कमाई के लिए सिर्फ 20 दिन का मौका, हरिद्वार की नहरों में खोजते हैं खजाना, इसी से जलता है सैकड़ों घरों का चूल्हा

कमाई के लिए सिर्फ 20 दिन का मौका, हरिद्वार की नहरों में खोजते हैं खजाना, इसी से जलता है सैकड़ों घरों का चूल्हा


हरिद्वार: हरिद्वार से उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात तक जाने वाली उत्तरी खंड गंगनहर को साफ-सफाई और मरम्मत कार्यों के लिए दीपावली की रात तक पूरी तरह बंद कर दिया गया है. उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की ओर से हर साल की जाने वाली इस वार्षिक बंदी के दौरान हजारों किलोमीटर लंबी गंग नहर में सिल्ट सफाई और घाटों की मरम्मत का काम किया जाता है. वहीं दूसरी ओर गंगनहर के बंद होते ही हरिद्वार में हजारों लोगों के रोजगार का एक अनोखा दौर भी शुरू हो जाता है.

दरअसल कई परिवारों की सालभर की आजीविका केवल इन्हीं 18 से 20 दिनों पर निर्भर करती है. हर की पौड़ी से लेकर आगे तक हजारों लोग नहर की सूखी रेती और पत्थरों के बीच सिक्के, धातु आदि तलाश करते हैं, जिससे उन परिवारों के पूरे वर्ष का भरण-पोषण हो जाता है. नहर बंद होते ही हरिद्वार हर की पौड़ी से लेकर अनेक घाटों पर लोग सुबह शाम तक खजाना ढूंढने पर लगे हैं.

घाटों की सफाई का कार्य शुरू
20 अक्टूबर कीरत से उतरी खंड गंग नहर का पानी विभाग द्वारा रोक दिया गया था. इसके चलते हरिद्वार से कानपुर देहात उत्तर प्रदेश तक नहर में सफाई और घाटों की सफाई का कार्य भी शुरू हो गया था. सालभर गंगा बंदी का इंतजार करने वाले लोग भी पूरे वर्ष का भरण-पोषण करने के लिए सुखी नहर में सिक्के, सोना, चांदी, हीरे आदि तलाशने में लगे हैं. हर की पौड़ी के ब्रह्म कुंड घाट से लेकर अस्थि प्रवाह घाट, नाई घाट, सुभाष घाट, मालवीय आदि घाटों पर कई परिवार सुबह से शाम तक कीमती धातुएं वस्तुएं आदि ढूंढने में लगे हैं.

पत्थरों के बीच धातु-सिक्के ढूंढते हैं लोग
जब हमने सिक्के धातु ढूंढने वाले लोगों से बात करनी चाहिए तो अधिकतर लोगों ने बात करने से इनकार कर दिया. लेकिन सुभाष घाट पर रेत और पत्थरों के बीच धातु सिक्के ढूंढ रहे हरिओम बताते हैं कि दशहरे की रात को नहर बंद हो जाती है, जो दीपावली तक बंद रहती है. सालभर हरिद्वार में आने वाले श्रद्धालु मां गंगा में पैसे, सोना-चांदी चढ़ाते हैं, उसी को इन दिनों में ढूंढते हैं. हरिओम बताते हैं कि यह काम काफी कठिन होता है, जो जितनी मेहनत करता है उसे मां गंगा उतना ही आशीर्वाद देती हैं.

गंगा से ढूंढते समय यहां की सफाई भी हो जाती है. गंगा में ढूंढते समय सोना, चांदी, पैसे, धातु के सिक्के ही मिलते हैं. हरिओम आगे बताते हैं कि किसी को थोड़ा तो किसी को ज्यादा मिलता है और हजारों लोग दशहरे से दीपावली तक गंगा से ढूंढने का काम करते हैं.

दिवाली तक मिलता है मौका
गंगा से सिक्के धातु ढूंढने वाले विनोद ने बताया कि दशहरे से दीपावली तक वह अपने दोस्तों के साथ गंगा से सोना, चांदी, सिक्के ढूंढ रहे हैं. गंगा से ढूंढने का यह काम दीपावली तक चलेगा और दिवाली के बाद गंगा में पानी आ जाएगा. विनोद ने कहा कि उन्हें आज तक सोने की अंगूठी, सोने की बालियां और कुछ चांदी मिली है. साल भर में जब कोई गंगा में डूबता है तो उसको बचाते हैं, जिसके बाद उनके परिजन खुश होकर पैसे देते हैं और गंगा बंद होने के बाद जो भी सोना, चांदी, सिक्के मिलते हैं, इसी से उनका गुजर बसर चलता है.

गंगा से धातु ढूंढने वाले राजकुमार ने कहा की उनकी जीविका गंगा बंद होने पर ही टिकी हुई है. गंगा बंद होने के बाद वह गंगा से सोना-चांदी सिक्के की तलाश करते हैं. लेकिन आज तक उन्हें कुछ खास नहीं मिला है. राजकुमार ने आगे कहा कि उन्हें मां गंगा पर पूरा भरोसा है, इसलिए वह गंगा से तांबा, पीतल, सोना, चांदी ढूंढ रहे हैं.



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