पटनाः बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर शुक्रवार को वोटिंग हुई. सभी की नजर चुनाव रिजल्ट पर है. इस बार पटना स्नातक सीट सबसे ज्यादा चर्चा में रही. यहां जेडीयू के मौजूदा एमएलसी नीरज कुमार के खिलाफ मोकामा के विधायक अनंत सिंह ने जन सुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह का समर्थन किया था. अनंत सिंह ने उनके पक्ष में कई रोड शो भी किए. जबकि आरजेडी ने दिलीप पटेल को मैदान में उतारा था. इस वजह से पटना स्नातक सीट पर त्रिकोणीय मुकाबले की चर्चा रही. ऐसे में अनुज सिंह जीत रहे हैं या हार मिलेगी. समझें माहौल क्या कहता है?
अनंत सिंह के समर्थन से चर्चा में आए अनुज सिंह
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, पटना स्नातक सीट पर नीरज कुमार लगातार तीन बार से एमएलसी हैं. इस बार उनके सामने जन सुराज के अनुज सिंह और आरजेडी के दिलीप पटेल की चुनौती थी. चुनाव प्रचार के दौरान अनंत सिंह के अनुज सिंह को समर्थन देने से मुकाबला चर्चा में आ गया था. अनंत सिंह ने इलाके में कई रोड शो किए. दूसरी ओर, नीरज कुमार के पास अपने पुराने समर्थकों और संगठन का आधार रहा. दिलीप पटेल ने भी अपने प्रभाव वाले इलाकों में प्रचार किया. लेकिन माहौल एक फिर जेडीयू का पाले में दिखाई दे रहा है. अनंत के भीड़ सड़कों पर तो दिखी, लेकिन मतदान में नीरज बढ़त बनाते दिख रहे हैं.
पटना शिक्षक सीट पर नवल किशोर यादव और संजीव कुमार की टक्कर
पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी के मौजूदा एमएलसी नवल किशोर यादव और आरजेडी के संजीव कुमार के बीच मुकाबला रहा. नवल किशोर यादव पांच बार इस सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं, जबकि संजीव कुमार पहली बार एमएलसी चुनाव लड़ रहे हैं. जन सुराज की दिव्या ज्योति ने भी इस सीट पर अपनी दावेदारी पेश की. लेकिन मुकाबला त्रिकोणीय नहीं बन सका. बीजेपी और राजद की बीच ही कांटे की टक्कर रही. ऐसे में यहां जीत-हार में वोट का अंतर कम हो सकता है.
तिरहुत शिक्षक सीट पर संजय सिंह के सामने चुनौती
तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सीपीआई के मौजूदा एमएलसी संजय सिंह का मुकाबला बीजेपी के नरेंद्र प्रसाद सिंह और निर्दलीय उम्मीदवार भूषण झा समेत अन्य प्रत्याशियों से रहा. इस सीट के तहत मुजफ्फरपुर, वैशाली, शिवहर और सीतामढ़ी जिले आते हैं. चुनाव प्रचार के दौरान संजय सिंह की क्षेत्र में पुरानी पकड़ और नरेंद्र प्रसाद सिंह की वापसी की कोशिश चर्चा में रही. वहीं, निर्दलीय उम्मीदवार भूषण झा ने भी अपनी दावेदारी पेश की. चुनाव का अंतिम नतीजा मतगणना के बाद ही सामने आएगा.
तिरहुत स्नातक सीट पर कैसा रहा मुकाबला?
तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में वंशीधर ब्रजवासी, जेडीयू के अभिषेक झा और आरजेडी की रश्मि विनायक गौतम के बीच मुकाबला रहा. जन सुराज ने भी इस सीट पर अपना उम्मीदवार उतारा था. चुनाव प्रचार के दौरान स्थानीय मुद्दों के साथ उम्मीदवारों के पुराने प्रदर्शन और राजनीतिक बयानों को लेकर भी चर्चा हुई. अलग-अलग इलाकों में उम्मीदवारों को मिले समर्थन की तस्वीर अब मतगणना के बाद साफ होगी.
दरभंगा शिक्षक सीट पर मदन मोहन झा का क्या होगा?
दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के मौजूदा एमएलसी मदन मोहन झा चुनाव मैदान में थे. जेडीयू ने अंतिम समय में घनश्याम राय को उम्मीदवार बनाया था. जन सुराज की ओर से एसपी राय ने भी चुनाव लड़ा. इस सीट पर पुराने उम्मीदवारों के अनुभव और नए प्रत्याशियों की चुनौती के बीच मुकाबला रहा. हालांकि मदन मोहन झा के रिपीट होने का चांस है.
दरभंगा स्नातक सीट पर PK का प्रयोग
दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी के सर्वेश कुमार और आरजेडी के अनिल झा के बीच मुकाबला रहा. सर्वेश कुमार पिछली बार निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीते थे. इस बार वह बीजेपी के टिकट पर मैदान में थे. जन सुराज ने डॉ. मोहम्मद इम्तियाज को उम्मीदवार बनाया था. लेकिन प्रशांत किशोर का यह प्रयोग असफल होता नजर आ रहा है. अब मतगणना के बाद ही पता चलेगा कि किस उम्मीदवार को सबसे ज्यादा समर्थन मिला.
सारण शिक्षक सीट पर एनडीए के भीतर भी मुकाबले की चर्चा
सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जेडीयू के आनंद पुष्कर, अफाक अहमद और अन्य उम्मीदवारों के बीच मुकाबला रहा. चुनाव प्रचार के दौरान एनडीए के अलग-अलग नेताओं और समर्थकों के बीच मतभेदों की चर्चा भी सामने आई. छपरा में बीजेपी से बागी होकर चुनाव लड़ रहे राहुल राज की भूमिका और सीवान में रमेंद्र राय को मिले समर्थन को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं रहीं. जन सुराज के अफाक अहमद ने भी इस सीट पर अपनी दावेदारी पेश की. ऐसे में अफाक को सियासी मतभेदों को लाभ मिल सकता है.
कोसी स्नातक सीट पर एनके यादव के सामने कई उम्मीदवार
कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मौजूदा एमएलसी एनके यादव के अलावा बीजेपी और आरजेडी के उम्मीदवारों के साथ जन सुराज के रजनीश रंजन भी मैदान में थे. चुनाव प्रचार के दौरान अलग-अलग सामाजिक समूहों और क्षेत्रों में उम्मीदवारों के समर्थन को लेकर चर्चा रही. कोसी, अंग और सीमांचल के कई इलाकों में उम्मीदवारों ने मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश की. अब नतीजे बताएंगे कि इस सीट पर मतदाताओं ने किसे अपना प्रतिनिधि चुना है.
क्या रहा वोटिंग पर्सेंटेज
बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर मतदान के बाद जारी आंकड़ों के मुताबिक, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की चार सीटों पर औसतन 74.55 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की चार सीटों पर औसतन 43.87 प्रतिशत वोट पड़े. पिछले चुनाव से तुलना करें तो शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मतदान प्रतिशत बढ़ा, जबकि स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में गिरावट दर्ज की गई. साल 2020 में शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 72.5 प्रतिशत और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में 48.5 प्रतिशत मतदान हुआ था.