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Varanasi News: नाटी इमली का भरत मिलाप लक्खा मेले में शुमार है. इस मेले में आज भी लाखों भक्तों की भीड़ इकट्ठा होती है. काशी में इस भरत मिलाप के अलावा अस्सी के नाग नथैया की लीला, देव दीपावली, रथयात्रा मेला सहित कई मेले इस लिस्ट में शामिल है.
वाराणसी: सात वार, नौ त्योहार के शहर बनारस में दशहरा के अगले दिन ऐतिहासिक भरत मिलाप का आयोजन होता है. 483 साल से पुराने इस भरत मिलाप में प्रभु श्री के भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिलता है. बिना किसी आमंत्रण के इस लीला को देखने के लिए नाटी इमली के मैदान में लाखों लोग चले आते हैं. काशी नरेश भी शाही अंदाज इस लीला को देखने आएं. इस दौरान हर हर महादेव के साथ जय श्री राम के नारे गूंजते रहें.
चित्रकूट लीला समिति द्वारा आयोजित इस भरत मिलाप की शुरुआत 483 साल पहले हुई थी. गोस्वामी तुलसीदास के समकालीन मेघा भगत ने इसकी शुरुआत की थी. मेघा भगत को इसी भरत मिलाप के लीला के दौरान उन्हें प्रभु श्री राम के दर्शन हुए थे. भक्तों का ऐसा मानना है कि इस लीला में आज भी प्रभु श्री राम के दर्शन भक्तों को होते हैं. यही वजह है कि आज भी इसे देखने के लिए मैदान के अलावा आसपास के सभी छत, बरामदे भक्तों के भीड़ से खचाखच भरे होते हैं.
यदुवंशी समाज के लोगों से खासा नाता
काशी के इस लीला में यदुवंश और रघुवंश के बीच अटूट रिश्ते की झलक भी दिखती हैं. इस लीला में यदुवंशी समाज के कंधे पर प्रभु श्री राम-लक्ष्मण माता जानकी के साथ आते हैं. यादव समाज से जुड़े अमन यादव ने बताया कि उनके पूर्वज भी इस परम्परा को निर्वहन करने के लिए यहां आते थे और प्रभु श्रीराम के रथ को उठाते थे. अब वो इस परम्परा को निभा रहे हैं. उनके साथ उनकी अगली पीढ़ी भी है, जो उनके साथ इस लीला में आएं है.
लक्खा मेले में है शुमार
नाटी इमली का भरत मिलाप लक्खा मेले में शुमार है. इस मेले में आज भी लाखों भक्तों की भीड़ इकट्ठा होती है. काशी में इस भरत मिलाप के अलावा अस्सी के नाग नथैया की लीला, देव दीपावली, रथयात्रा मेला सहित कई मेले इस लिस्ट में शामिल है. लीला कमेटी से जुड़े राजन मोहन झा ने बताया कि यह ऐतिहासिक लीला आज भी अपने पुराने स्वरूप को सहेजे हुए है. काशी राज परिवार से भी इस लीला का रिश्ता दो साल से अधिक पुराना है.