North Korea-South Korea Tensions: कोरिया के बॉर्डर पर क्‍यों लगे हैं बड़े-बड़े लाउडस्पीकर? म‍िसाइल-बंदूकें छोड़, गाने और खबरों से होगा युद्ध


Last Updated:

उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है. सीमा पर सैन्य गतिविधियों और चेतावनी गोलियों के बीच लाउडस्पीकर विवाद ने भी जोर पकड़ लिया है. आखिर इन लाउडस्पीकरों से ऐसा क्या सुनाया जाता है, जो दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा सकता है? जानिए कैसे गाने, खबरें और प्रचार सीमा पर मनोवैज्ञानिक युद्ध का हथियार बनते हैं.

Top Deals Inside

कोरिया के बॉर्डर पर क्‍यों लगे हैं बड़े-बड़े लाउडस्पीकर?Zoom

एक उत्तर कोरियाई सैन्य गार्ड पोस्ट पर लाउडस्पीकरों के बगल में एक सैनिक. (फोटो साभार – AP)

उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता साफ नजर आ रहा है. कभी ये दोनों एक ही देश हुआ करते थे, लेकिन दूसरे व‍िश्‍व युद्ध ने कोरिया को 2 हिस्‍सों में बांट दिया. इन दोनों देशों में यूं तो तनाव अना ही रहता है लेकिन ताजा मामला सीमा पर सैन्‍य गतिविधियों और सैन‍िक टकराव का है. हाल ही में दोनों देशों की सैन्य सीमा रेखा (MDL) पर उत्तर कोरियाई सैनिकों की कथित घुसपैठ और उसके बाद दक्षिण कोरिया की चेतावनी-गोलीबारी की घटनाएं हुई हैं. पिछले महीने सीमा पर एक लैंडमाइन विस्फोट के बाद हालात और भी गंभीर हो गए हैं. इसमें तीन दक्षिण कोरियाई सैनिक घायल हुए थे.

अब इस सारे व‍िवाद के बीच उत्तर कोरिया की नेता किम जोंग-उन की बहन किम यो-जोंग ने इसे ‘अनुचित बहाना’ बताया और आरोप लगाया कि दक्षिण कोरिया ने 1 अगस्त से 17 अक्टूबर के बीच 2,870 बार लाउडस्पीकर प्रसारण और 201 चेतावनी गोलियां चलाई हैं. सीमा पर लगे ये लाउडस्पीकर इन दोनों देशों के बीच ‘मनोवैज्ञानिक युद्ध’ लड़ने का एक बड़ा हथ‍ियार हैं. पर सवाल है कि आखिर ‘लाउडस्‍पीकर’ से क्‍या हो सकता है? कैसे ये लाउडस्‍पीकर उत्तर और दक्ष‍िण कोरियाई देशों के बीच इतनी अहम‍ियत रखते हैं.

कभी एक था कोरिया, आज लाउडस्पीकर से लड़ रहे दो देश. (फोटो रायटर्स)

क्‍यों है उत्तर-दक्ष‍िण कोरिया एक-दूसरे के दुश्‍मन?
दूसरे विश्व युद्ध के बाद कोरियाई प्रायद्वीप दो हिस्सों में बंट गया. उत्तर में कम्युनिस्ट शासन और दक्षिण में अलग राजनीतिक व्यवस्था विकसित हुई. 1950 में दोनों के बीच युद्ध छिड़ गया. 1953 में युद्धविराम तो हुआ, लेकिन शांति समझौता नहीं हो पाया. इसलिए आज भी दोनों देश तकनीकी रूप से युद्ध की स्थिति खत्म करने वाले औपचारिक समझौते तक नहीं पहुंचे हैं. इन दो देशों के बीच एक सुरक्षित सीमा तय की गई है, जिसे डिमिलिट्राइज्ड जोन (DMZ) कहा जाता है. यहीं ये बड़े-बड़े लाउडस्‍पीकर लगाए गए हैं.

दक्ष‍िण कोरिया क्‍या सुनाता है इन लाउडस्‍पीकरों पर?
दोनों देशों ने सीमा के पास बड़े-बड़े लाउडस्पीकर लगाए हैं, ताकि उनकी आवाज कई किलोमीटर दूर तक पहुंच सके. इनका मकसद सिर्फ दुश्मन देश को परेशान करना नहीं, बल्कि उसके सैनिकों और आम लोगों की सोच को प्रभावित करना भी है. इसे मनोवैज्ञानिक युद्ध कहते हैं. दक्षिण कोरिया इन लाउडस्पीकरों से उत्तर कोरिया के सैनिकों को बाहरी दुनिया की खबरें सुनाता रहा है. डीडब्‍ल्‍यू की र‍िपोर्ट बताती है कि इन लाउडस्‍पीकरों में समाचार, उत्तर कोरियाई शासन की आलोचना, दक्षिण कोरिया की आर्थिक तरक्की से जुड़ी जानकारी और लोकप्रिय K-pop गाने तक शामिल रहे हैं. इसकी वजह है कि उत्तर कोरिया की सरकार बाहरी सूचनाओं पर कड़ा नियंत्रण रखती है. इसलिए वहां के सैनिकों तक बाहर की खबरें पहुंचाना दक्षिण कोरिया की रणनीति का हिस्सा रहा है.

उत्तर कोरिया लाउडस्पीकर से क्या सुनाता है?
उत्तर कोरिया भी दक्षिण कोरिया की ओर लाउडस्पीकर लगाकर जवाब देता रहा है. उसकी तरफ से शासन के पक्ष में प्रचार और परेशान करने वाली आवाजें प्रसारित की जाती हैं. पहले के अभियानों में जानवरों के चिल्लाने जैसी आवाजें, तेज गोंग और शोर सुनाए जाने की खबरें आई थीं. इसका उद्देश्य दक्षिण कोरियाई सीमा के पास तैनात सैनिकों और रहने वाले लोगों को मानसिक रूप से परेशान करना था.

उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया का बॉर्डर. (फोटो रायटर्स)

क्‍यों बंद हुए थे लाउडस्‍पीकर और क्‍यों हो रहे हैं फिर से शुरू?
लाउडस्‍पीकर बंद करने की पहल दक्षि‍ण कोरिया ने की थी. जून 2025 में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने सीमा पर चलने वाले प्रचार प्रसारण बंद करने का आदेश दिया था. उनका उद्देश्य दोनों देशों के बीच तनाव कम करना और बातचीत का रास्ता खोलना था. अगस्त 2025 में दक्षिण कोरिया ने अपने करीब 20 स्थायी लाउडस्पीकर भी हटा दिए. उस समय उत्तर कोरिया की तरफ से भी प्रसारण बंद होने के संकेत मिले थे, हालांकि उत्तर कोरिया ने अपने लाउडस्पीकर हटाने की बात से इनकार किया था.

लेकिन अब जब सीमा पर विवाद बढ़ा है तो उत्तर कोरिया ने नई घोषणा की है. वहीं दक्षिण कोरिया की सेना ने भी संकेत दिया है कि अगर उत्तर कोरिया फिर से प्रसारण शुरू करता है, तो वह जवाबी कदम उठाने के विकल्प पर विचार कर सकती है.



Source link