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कभी दाएं तो कभी बाएं होने वाले निषाद पार्टी के मुखिया संजय निषाद एक बार फिर प्रेशर पॉलिटिक्स करने में जुट गए हैं. आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने बीजेपी को ही देख लेने की धमकी दे दी है. एक कार्यक्रम में अपने समाज के लोगों से उन्होंने साफ कहा है कि अगर आरक्षण नहीं लागू होता है तो 2027 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को देख लेना.
निषाद पार्टी के मुखिया संजय निषाद.
लखनऊः निषाद पार्टी के मुखिया संजय निषाद एक बार फिर पाला पलटने के संकेत देते हुए नजर आ रहे हैं. क्योंकि आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया है. साथ ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी को देख लेने की भी धमकी दी है. संजय निषाद ने कहा कि 18 फीसदी आबादी मछुआरों का है. इनके बच्चों का जो आरक्षण था, उसमें से 10 फीसदी अपर कास्ट को दिया और 33 फीसदी महिलाओं को दिया गया है. तो हर हाल में भारतीय जनता पार्टी को निषादों, मछुआरों, मतवार और त्रय को, उनके हिस्से का आरक्षण देना ही पड़ेगा. अगर ऐसा नहीं होता है तो आप समझ लेना भारतीय जनता पार्टी का. जिसने भी निषादों को धोखा दिया, वो धोखा खाया कि नहीं खाया? हाथ उठा के बोलो खाया कि नहीं खाया?
‘भाजपा धोखा खाएगी कि नहीं खाएगी’
संजय निषाद ने सभा में मौजूद लोगों से पूछा कि अगर तुम्हारा आरक्षण लागू नहीं करेगी भाजपा, तो धोखा खाएगी कि नहीं खाएगी? बोलो! धोखा खाएगी कि नहीं खाएगी? सबने धोखा दिया कि नहीं दिया है? तो हमें क्या चाहिए? हाथ उठा के बोलो क्या चाहिए? क्या चाहिए? मछुआरों को क्या चाहिए? कुरैयार को क्या चाहिए? मधुवार को क्या चाहिए? अपने जगह पर बैठे-बैठे थोड़ा दोनों हाथ उठा के बोलो क्या चाहिए? तफ्ती उठा के बोलो क्या चाहिए? मछुआरों को क्या चाहिए? संविधान में हमारा हिस्सा लिखा, हमें क्या चाहिए?
आरक्षण को लेकर मुखर हुए संजय निषाद
संजय निषाद ने आगे पूछा कि 24 नंबर पर चमार भाई, जाटव भाई का लागू है कि नहीं है? बोलो लागू है कि नहीं है? धोबी भाई का लागू है कि नहीं है? शंकर भाई का लागू है कि नहीं है? बासी भाई का लागू है कि नहीं है? तो हमारा भी लागू होगा कि नहीं होगा? जितने लोग लागू कराना चाहते हैं बोलो. जय निषाद राज! लागू कराने के लिए आपके वोट में हमारा वोट कम है कि ज्यादा है?
बीजेपी सांसद बाबूराम निषाद ने संजय निषाद पर बोला हमला
वहीं भाजपा राज्यसभा सांसद बाबूराम निषाद ने संजय निषाद पर हमला बोलते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी और पूरा हमारा एनडीए एक साथ है. लेकिन कुछ लोग हैं उत्तर प्रदेश में, जो हमेशा उनके दाएं-बाएं होने की आदत है. गठबंधन में रहकर, सरकार में रहकर के उटपटांग बोलना और उटपटांग बोलकर चर्चाओं में बने रहना और अपने आप को अपने मुंह से गार्ड फादर कहना किसी पर्टिकुलर समाज का, उनकी आदत है.
‘सबकुछ विचार-विमर्श से होगा’
इसके अलावा बीजेपी के राज्यसभा सांसद ने कहा कि किसी समाज का कोई गॉडफादर नहीं हो सकता है. गॉडफादर हमारे भगवान राम हैं और हम उस निषाद राज के वंशज हैं, उस केवट के वंशज हैं, जिसमें सिद्धांत और सनातन को हमेशा आधार मानकर चला है. गठबंधन की राजनीति हो रही है. जब गठबंधन की राजनीति है तो स्वाभाविक है पर उस पर सबसे संवाद, विचार, विमर्श होगा और कोई निर्णय लिया जाएगा तभी आगे उस निर्णय को लागू किया जाता है. कोई तालकटोरा में और रामलीला मैदान में और लखनऊ के अंबेडकर मैदान में भीड़ इकट्ठा कर ले और किसी को दबाव में लेकर के कुछ अपनी मांग पूरी करा ले, ये संभव नहीं हो सकता है.