वेल्डिंग का काम करने पहुंचा, लैंड होते ही 8 करोड़ की डकैती, एक साल बाद समर्पण
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कतर के दोहा स्थित KMCC दफ्तर से 8 करोड़ रुपये की डकैती मामले में आरोपी परापिल बालकृष्णन ने एक साल बाद केरल की कोयिलैंडी पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया. आरोप है कि केरल से 4 लोगों को फ्लाइट से दोहा भेजकर गैस कटर से तिजोरी उड़वाई गई थी. लूटी गई रकम प्रवासियों के कल्याण कोष की थी. शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस अब अंदरूनी मिलीभगत और फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है.
पुलिस मामले की जांच कर रही है.
नई दिल्ली. सोचो, कोई आपको वेल्डिंग की जॉब का झांसा देकर कतर बुलाए और वहां पहुंचते ही सीधे 8 करोड़ रुपये की डकैती का काम सौंप दे. बिल्कुल किसी थ्रिलर मूवी जैसी यह कहानी अब रियलिटी में सामने आ चुकी है. दोहा के अल थुमामा में स्थित केरल मुस्लिम सांस्कृतिक केंद्र (KMCC) के दफ्तर में हुई 31 लाख कतरी रियाल (लगभग 8 करोड़ भारतीय रुपये) की हाई-प्रोफाइल डकैती मामले में बड़ा ट्विस्ट आया है. घटना के करीब एक साल बाद, गैंग के मास्टरमाइंड्स में शामिल आरोपी परापिल बालकृष्णन ने कोयिलैंडी पुलिस के सामने चुपचाप सरेंडर कर दिया है.
गैस कटर, बंधक रूम बॉय और 8 करोड़ का गोलमाल
यह पूरा कांड 18 सितंबर 2025 को हुआ था. प्लान एकदम सेट था. केरल से 4 लोगों को स्पेशली फ्लाइट से कतर लाया गया. कतर पहुंचते ही इन्होंने केएमसीसी ऑफिस के रूम बॉय को बंधक बनाया, गैस कटर से भारी-भरकम तिजोरी का लॉक उड़ाया और देखते ही देखते 8 करोड़ का कैश लेकर रफूचक्कर हो गए. दिलचस्प बात यह है कि जो पैसा लूटा गया, वह खाड़ी देशों में रहने वाले केरलवासियों के वेलफेयर के लिए जुटाया गया फंड था. वारदात के बाद आरोपी बालकृष्णन वापस केरल भाग आया था, जबकि बाकी साथी (शाजी, असैनार, राशी पय्योली जैसे लोग) अभी भी फरार हैं.
वेल्डर की जॉब का झांसा या सोची-समझी साजिश?
सरेंडर के बाद सामने आए एक कथित वीडियो में बालकृष्णन ने दावा किया कि उसे कतर में वेल्डिंग की नौकरी का लालच दिया गया था. उसे यह बिल्कुल नहीं पता था कि उसे गैस कटर से तिजोरी तोड़ने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. हालांकि, इस कहानी में पॉलिटिकल एंगल आते ही ड्रामा और बढ़ गया है. बालकृष्णन स्थानीय निकाय चुनाव में बीजेपी का प्रत्याशी रह चुका है, जिसके चलते स्थानीय बीजेपी नेताओं ने पूरे केस की जांच केंद्रीय एजेंसी (CBI/NIA) से कराने की मांग ठोक दी है.
1 साल तक सन्नाटा और अब पुलिस एक्शन
सबसे शॉकिंग बात यह रही कि इतनी बड़ी डकैती के बाद भी संगठन (KMCC) ने तुरंत कोई पुलिस शिकायत दर्ज नहीं कराई. जब जनता और मीडिया में फजीहत होने लगी, तब जाकर इस साल 15 सितंबर को केएमसीसी के कतर उपाध्यक्ष पी. के. अब्दुल रहीम ने पुलिस का रुख किया. अब पुलिस इस बात की भी गहराई से तहकीकात कर रही है कि क्या इस पूरे ‘इंडोर ऑपरेशन’ में केएमसीसी के ही कुछ अंदरूनी लोग शामिल थे.