मैसूर दशहरा: 1000 KG वजन बढ़ाने वाले हाथी इंसानों की मिलेट डाइट से 5 गुना फिट
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मैसूर दशहरा के जंबो स्टार्स का वजन अपडेट आ गया है और इस बार सीन बिल्कुल अलग है. हर साल फेस्टिवल के बाद हाथियों का वेट 1000 किलो तक बढ़ जाता था, लेकिन इस बार स्पेशल डाइट की वजह से इनका वजन सिर्फ 130 से 285 किलो ही बढ़ा है. 6,040 किलो के साथ ‘सुग्रीव’ ने वेट चार्ट में टॉप किया है. बिना फैट बढ़ाए हाथियों को एकदम फिट रखने वाला यह नया डाइट हैक सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है.
डाइट प्लान और संतुलित वजन: मैसूर के प्रसिद्ध विजयदशमी मेले में इस बार हाथियों के वजन में एक बड़ा बदलाव देखा गया है. हर बार मेले के दौरान और बाद में हाथियों का वजन 1000 किलो तक बढ़ जाता था, लेकिन इस बार उनका वजन 4 से 5 गुना कम यानी केवल 130 से 285 किलोग्राम के बीच ही बढ़ा है. इसका मुख्य कारण इंसानों को दिया जाने वाला पोषक तत्वों से भरपूर भोजन और मिलेट था, जिससे हाथियों को काफी फायदा हुआ. (PTI)
पौष्टिक भोजन और ताकत पर फोकस: इस बार मेले में हाथियों को मिलेट (मोटा अनाज), दही, पोहा, चावल, रागी, गुड़, नारियल और हरा चारा जैसी चीजें डाइट में दी गईं. अधिकारियों और विशेषज्ञों ने साफ किया कि इस विशेष वेट टेस्ट और डाइट प्लान का मकसद हाथियों का वजन अनियंत्रित रूप से बढ़ाना बिल्कुल नहीं था, बल्कि उनकी शारीरिक ताकत और ओवरऑल फिटनेस को बनाए रखना था. यही वजह रही कि सुग्रीव हाथी का वजन भी संतुलित रहा. (ANI)
स्पेशल ट्रेनिंग और हेल्थ मॉनिटरिंग: ग्रैंड विजयादशमी जुलूस के लिए हाथियों को विशेष ट्रेनिंग दी गई थी. उन्हें रूट पर घुमाया गया ताकि वे भारी भीड़, ट्रैफिक और लाउड साउंड्स के अभ्यस्त हो सकें. वन विभाग के पशु चिकित्सकों और महावतों की टीम ने पूरे फेस्टिवल के दौरान उनकी सेहत पर लगातार नजर रखी. धनवंतरी रोड पर हुए वजन टेस्ट के बाद सुग्रीव 6,040 किलोग्राम वजन के साथ चार्ट में सबसे ऊपर रहा. (PTI)
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शाही महल से जंगल की ओर रवानगी: प्रसिद्ध जंबो सावारी के सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद, हाथियों का पूरा दस्ता अब महल से वापस अपने जंगल के प्राकृतिक आवास की ओर लौटने लगा है. इस भव्य आयोजन के समाप्त होते ही मैसूर महल के जयमार्तंड गेट पर सभी हाथियों के लिए एक विशेष पूजा का आयोजन किया गया. इस अनुष्ठान में अभिमन्यु, प्रशांत, धनंजय, एकलव्य, महेंद्र, गोपी, सुग्रीव और लक्ष्मी समेत सभी हाथियों ने हिस्सा लिया. (PTI)
हाथी प्रशांत का शानदार प्रदर्शन: हाथियों की विदाई के समय वन विभाग के डीसीएफ डॉ. प्रभुगौड़ा ने बताया कि इस साल का दशहरा उत्सव बहुत ही सफल रहा है. उन्होंने विशेष रूप से हाथी ‘प्रशांत’ की तारीफ करते हुए कहा कि उसने सभी की उम्मीदों को पूरा किया है. प्रशांत ने पूरे दो घंटे तक बिना किसी रुकावट के भारी गोल्डन होवदा (अंबारी) को संभाला और अपने अनुभव व कसौटियों पर पूरी तरह खरा उतरा. (PTI)
पारंपरिक तरीके से भावुक विदाई: जंबो सावारी में शामिल सभी हाथियों को वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से अत्यंत आदर व सम्मान के साथ विदाई दी गई. अभिमन्यु हाथी को सरकार द्वारा ‘निशाने’ हाथी के रूप में चुना गया था, जिसे सम्मानपूर्वक विदा किया गया. जयमार्तंड गेट पर पूजा संपन्न होने के बाद सभी हाथियों को पसंदीदा फल, ताजे नारियल और पान के पत्ते खिलाकर दोपहर में प्यार भरा फेयरवेल दिया गया. (PTI)
वापसी और दैनिक दिनचर्या में लौटना: लंबी ट्रेनिंग और ऐतिहासिक जुलूस की कठिन जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक निभाने के बाद ये सभी जंबो स्टार्स अब अपने घर यानी जंगल वापस पहुंच रहे हैं. अधिकारियों ने बताया कि जंगल में वापस लौटने के बाद ये सभी हाथी फिर से अपनी पुरानी लाइफस्टाइल और सामान्य रूटीन के कामों में जुट जाएंगे. इस तरह इस बार का मैसूर दशहरा हाथियों की बेहतरीन सेहत और शानदार प्रदर्शन के लिए याद किया जाएगा. (PTI)
स्वास्थ्य सुरक्षा और भविष्य के लिए मिसाल: इस बार हाथियों के वजन को अनियंत्रित रूप से बढ़ने से रोककर उनकी सेहत का खास ध्यान रखा गया है, ताकि उनके जोड़ों और पैरों पर अतिरिक्त भार न पड़े. इंसानों जैसी संतुलित मिलेट डाइट और सख्त मेडिकल मॉनिटरिंग का यह नया प्रयोग बेहद सफल साबित हुआ है. वन विभाग का यह वैज्ञानिक कदम आने वाले वर्षों के मैसूर दशहरा आयोजनों के लिए भी हाथियों की हेल्थ मैनेजमेंट का एक नया और बेहतरीन मॉडल बन गया है. (PTI)