नवरात्र में नहीं, अमेठी के इस गांव में रावण दहन के बाद होती है मां दुर्गा की पूजा..जानिए वजह

नवरात्र में नहीं, अमेठी के इस गांव में रावण दहन के बाद होती है मां दुर्गा की पूजा..जानिए वजह


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उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के जामो क्षेत्र के कटारी गांव में मां विंध्यवासिनी की पूजा की अनोखी परंपरा निभाई जाती है. यहां नवरात्र समाप्त होने और दशहरे पर रावण दहन के बाद पूजा-अर्चना शुरू होती है. ग्रामीण करीब 40 साल से मां विंध्यवासिनी को कुलदेवी मानकर उनकी आराधना कर रहे हैं. इस दौरान 40 से 50 फीट ऊंचा भव्य पंडाल बनाया जाता है, जो आसपास के लोगों के आकर्षण का केंद्र रहता है.

अमेठी: दुर्गा पूजा का विशेष महत्व नवरात्र में होता है, लेकिन अमेठी का एक अनोखा गांव ऐसा भी है, जहां रावण दहन के बाद मां दुर्गा की पूजा-अर्चना शुरू होती है. यह कहानी अमेठी जिले के उस गांव की है, जहां मां विंध्यवासिनी को कुलदेवी माना जाता है. यहां हर साल मां विंध्यवासिनी की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा की जाती है. ग्रामीणों और भक्तों का मानना है कि जब से यहां मां की प्रतिमा स्थापित करने की परंपरा शुरू हुई है, तब से गांव में सुख-शांति बनी हुई है. मां की कृपा और आशीर्वाद से लोगों के जीवन में खुशहाली है और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

दरअसल, अमेठी जिले के जामो क्षेत्र के कटारी गांव में मां विंध्यवासिनी की पूजा-अर्चना की जाती है. यहां मां की प्रतिमा स्थापित करने के साथ-साथ हर साल अलग-अलग थीम पर भव्य पंडाल बनाए जाते हैं. खास बात यह है कि यहां नवरात्र का पर्व समाप्त होने के बाद पूजा की शुरुआत होती है. यानी विजयदशमी पर रावण दहन के बाद यहां मां की पूजा-अर्चना शुरू की जाती है.

40 साल पुरानी है परंपरा, मां विंध्यवासिनी को मानते हैं कुलदेवी

स्थानीय भक्त और ग्रामीण अरुण कुमार कौशल बताते हैं कि गांव में करीब 40 साल से मां विंध्यवासिनी का पंडाल स्थापित किया जा रहा है. मां विंध्यवासिनी हम सभी की कुलदेवी हैं और गांव के सभी भक्त उन्हें इसी रूप में पूजते हैं. हर साल मिलकर पंडाल स्थापित किया जाता है और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है.

उन्होंने बताया कि मां के आशीर्वाद से गांव में सुख-शांति बनी हुई है. जब से पंडाल स्थापित करने की परंपरा शुरू हुई है, तब से उनका परिवार और गांव के लोग खुद को खुशहाल महसूस करते हैं. ग्रामीणों की मां पर गहरी आस्था है और उनका मानना है कि मां की कृपा से वे समस्याओं से दूर रहते हैं.

50 फीट ऊंचा पंडाल बनता है आकर्षण का केंद्र

वहीं, गांव के एक अन्य निवासी और स्थानीय भक्त राजदीप मिश्रा बताते हैं कि गांव में मां की स्थापना के बाद से खुशहाली का माहौल है. भक्तों की मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मुराद मां भवानी पूरी करती हैं. उनके अनुसार, यह स्थान बेहद दिव्य है और यहां लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है.

उन्होंने बताया कि मां विंध्यवासिनी की पूजा के लिए करीब 40 से 50 फीट ऊंचा और 30 से 35 फीट चौड़ा भव्य पंडाल बनाया जाता है. अपनी विशालता और आकर्षक सजावट के कारण यह पंडाल लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहता है. यह न केवल ग्रामीणों की आस्था का केंद्र है, बल्कि आसपास के लोगों के लिए भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.



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