MBA करने वालों का फ्यूचर रहेगा ब्राइट, GCC के विस्तार से 2030 तक बढ़ेंगे नौकरी के मौके

MBA करने वालों का फ्यूचर रहेगा ब्राइट, GCC के विस्तार से 2030 तक बढ़ेंगे नौकरी के मौके


MBA Jobs : भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) का विस्तार अब सिर्फ आईटी और टेक तक सीमित नहीं रह गया है. मल्टीनेशनल कंपनियां अब इस सेंटर्स के माध्यम से फाइनेंस, मार्केटिंग, ह्यूमन रिसोर्स, बिजनेस एनालिटिक्स और सप्लाई चेन मैनेजमेंट जैसे महत्वपूर्ण काम भी संभाल रही हैं.

ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स वे केंद्र हैं, जहां मल्टीनेशनल कंपनियां अपने इंटरनेशनल कारोबार से जुड़े तरह-तरह के कार्यों को ऑपरेट करने के साथ बिजनेस स्ट्रेटजी, इनोवेशन और फैसले लेने के प्रोसेस को मजबूत करती हैं. भारत में इनकी बढ़ती मौजूदगी से ऐसे प्रोफेशनल्स की मांग बढ़ रही है, जो बिजनेस की समझ के साथ डेटा एनालिसिस, कम्युनिकेशन और टीम मैनेजमेंट में स्किल्ड हों. 2026 की NASSCOM–Zinnov इंडिया GCC लैंडस्केप रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2,117 GCCs हैं, जिनमें लगभग 23.6 लाख पेशेवर काम करते हैं. इस क्षेत्र से लगभग 98.4 अरब अमेरिकी डॉलर का राजस्व प्राप्त होता है.

मैनेजमेंट के विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ती मांग

GCC के बढ़ते दायरे में ने मैनेजमेंट ग्रेजुएट्स यानी MBS प्रोफेशनल्स के लिए भी करियर के तमाम विकल्प तैयार किए हैं. फाइनेंस में बजटिंग, फाइनेंशियल प्लानिंग और रिस्क मैनेजमेंट, जबकि ह्यूमन रिसोर्स में टैलेंट एक्विजिशन, कर्मचारी विकास और ग्लोबल टीमों के मैनेजमेंट जैसे अवसर उपलब्ध हैं. वहीं, मार्केटिंग और कस्टमर एक्सपीरियंस के क्षेत्र में मार्केट रिसर्च, ग्राहक व्यवहार का विश्लेषण और अंतरराष्ट्रीय मार्केटिंग ऑपरेशंस से जुड़ी भूमिकाएं महत्वपूर्ण होती जा रही हैं.

EY के नवंबर 2025 के GCC प्लस सर्वे के अनुसार, सर्वे में शामिल 79 प्रतिशत केंद्रों ने फाइनेंस, 65 प्रतिशत ने ह्यूमन रिसोर्सेज, 54 प्रतिशत ने सप्लाई चेन मैनेजमेंट और 31 प्रतिशत ने मार्केटिंग से जुड़े कार्यों की जानकारी दी. ये आंकड़े संबंधित कार्यों की मौजूदगी दिखाते हैं, कुल नौकरियों में उनकी हिस्सेदारी नहीं.

GCC में क्यों बढ़ रही MBA की डिमांड?

बैक ऑफिस से ग्लोबल लीडरशिप तक- रिपोर्ट के अनुसार, GCCs बड़े पैमाने पर प्रोडक्ट डेवलपमेंट और ग्लोबल ओनरशिप की ओर बढ़ रहे हैं. जिससे भारत में मौजूद सेंटर्स में ग्लोबल लीडरशिप रोल्स 2030 तक 6,500 से बढ़कर 30,000 से ज़्यादा होने का अनुमान है.

फॉरवर्ड-डिप्लॉयड और हाइब्रिड रोल्स- ऑर्गनाइज़ेशन्स तेज़ी से फॉरवर्ड-डिप्लॉयड इंजीनियर्स (FDEs) और हाइब्रिड मैनेजर्स जैसे टैलेंट की तलाश कर रहे हैं, जो AI और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन चलाने के लिए बिज़नेस सेंस को टेक्निकल/प्रोडक्ट फ्लूएंसी के साथ मिलाते हैं.

फाइनेंस और स्ट्रैटेजी फंक्शन्स का विस्तार- GCCs के फाइनेंस और ऑपरेशन्स विंग्स रूटीन अकाउंटिंग के बजाय 500+ रेगुलेटरी मैंडेट्स में एंटरप्राइज-वाइड ट्रांसफॉर्मेशन, रिस्क मैनेजमेंट और कम्प्लायंस को लीड कर रहे हैं.

मिड-करियर स्पेशलाइज़ेशन- हायरिंग मिड-करियर प्रोफेशनल्स (4–10 साल का अनुभव) की ओर बढ़ी है, जिनके पास डोमेन एक्सपर्टीज़ और तेज़ मैनेजेरियल समझ दोनों हैं.

MBA ग्रेजुएट्स के लिए कहां हैं नौकरी के अवसर?

GCC के विस्तार ने मैनेजमेंट के कई एरिया में रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं, जो इस प्रकार हैं-

फाइनेंस और अकाउंटिंग- बजट बनाना, वित्तीय योजना तैयार करना, जोखिम प्रबंधन और वित्तीय नियमों का पालन सुनिश्चित करना.

ह्यूमन रिसोर्स- कर्मचारियों का चयन, प्रशिक्षण, कर्मचारी संतुष्टि और विभिन्न देशों में काम करने वाली टीमों का मैनेजमेंट.

मार्केटिंग और कस्टमर एक्सपीरियंस- मार्केट स्टडी, ग्राहकों की पसंद समझना, ब्रांड से जुड़े कार्य और इंटरनेशनल मार्केटिंग गतिविधियां.

बिजनेस एनालिटिक्स- आंकड़ों का विश्लेषण करना, व्यावसायिक निर्णयों में सहायता देना और कंपनी के प्रदर्शन में सुधार के तरीके खोजना.

ऑपरेशंस एवं सप्लाई चेन मैनेजमेंट- खरीद, लॉजिस्टिक्स, आपूर्ति व्यवस्था, कार्यप्रणाली में सुधार और विक्रेताओं के साथ समन्वय करना.



Source link