भारत में SBI का डेटा हुआ लीक, अमेरिका में तो हो रहा इससे भी बड़ा कांड, ग्राहकों के खाते में घुस गया बेकाबू AI

भारत में SBI का डेटा हुआ लीक, अमेरिका में तो हो रहा इससे भी बड़ा कांड, ग्राहकों के खाते में घुस गया बेकाबू AI


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AI Attack On Bank Account : अमेरिका में एआई ने बैंक खातों पर अटैक करना शुरू कर दिया है. एआई का ये हमला इतना सटीक है कि बैंकों के सिस्टम यह पहचान ही नहीं पा रहे हैं कि बैंक अकाउंट को कोई इंसान ऑपरेट कर रहा है या कोई रोबोटिक एआई बॉट. इस वजह से बहुत से बैंकों ने तो अपने सिस्‍टम पर थर्ड पार्टी एआई एजेंट्स की एंट्री रोक दी है. पिछले दिनों भारत में एसबीआई के ग्राहकों का डेटा लीक हो गया था.

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इस घटना से अमेरिकी बैंक बुरी तरह डरे हुए हैं.

नई दिल्‍ली. भारत के सबसे बड़े बैंक यानी भारतीय स्‍टेट बैंक के ग्राहकों को डेटा पिछले दिनों डार्क वेब पर लीक हो गया. एसबीआई ने भी माना कि उसके सिस्‍टम में सेंध लगी है. लेकिन, अब अमेरिका में जो हो रहा है, उसने दुनियाभर के बैंकों के कान खड़े कर दिए हैं. अमेरिका के दिग्गज बैंकों के सिस्टम में अनधिकृत थर्ड-पार्टी एआई एजेंट्स (AI Agents) घुसपैठ कर रहे हैं. इनमें से कुछ एआई एजेंट्स यूजर के निर्देशों के बिना, अपनी मर्जी से उके खातों में ट्रांजेक्‍शन करने की कोशिश तक कर चुके हैं.

Axios की एक रिपोर्ट के अनुसार, एआई के इस हमले के बाद अब जेपी मॉर्गन चेस, बैंक ऑफ अमेरिका, सिटी और मॉर्गन स्‍टेनली जैसे बैंकों ने तो डरकर अब अपने सिस्‍टम पर थर्ड पार्टी एआई एजेंट्स की एंट्री ही रोक दी है. बैंकों की सिक्‍योरिटी में लोगों का कहना है कि एआई का ये हमला इतना सटीक है कि उनके सिस्टम यह पहचान ही नहीं पा रहे हैं कि ग्राहक के खाते को कोई इंसान ऑपरेट कर रहा है या कोई रोबोटिक एआई बॉट. ये बॉट बैंक खाते में लेनदेन करने और कॉल सेंटर तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं.

कैसे खुला खतरे का दरवाजा?

असल में यह समस्या ग्राहकों की उस सुविधा से शुरू हुई, जहां वे अपने रोजमर्रा के फाइनेंशियल कामों के लिए किसी एआई असिस्टेंट या थर्ड-पार्टी टूल को अपना यूजरनेम और पासवर्ड सौंप देते हैं. कस्‍टमर की सहमति होने के बावजूद यह कदम बैंकों के बुनियादी सुरक्षा नियमों के सीधे खिलाफ है, क्योंकि बैंकिंग दिशा-निर्देशों के मुताबिक हर यूजर को खुद ही लॉगिन करना अनिवार्य है. जब किसी एआई एजेंट के पास ग्राहक के लॉगिन क्रेडेंशियल्स आ जाते हैं और उसे खरीदारी या फंड ट्रांसफर की छूट मिल जाती है, तो यह एक बड़े खतरे का दरवाजा खोल देता है. यही अब अमेरिका में हो रहा है.

बैन और ‘रीड-ओनली’ का रास्ता

बैंकों ने एआई बॉट के इस हमले से रोकने को कदम उठाने शुरू कर दिए हैं. कई बैंकों ने अपने प्लेटफॉर्म्स पर थर्ड-पार्टी एआई एजेंट्स की सीधी एंट्री को ब्लॉक कर दी है. इसके साथ ही बैंक अब ऐसी व्यवस्था बना रहे हैं जहां बाहरी टूल्स को केवल ‘रीड-ओनली’ (Read-only Access) की अनुमति दी जाए. इसका सीधा मतलब यह है कि एआई बॉट केवल बैलेंस या लेन-देन का ब्योरा देख सकेगा, लेकिन ग्राहक के खाते से पैसे भेजने या कोई अन्‍य काम नहीं कर पाएंगे.



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