अमेठी: अमेठी में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को अलग-अलग अभियान और मिशन से जोड़ा जा रहा है. ऐसे में बैंक सखी यानी बीसी सखी का अभियान काफी सक्रिय रूप से चल रहा है. ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आजीविका मिशन से जोड़ते हुए रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है. बैंक सखियों का काम लोगों को योजनाओं की जानकारी देने के साथ जमा-निकासी और बैंकिंग लेनदेन की सुविधा देना है. यदि आप भी समूह से जुड़कर बैंक सखी बनना चाहती हैं, तो इस काम के जरिए कमाई कर सकती हैं.
बैंक सखी बनकर आत्मनिर्भर हो रहीं महिलाएं
अमेठी में बैंक सखी बनने वाली महिलाओं की कहानी आत्मनिर्भरता की मिसाल है. जिले की मुसाफिरखाना तहसील की रहने वाली सविता कुमारी और बहादुरपुर ब्लॉक की जूली खान बैंक सखी का काम करती हैं. उनका कहना है कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने और बैंक सखी बनने के बाद उनके जीवन में काफी बदलाव आया है. अब उन्हें किसी के सामने हाथ फैलाने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता.
रोजाना 4 से 5 घंटे काम करके कर रहीं कमाई
बैंक सखियों के मुताबिक, वे सुबह उठकर घर का काम निपटाती हैं और इसके बाद करीब 4 से 5 घंटे बैंकिंग से जुड़े काम करती हैं. इससे उन्हें अच्छी कमाई हो रही है. उन्होंने बताया कि सरकार की तरफ से करीब 4,000 रुपये मानदेय मिलता है. इसके अलावा लेनदेन और अन्य कार्यों के आधार पर महीने में करीब 25 से 30 हजार रुपये तक कमीशन मिल जाता है. इससे वे अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं और बेहतर जीवन यापन कर पा रही हैं.
10वीं पास महिलाएं भी बन सकती हैं बैंक सखी
बैंक सखी बनने के लिए किसी उच्च डिग्री की जरूरत नहीं है. 10वीं या 12वीं पास महिलाएं भी बीसी सखी बन सकती हैं. इसके लिए स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करना होता है. बीसी सखी बनने के बाद सरकार की ओर से निशुल्क डिवाइस दी जाती है, जिसकी मदद से पैसों का लेनदेन और अन्य बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं.
बैंक सखी बनने के लिए जरूरी दस्तावेज
बीसी सखी बनने के लिए महिलाओं को आधार कार्ड, फोटो और बैंक पासबुक जैसे दस्तावेजों की जरूरत होती है. स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं संबंधित विभाग या आजीविका मिशन के माध्यम से आवेदन प्रक्रिया और पात्रता की जानकारी प्राप्त कर सकती हैं. बैंक सखी के रूप में चयन होने के बाद वे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध करा सकती हैं.
मानदेय के साथ कमीशन से भी होती है कमाई
बैंक सखियों को करीब 4,000 रुपये का मानदेय दिया जाता है. इसके अलावा लोगों को धनराशि उपलब्ध कराने, पैसे जमा कराने, जीवन बीमा, बैंकिंग योजनाओं की जानकारी देने और वित्तीय सहायता से जुड़े कार्यों के आधार पर कमीशन भी मिलता है. इस तरह मानदेय के साथ कमीशन उनकी आय का अतिरिक्त स्रोत बनता है.
अमेठी में 486 महिलाएं बनीं बैंक सखी
अमेठी में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 486 स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को बैंक सखी बनाकर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम किया गया है. ये महिलाएं घर-घर जाकर बैंकिंग सेवाएं और वित्तीय लेनदेन की सुविधाएं उपलब्ध करा रही हैं. इसके साथ ही वे लोगों को करीब 44 प्रकार की सेवाओं का लाभ दिलाने में मदद कर रही हैं. इन सेवाओं के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने के साथ महिलाओं को रोजगार भी मिल रहा है.