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राहुल गांधी ने एक नवंबर को 1 नवंबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में महारैली का ऐलान किया गया है. भाजपा ने एक नवंबर की तारीख को फोकस करते हुए इसके कांग्रेस की तरफ से सिख विरोधी भावना से जोड़ दिया.
राहुल गांधी और 1 नवंबर
राहुल गांधी की रैली पर राजनीति तेज हो गई है. कांग्रेस पार्टी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक नवंबर को 1 नवंबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक विशाल महारैली का ऐलान किया गया है. INDIA गठबंधन की यह रैली मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनावों में कथित ‘वोट चोरी’ के विरोध में बुलाई गई है. हालांकि व्यापारियों ने दीपावली और धनतेरस से ठीक पहले इस रैली से धंधे पर मार पड़ने की बात कहते हुए रैली को बाद में करने की अपील की है. वहीं भाजपा ने भी निशाना साधते हुए अलग ही एंगल निकाला है. भाजपा ने एक नवंबर की तारीख को फोकस करते हुए इसके कांग्रेस की तरफ से सिख विरोधी भावना से जोड़ दिया.
भाजपा नेता और प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि कांग्रेस की तरफ से यह दिन जानबूझकर चुना गया क्योंकि यह सिखों के नरसंहार से जुड़ी हुई तारीख है. एक नवंबर सिखों की भावनाओं का दिन है. राहुल गांधी एक नवंबर को रामलीला में तूफान खड़ा करके क्या आप सिखों के घाव को कुरेद रहे हैं. आप इसी दिन रैली करने पर क्यों अड़े हुए हैं? क्या संदेश देना चाहते हैं? उन्हें असल में किसी बात की परवाह नहीं है. एक नवंबर की रैली में वो क्या हंगामा, तोड़फोड़, अराजकता फैलाना चाहते हैं?
भाजपा ने एक नवंबर का ट्वीट किया
क्या हुआ था 1 नवंबर को?
एक नवंबर 1984 का दिन भारतीय इतिहास के सबसे दुखद दिनों में गिना जाता है. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की 31 अक्टूबर 1984 को उनके दो सिख अंगरक्षकों की तरफ से हत्या किए जाने के बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा भड़क उठी. खालिस्तान की मांग को लेकर अमृतसर के स्वर्ण मंदिर पर कब्जा करके बैठे जरनैल सिंह भिंडरावाले के खिलाफ सेना के ऐक्शन का ऑर्डर देने की वजह से इंदिरा गांधी की हत्या की गई.
कैसे शुरू हुई हिंसा?
31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1 नवंबर से दिल्ली में हिंसा बड़े पैमाने पर फैल गई. भीड़ ने सिखों के घरों, दुकानों और कारोबारी प्रतिष्ठानों पर हमले किए. कई इलाकों में लोगों को घरों से निकालकर मार दिया गया. हिंसा का सबसे भयावह दौर 1 और 2 नवंबर को देखने को मिला. इसके बाद भी कई जगहों पर 5 नवंबर तक हिंसक घटनाएं जारी रहीं. इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों की हत्या की गई, घरों और दुकानों को आग के हवाले किया गया और धार्मिक स्थलों को भी निशाना बनाया गया.
कितने लोगों की हुई मौत?
भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अनुसार 1984 की हिंसा में देशभर में कुल 3325 लोगों की मौत हुई थी. इनमें से 2733 लोग अकेले दिल्ली में मारे गए थे. हालांकि, सिख समुदाय के कुछ संगठनों ने मृतकों की संख्या इससे अधिक होने का दावा किया था.
जांच आयोग और न्याय की लड़ाई
हिंसा के बाद घटनाओं की जांच के लिए कई आयोग और समितियां गठित की गईं. इनमें जस्टिस रंगनाथ मिश्रा आयोग और जस्टिस जीटी नानावटी आयोग प्रमुख थे. नानावटी आयोग ने 2005 में अपनी रिपोर्ट सौंपी. रिपोर्ट में हिंसा के दौरान स्थानीय नेताओं और कांग्रेस के कुछ वर्कर्स की भूमिका को लेकर गंभीर टिप्पणियां की गईं. हिंसा के मामलों में लंबे समय तक जांच और अदालती कार्रवाई चलती रही.