छठ महापर्व की परंपराओं को साड़ी पर उतारा, खरना से अर्घ्य तक की झलक; मधुबनी की 65 वर्षीय अंजू मिश्रा ने किया कमाल

छठ महापर्व की परंपराओं को साड़ी पर उतारा, खरना से अर्घ्य तक की झलक; मधुबनी की 65 वर्षीय अंजू मिश्रा ने किया कमाल


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मधुबनी की 65 वर्षीय अंजू मिश्रा ने साड़ी पर छठ महापर्व की परंपराएं उकेरी हैं. 7 हजार रुपये की इस साड़ी पर खरना से अर्घ्य तक के दृश्य बारीक पेंटिंग से बनाए गए हैं. वे 40 कलाकारों को रोजगार भी दे रही हैं. यह पहल लोककला के जरिए परंपराओं को सहेजने की अनूठी कोशिश है.

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नई दिल्लीः छठ महापर्व का नाम आते ही घाट, डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने की तस्वीरें आंखों के सामने आने लगती हैं. बिहार की मधुबनी कला में भी इस पर्व की खूबसूरती को कुछ इसी अंदाज में उतारा गया है. मधुबनी की रहने वाली 65 वर्षीय अंजू मिश्रा एक ऐसी ही खास साड़ी लेकर आई हैं, जिस पर छठ पूजा से जुड़ी कई परंपराओं और रीति-रिवाजों को उकेरा गया है. इस साड़ी की कीमत 7 हजार रुपये है.

साड़ी पर छठ की पूरी झलक
अंजू मिश्रा की इस साड़ी की खासियत है इस पर की गई बारीक मधुबनी पेंटिंग. इसमें छठ पूजा के अलग-अलग दृश्य देखने को मिलते हैं. खरना से लेकर पूजा की तैयारियों और पारंपरिक रीति-रिवाजों तक को इसमें जगह दी गई है. साड़ी पर बनी छोटी-छोटी आकृतियां और उनकी बारीकियां इसे खास बनाती हैं. यह सिर्फ पहनने का कपड़ा नहीं, बल्कि लोककला के जरिए हमारी परंपराओं को सहेजने की एक कोशिश भी है.

40 कलाकारों को दे रहीं रोजगार
अंजू पिछले करीब 20 साल से मधुबनी पेंटिंग के काम से जुड़ी हैं. वह अपने साथ करीब 40 कलाकारों को लेकर चलती हैं, जिन्हें वह रोजगार देती हैं. उनके साथ कई महिलाएं भी इस कला को आगे बढ़ाने में जुटी हैं. अंजू बताती हैं कि उनके लिए ये कलाकार परिवार के बच्चों जैसे हैं. वह चाहती हैं कि उन्हें अच्छा काम और अपनी कला दिखाने के लिए बेहतर मंच मिले, ताकि उनकी रोजी-रोटी भी चलती रहे.

राम दरबार की पेंटिंग भी खास
अंजू की बनाई कलाकृतियों में राम दरबार की पेंटिंग भी शामिल है, जो उनके मुताबिक आदिपटना म्यूजियम में रखी गई है. इस पेंटिंग को बनाने में करीब तीन महीने लगे थे. इसकी कीमत लगभग एक से डेढ़ लाख रुपये तक बताई गई. इसके अलावा उनके स्टॉल पर अलग-अलग आकार की मधुबनी पेंटिंग, पोस्टर, पर्स, बैग और झोले भी देखने को मिलते हैं.

कला ही देती है आगे बढ़ने की खुशी
अंजू के यहां छोटी पेंटिंग करीब 1,500 रुपये से शुरू होती हैं, जबकि बड़ी कलाकृतियों की कीमत 7 से 8 हजार रुपये तक है. कुछ गिफ्ट साइज पेंटिंग 3 से 4 हजार रुपये की भी हैं. अंजू कहती हैं कि जब अपनी कला को लोगों तक पहुंचते और दूसरे कलाकारों को आगे बढ़ते देखती हैं, तो उन्हें बहुत खुशी होती है. उनके लिए मधुबनी पेंटिंग सिर्फ एक कला नहीं, बल्कि अपनी पहचान और परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का जरिया है.



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