LAC पर मुस्तैद शौर्य कमांडो कौन हैं? चीन बॉर्डर पर भारत का सुरक्षा कवच, ITBP की एलिट फोर्स

LAC पर मुस्तैद शौर्य कमांडो कौन हैं? चीन बॉर्डर पर भारत का सुरक्षा कवच, ITBP की एलिट फोर्स


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LAC पर शौर्य कमांडो कौन हैं? चीन बॉर्डर पर भारत का सुरक्षा कवच, ITBP की फोर्स

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Shaurya Commandos: भारत-चीन सीमा (LAC) पर तनाव और ड्रैगन की चालाकियों का माकूल जवाब देने के लिए भारत ने अपनी सैन्य तैयारियों को एक नए लेवल पर पहुंचा दिया है. भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) ने LAC पर अग्रिम मोर्चे पर तैनाती के लिए एक खास और बेहद घातक एलिट दस्ता तैयार किया है, जिसे शौर्य कमांडो नाम दिया गया है.

माइनस 40 डिग्री सेल्सियस के कड़ाके के तापमान, ऑक्सीजन की कमी और कठिन पहाड़ी इलाकों में दुश्मन को उनके ही अंदाज में जवाब देने के लिए प्रशिक्षित ये जवान सीमा सुरक्षा का नया स्तंभ बनने जा रहे हैं. चीन के साथ सीमा पर पिछले कुछ वर्षों में उभरी नई चुनौतियों के मद्देनजर शौर्य कमांडोज की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है. 

‘शौर्य कमांडो’ ITBP के सबसे निपुण, शारीरिक रूप से अत्यधिक सक्षम और मानसिक रूप से मजबूत जवानों में से चुने गए स्पेशल फोर्स के कमांडो हैं. इन कमांडोज को अत्यधिक ऊंचाई वाले इलाकों, हड्डी कंपाने वाली ठंड और दुर्गम पहाड़ियों में आक्रामक अभियानों को अंजाम देने के लिए तैयार किया गया है. 

इसे ITBP की एलिट विंग के तौर पर जाना जाता है. भारत-तिब्बत सीमा पुलिस मुख्य रूप से लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक 3488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा की रखवाली करती है. शौर्य कमांडो इसी बल का एक विशेष हमलावर और क्विक रिस्पॉन्स दस्ता है. 

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शौर्य कमांडोज को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए बेहद कठोर और आधुनिक ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है. इन कमांडोज को अनआर्म्ड कॉम्बैट यानी बिना हथियार के आमने-सामने की लड़ाई की खास ट्रेनिंग दी गई है. 2020 में चीनी फौजियों के साथ गालवान घाटी में हुई हिंसक झड़प को ध्यान में रखते हुए इस ट्रेनिंग को अनिवार्य बनाया गया है. 

10,000 से 18,000 फीट की ऊंचाई पर जहां हवा में ऑक्सीजन का स्तर काफी कम हो जाता है, वहां बिना थके लंबे समय तक गश्त करने और युद्ध लड़ने का अभ्यास कराया जाता है. ये जवान अत्याधुनिक असॉल्ट राइफलों, स्नाइपर गन्स, नाइट-विज़न गियर और CBRN (केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर) युद्ध स्थितियों से निपटने में माहिर हैं. 

LAC पर दोनों देशों के बीच गोलियां न चलाने के समझौतों और प्रोटोकॉल के कारण चीनी सैनिक अक्सर ‘ग्रे-जोन ट्रैप’ और आमने-सामने की हाथापाई की रणनीति अपनाते हैं. शौर्य कमांडो इस तरह की स्थितियों में चीनी सैनिकों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए विशेष रूप से ट्रेंड हैं. लद्दाख और अरुणाचल की जमा देने वाली ठंड में सामान्य सैनिकों की तुलना में ये कमांडो अधिक टिकाऊ और आक्रामक साबित होते हैं.  

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