चार साल की उम्र में गैस ब्लास्ट में तबस्सुन का चेहरा झुलसा, नहीं मिला स्कूल में एडमिशन, अब हैंडीक्राफ्ट व होटल इंडस्ट्री की ले रहीं ट्रेनिंग

चार साल की उम्र में गैस ब्लास्ट में तबस्सुन का चेहरा झुलसा, नहीं मिला स्कूल में एडमिशन, अब हैंडीक्राफ्ट व होटल इंडस्ट्री की ले रहीं ट्रेनिंग


नोएडा: कश्मीर के कुपार (कुपवाड़ा) की रहने वाली तबस्सुम की जिंदगी ने चार साल की उम्र में ऐसा मोड़ लिया, जिसने उनके बचपन से लेकर युवावस्था तक के सफर को बदल दिया. किचन में खाना बनाते समय गैस लीक होने से हुए हादसे में तबस्सुम भी बुरी तरह झुलस गई थीं. बचपन में हुई इस घटना की बहुत ज्यादा यादें उन्हें आज भी नहीं हैं, लेकिन उसके बाद समाज का सामना करना उनके लिए आसान नहीं रहा. पढ़ाई के दौरान उन्हें स्कूल में एडमिशन तक नहीं मिला.

स्कूल में कहा गया कि उनकी शक्ल देखकर छोटे बच्चे डर जाएंगे. धीरे-धीरे उन्होंने खुद को सामाजिक कार्यक्रमों और लोगों के बीच जाने से दूर कर लिया. शादी या दूसरे पारिवारिक कार्यक्रमों में भी वह जाने से बचती थीं और बाजार जाने पर मास्क का इस्तेमाल करती थीं. और आज तब्बसुम अपने जज्बे और मेहनत से उन अध्यापकों को जवाब दे रही है.

छाव फाउंडेशन से जुड़ने के बाद बदली जिंदगी

लगभग 20-22 साल तक घर के दायरे में रहने के बाद तबस्सुम अब छांव फाउंडेशन से जुड़ी हैं. उनका कहना है कि यहां आने के बाद उन्हें जिंदगी को एक नए नजरिए से देखने का मौका मिला. उनके मुताबिक, घरवाले हौसला देते हैं, लेकिन बाहर के लोगों से मिलने वाला अनुभव अलग होता है. फाउंडेशन में उन्हें कई तरह की चीजें सीखने का मौका मिल रहा है. वह हैंडीक्राफ्ट से जुड़े काम सीख रही हैं और साथ ही होटल इंडस्ट्री से जुड़ी ट्रेनिंग भी ले रही हैं. उनकी ट्रेनिंग फाइव स्टार ताज होटल में भी चल रही है, जहां उन्हें बेटर और कुकिंग की ट्रेनिंग मिल रही है. बेकरी, तबस्सुम का कहना है कि यहां अवसर बहुत हैं और अब वह आगे खुद के लिए कुछ करना चाहती हैं.

अपने पैरों पर होना है खड़ा

तबस्सुम बताती हैं कि उनके लिए यह बदलाव सिर्फ काम सीखने तक सीमित नहीं है, बल्कि खुद पर भरोसा बढ़ाने का भी सफर है. वह बताती हैं कि पहले उन्हें डर रहता था कि लोग उन्हें जज करेंगे, इसलिए वह खुद ही सामाजिक कार्यक्रमों में जाने से बचती थीं. यहां दूसरे सर्वाइवर्स के साथ समय बिताने और बातचीत करने से उनका हौसला बढ़ा है. उनका कहना है कि यहां आकर उन्होंने महसूस किया कि जिंदगी वास्तव में खूबसूरत है. वह मानती हैं कि इंसान के आसपास के माहौल और लोगों का समर्थन उसके आत्मविश्वास को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाता है. अब उनका लक्ष्य सिर्फ किसी एक संस्था पर निर्भर रहना नहीं, बल्कि यहां से सीखकर आगे अपने पैरों पर खड़ा होना है.

मां की याद आती है तब वो डायरी पर लिखती अपना दर्द

घर से दूर रहने के बावजूद तबस्सुम अपने परिवार को भूली नहीं हैं. उन्हें सबसे ज्यादा अपनी मां की याद आती है. उनके पिता का निधन हो चुका है और वह बताती हैं कि पिता के साथ उनका ज्यादा लगाव था, इसलिए उनकी याद भी बहुत आती है. जब उन्हें घर की याद सताती है तो वह लिखकर अपने मन की बात बाहर निकालती हैं. उनका कहना है कि वह अपना दर्द हर किसी से साझा नहीं करतीं, क्योंकि उन्हें डर रहता है कि कहीं कोई उनकी भावनाओं का मजाक न बना दे. हालांकि, फाउंडेशन में उन्हें नए लोगों से बातचीत करने और एक-दूसरे को समझने का मौका मिला है. परिवार भी उनसे बातचीत करता है और वह अपनी मां को यही भरोसा देती हैं कि वह यहां सुरक्षित हैं और उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है.

पहले बनेगी आत्मनिर्भर फिर करेगी शादी

तबस्सुम अब अपनी जिंदगी को एक नए नजरिए से देख रही हैं. शादी को लेकर भी उनका फिलहाल कोई फैसला नहीं है. वह चाहती हैं कि पहले अपने लिए कुछ करें और आत्मनिर्भर बनें, उसके बाद जिंदगी के दूसरे फैसलों के बारे में सोचें. उनका संदेश उन लोगों के लिए भी है जो किसी असफलता या मुश्किल के बाद जिंदगी से हार मानने लगते हैं. तबस्सुम कहती हैं कि इंसान अपने मन में जिस बात को बैठा लेता है, उसे हासिल करने की कोशिश कर सकता है. दो-तीन बार कोशिश में सफलता न मिले तो जिंदगी खत्म करने का फैसला नहीं होना चाहिए. जिंदगी एक बार मिलती है, इसलिए उसे खुलकर और बेहतर तरीके से जीना चाहिए.



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