कांग्रेस ने भगवंत मान का मांगा इस्तीफा तो सुखपाल सिंह खैरा को कर दिया गया निलंबित? पंजाब में AAP सरकार की कहानी जानें

कांग्रेस ने भगवंत मान का मांगा इस्तीफा तो सुखपाल सिंह खैरा को कर दिया गया निलंबित? पंजाब में AAP सरकार की कहानी जानें


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पंजाब विधानसभा में कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा को 27 अक्टूबर तक चलने वाले सत्र की बाकी समय के लिए निलंबित कर दिया गया है. यह कार्रवाई नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या पर हुए हंगामे के बीच हुई. कांग्रेस ने मुख्यमंत्री भगवंत मान का इस्तीफा मांगा था. वहीं, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने खैरा पर सदन की मर्यादा तोड़ने का आरोप लगाया.

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पंजाब विधानसभा में निलंबन के बाद चर्चा में सुखपाल सिंह खैरा, जानिए उनका राजनीतिक करियर और विवादों की कहानी.

पंजाब की राजनीति में सुखपाल सिंह खैरा एक बार फिर चर्चा में हैं. 23 अक्टूबर को विधानसभा में उनके खिलाफ कार्रवाई हुई है. कांग्रेस विधायक को सत्र की बाकी अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया. मामला नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या का  है. जब कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार को कानून-व्यवस्था और नशे के मुद्दे पर घेरा और मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस्तीफे की मांग भी की. इसके बाद सदन में जमकर हंगामा हुआ. इसके बाद वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने खैरा के खिलाफ प्रस्ताव पेश कर दिया. जानें पूरी कहानी.

कौन हैं सुखपाल सिंह खैरा?

सुखपाल सिंह खैरा पंजाब के कपूरथला जिले की भुलत्थ विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक हैं. वह पहले आम आदमी पार्टी में भी रह चुके हैं. साल 2017 में वह AAP के टिकट पर भुलत्थ से विधायक चुने गए थे. पार्टी ने उन्हें पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी बनाया था. हालांकि, जुलाई 2018 में उन्हें इस पद से हटा दिया गया. बाद में पार्टी से उनके मतभेद बढ़े और जनवरी 2019 में उन्होंने AAP छोड़ दी. इसके बाद उन्होंने अपना राजनीतिक संगठन बनाया. जून 2021 में वह कांग्रेस में लौट आए.

झोटा की हत्या पर AAP सरकार को घेर रही कांग्रेस

मीडिया में छपी खबर के मुताबिक, 23 अक्टूबर को पंजाब विधानसभा में परविंदर सिंह झोटा की हत्या का मुद्दा उठा. कांग्रेस विधायकों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस्तीफे की मांग की. वे काले स्कार्फ पहनकर सदन के बीचोंबीच पहुंच गए. उनके पास ‘लानत पत्र’ नाम का पोस्टर भी था. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि AAP सरकार राज्य में कानून-व्यवस्था, नशे और गैंगस्टरवाद पर काबू पाने में नाकाम रही है.

हरपाल चीमा ने कांग्रेस पर किया पलटवार

कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने भी जवाब दिया. उन्होंने 1984 के सिख विरोधी दंगों का मुद्दा उठाया. पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष परगट सिंह के पुराने राजनीतिक संबंधों पर भी सवाल किए. इसके बाद सदन में दोनों पक्षों के बीच नारेबाजी हुई. कांग्रेस विधायक अपनी मांगों पर अड़े रहे. कुछ देर बाद विपक्षी विधायकों ने सदन से बाहर चले गए.

खैरा पर निलंबन की कार्रवाई क्यों हुई?

वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सुखपाल सिंह खैरा के खिलाफ निलंबन का प्रस्ताव पेश किया. चीमा ने आरोप लगाया कि खैरा ने पीठासीन अधिकारी के खिलाफ असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया. उन पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप भी लगाया गया. विधानसभा ने प्रस्ताव पारित कर उन्हें मौजूदा सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया. प्रस्ताव पारित होने के समय कांग्रेस विधायक सदन में मौजूद नहीं थे. सत्र 27 अक्टूबर तक चलना है.

पहले भी विवादों में रहे हैं खैरा

खैरा इससे पहले भी विधानसभा में विवादों को लेकर चर्चा में रहे हैं. मार्च 2026 में उनके खिलाफ विशेषाधिकार के उल्लंघन से जुड़ा मामला सदन की समिति को भेजने का प्रस्ताव पारित हुआ था. उस मामले में AAP नेताओं और विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ उनकी कथित टिप्पणियों पर आपत्ति जताई गई थी.



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