीने में तैयार होकर बाजार में बिक जाती हैं. इसके बाद वे दोबारा परवल की लत्ती की झांकी तैयार कर देते हैं, जिससे फसल फिर से फलने लगती है. इस तरह वे एक ही जमीन पर सालभर अलग-अलग फसलें उगाकर अपनी आमदनी को लगातार सुरक्षित कर रहे हैं.