Strait of Hormuz : खत्म हो जाएगा होर्मुज का महत्व, 5 साल में तैयार हो जाएंगे कई नए रास्ते

Strait of Hormuz : खत्म हो जाएगा होर्मुज का महत्व, 5 साल में तैयार हो जाएंगे कई नए रास्ते


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Strait of Hormuz : ईरान और अमेरिका युद्ध ने जितना असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर डाला है, उतना ही इस रास्ते से कारोबार करने वाले देशों पर भी असर पड़ा है. लेकिन, एचएसबीसी के सीईओ की मानें तो अगले 5 साल में होर्मुज का महत्व ही खत्म हो जाएगा. उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों ने अपने लिए वैकल्पिक मार्ग की तलाश शुरू कर दी है और इसके लिए भारी निवेश भी किया जा रहा है.

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खाड़ी देश होर्मुज जलडमरूमध्य का वैकल्पिक मार्ग तलाश रहे हैं.

नई दिल्ली. साल 2026 में एक शब्द जिसने देश में सबसे ज्यादा असर डाला है, वह है होर्मुज जलडमरूमध्य. इस साल के पहले तक इस होर्मुज के बारे में शायद ही किसी भारतीय को चिंता रही होगी, लेकिन अब हर कोई इसकी जरूरत और अहमियत से वाकिफ हो गया है. भारत के लिए तो इसका महत्व अन्य देशों के मुकाबले कहीं ज्यादा रहा है. लेकिन, अब ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले 5 साल में होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व ही खत्म हो जाएगा. खाड़ी देश अपने लिए तमाम वैकल्पिक रास्ते बना रहे हैं, ताकि होर्मुज पर उनकी निर्भरता पूरी तरह खत्म की जा सके.

एचएसबीसी समूह के सीईओ जॉर्ज एलहेडेरी ने कहा है कि ईरान युद्ध के असर को कम करने के लिए खाड़ी क्षेत्र में भारी निवेश किया जाएगा. इससे अगले 5 साल में कई लॉजिस्टिक्स के कई वैकल्पिक मार्ग खुलेंगे और होर्मुज का महत्व खत्म हो जाएगा. उन्होंने कहा कि ईरान-अमेरिका युद्ध ने होर्मुज पर दुनिया की निर्भरता को उजागर कर दिया है. यहां से दुनिया का 20 फीसदी तेल और गैस गुजरता है. इस युद्ध ने खाड़ी देशों को काफी नुकसान पहुंचाया है. यही वजह है कि खाड़ी देश अब बंदरगाहों तक पाइपलाइन बिछाने की तैयारी कर रहे हैं.

1.4 ट्रिलियन डॉलर का निवेश संभव
एचएसबीसी के सीईओ ने कहा कि ईरान युद्ध से प्रभावित यह क्षेत्र जल्द ही फिर संभल जाएगा, लेकिन इसके लिए भारी निवेश की जरूरत होगी. एचएसबीसी ने अपनी हालिया रिपोर्ट में बताया है कि मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका और तुर्की में कई प्रोजेक्ट में 872 अरब डॉलर का निवेश किया जा रहा है. अनुमान है कि इस क्षेत्र में करीब 1.4 ट्रिलियन डॉलर का निवेश आएगा. रिपोर्ट में बताया गया है कि 1,600 से ज्यादा बिजनेस लीडर्स और करीब 820 ग्लोबल इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स ने निवेश करने की इच्छा जताई है. विश्व बैंक ने भी अनुमान लगाया है कि साल 2027 में इस क्षेत्र में भारी निवेश आ सकता है.

तीन देशों ने बनाया नया रास्ता

  • सऊदी अरब : खाड़ी देशों में सबसे ज्यादा तेल सप्लाई करने वाले सऊदी अरब ने पूरब-पश्चिम पाइपलाइन के जरिये लाल सागर और यानबू बंदरगाह तक तेल पहुंचाने की योजना बनाई है. इससे होर्मुज को बाईपास किया जा सकेगा.
  • संयुक्त अरब अमीरात (UAE) : अपने तेल को बिना होर्मुज से गुजारे सप्लाई करने के लिए यूएई अबु धाबी क्रूड पाइपलाइन के जरिये फुजैरा बंदरगाह तक भेजने का प्लान बना रहा है. यह बंदरगाह ओमान की खाड़ी में स्थित है, जो होर्मुज से बाहर पड़ता है.
  • ओमान : खाड़ी देशों ने अरब सागर में स्थित ओमानी बंदरगाह पर भी दांव लगाया है, ताकि ओमानी बंदरगाह भी क्षेत्रीय निर्यात के लिए सुरक्षित विकल्प बनाया जा सके.

भारत के लिए कितना जरूरी
भारत अपनी जरूरत का काफी बड़ी मात्रा में तेल और गैस होर्मुज के जरिये ही खरीदता था. युद्ध शुरू होने से पहले भारत करीब 45 फीसदी कच्चा तेल यानी 25 लाख बैरल तेल होर्मुज के जरिये खरीदता था, लेकिन अब विविधता आई है और 70 फीसदी कच्चा तेल होर्मुज के बाहर से खरीदा जा रहा है. भारत अपनी जरूरत का 60 फीसदी एलपीजी आयात करता है और इसका 90 फीसदी हिस्सा होर्मुज से आता है. इसके अलावा एलएनजी भी अपनी का 50 फीसदी बाहर से मंगाता है, जो कतर, यूएई और ओमान से आता है. यह सारे देश होर्मुज के जरिये ही अपना सामान भेजते हैं. भारत ने अब इसमें भी काफी डाईवर्सिफिकेशन किया है.



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