Anti Suicide Fans in Gujarat University Hostels: 20-25 किलो का वजन पड़ते ही नीचे आ जाएगा पंखा, सूरत यूनिवर्सिटी ने उठाया खास कदम

Anti Suicide Fans in Gujarat University Hostels: 20-25 किलो का वजन पड़ते ही नीचे आ जाएगा पंखा, सूरत यूनिवर्सिटी ने उठाया खास कदम


नई दिल्ली (Gujarat University Hostels). पढ़ाई का बढ़ता स्ट्रेस, कम नंबर का डर और परिवार की उम्मीदों का बोझ- कॉलेज-यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स इनसे मानसिक रूप से टूट जाते हैं. कई स्टूडेंट्स इस दबाव को झेल नहीं पाते और हॉस्टल के बंद कमरों में खौफनाक कदम उठा लेते हैं. ऐसी ही दुखद घटनाएं रोकने के लिए सूरत की वीर नर्मद दक्षिण गुजरात यूनिवर्सिटी (VNSGU) ने सराहनीय कदम उठाया है. यूनिवर्सिटी प्रशासन हॉस्टल में लगे सीलिंग पंखे हटाकर ‘एंटी-सुसाइड स्प्रिंग-लोड’ पंखे लगा रहा है.

यूनिवर्सिटी के गर्ल्स और बॉयज हॉस्टल में अब तक 250 से ज्यादा ऐसे खास पंखे लगाए जा चुके हैं. इससे किसी भी अनहोनी को समय रहते टाला जा सकेगा. यह फैसला हाल के दिनों में स्टूडेंट्स की तरफ से उठाए गए खौफनाक कदमों और सुप्रीम कोर्ट और UGC की गाइडलाइंस के बाद लिया गया है. हालांकि, सवाल यह भी उठता है कि क्या सिर्फ पंखे बदलने से बच्चों का मानसिक तनाव खत्म हो जाएगा? या इसके लिए हॉस्टल के माहौल और मेंटल हेल्थ सपोर्ट पर भी उतना ही ध्यान देने की जरूरत है?

2500 में मिला एक पंखा

सूरत की यूनिवर्सिटी में लगाए गए एंटी सुसाइड पंखे की कीमत करीब 2500 रुपये है. यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर Kishorsinh Chavda ने बताया कि पंखे पर 10 किलो वजन पड़ते ही पंखा नीचे की तरफ झुक जाता है. इसके बाद पावर सप्लाई भी बंद हो जाती है.

‘एंटी-सुसाइड’ पंखा कैसे काम करता है?

यह साधारण पंखे जैसा ही दिखता है. लेकिन इसके अंदर खास स्प्रिंग मैकेनिज्म लगा होता है. जब भी इस पंखे पर 10 से 25 किलोग्राम से ज्यादा का असामान्य भार पड़ता है- जैसे कि फांसी लगाने की कोशिश में- तो इसकी स्प्रिंग तुरंत खुल जाती है. इससे पंखा छत से नीचे की तरफ झुक जाता है और इसका लॉक हट जाता है. भार संभाल न पाने के कारण फंदा काम नहीं कर पाता और व्यक्ति जमीन पर आ गिरता है. कुछ मॉडल्स में तो जोर का अलार्म भी बजने लगता है. इससे आस-पास के लोगों को तुरंत भनक लग जाती है.

कोटा मॉडल से मिली प्रेरणा, सूरत में शुरू हुआ बदलाव

हॉस्टल में एंटी-सुसाइड पंखे और जालियां लगाने की शुरुआत राजस्थान के कोटा से हुई थी, जिसे कोचिंग हब माना जाता है. साल 2017 में कोटा हॉस्टल एसोसिएशन ने पहली बार ऐसा प्रस्ताव रखा था. 2023 में वहां रिकॉर्ड सुसाइड केस आने के बाद इसे अनिवार्य कर दिया गया था. अब इसी मॉडल को अपनाते हुए VNSGU सूरत ने अपने 312 हॉस्टल कमरों (करीब 840 छात्र रहते हैं) के सभी 388 पंखों को बदलने की प्रक्रिया शुरू की है. इसके लिए GeM पोर्टल के जरिए 375 BLDC मोटर वाले मॉडर्न पंखे मंगवाए गए हैं.

NCRB के आंकड़े बढ़ा रहे चिंता, कोर्ट ने भी दिखाई सख्ती

नेपाल और भारत के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति काफी सेंसिटिव है. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के मुताबिक, भारत में साल 2019 के मुकाबले 2023 में स्टूडेंट्स की खुदकुशी के मामलों में 34% की बढ़ोतरी हुई. यह आंकड़ा 13,892 तक पहुंच गया था. साल 2024 और 2025 में भी चिंताजनक सिलसिला थमा नहीं. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की स्पेशल बेंच ने इस पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए सभी शैक्षणिक संस्थानों को पुख्ता सुरक्षा उपाय और मेंटल हेल्थ केयर सुविधाएं मुहैया कराने का निर्देश दिया.

मूल समस्या का समाधान: टेक्नोलॉजी के साथ इमोशनल सपोर्ट भी जरूरी

काउंसलर्स का मानना है कि एंटी-सुसाइड पंखे या बाल्कनी में नेट लगाना Physical Barrier देते हैं. लेकिन यह समस्या का स्थायी हल नहीं है. कई स्टूडेंट्स परीक्षा में फेल होने, करियर की चिंता या सीनियर के उत्पीड़न (जैसा कि अगस्त में सूरत मेडिकल कॉलेज में देखने को मिला) के कारण डिप्रेशन में चले जाते हैं. टेक्निकल बदलावों के साथ-साथ हॉस्टल में दोस्ताना माहौल बनाना, मेंटल हेल्थ काउंसलिंग सेशन आयोजित करना और छात्रों को अहसास दिलाना कि ‘असफलता जिंदगी का अंत नहीं है’, सबसे ज्यादा जरूरी है.



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