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Seoni News: सिवनी में जिला पंचायत अध्यक्ष मालती डेहरिया को हटाने के लिए कांग्रेस अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई थी, लेकिन यह प्रस्ताव औंधे मुंह गिर गया है. कांग्रेस को गोंडवाना पार्टी का भी साथ था, लेकिन वह अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाई है. अध्यक्ष मालती डेहरिया की कुर्सी को अब कोई भी खतरा नहीं है.
सिवनी में गिर गया कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव (AI तस्वीर)
Seoni News: मध्य प्रदेश के सिवनी में कांग्रेस को एक बार फिर से मुंह की खानी पड़ी है. सिवनी जिला पंचायत की सियासत में चल रही उठापटक पर आखिरकार बड़ा विराम लग गया है. भाजपा समर्थित जिला पंचायत अध्यक्ष मालती डेहरिया के खिलाफ कांग्रेस अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई थी. लेकिन वह वोट कम होने की वजह से वह गिर गया है, जबकि कांग्रेस के गोंडवाना पार्टी का भी समर्थन मिला हुआ था. अब जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी बरकरार रहेगी.
अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया के दौरान सदस्यों के बीच मतदान कराया गया. मतदान के परिणाम में प्रस्ताव को आवश्यक समर्थन नहीं मिल सका और मालती डेहरिया अपनी कुर्सी बचाने में सफल रहीं. कांग्रेस ने हार की समीक्षा करने की बात कही है. वही कांग्रेस की इस विफलता पर सिवनी विधायक दिनेश राय ने कांग्रेस को मुंहतोड़ जवाब देने की बात कही है.
अविश्वास के पक्ष में पड़े 12 वोट
कांग्रेस समर्थित जिला पंचायत सदस्य राकेश सनोड़िया ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था. हम कांग्रेस और गोंडवाना पार्टी के बीच गठबंधन में थे. वोटिंग के दौरान 12 पक्ष में वोट पड़े और 7 वोट विपक्ष में पड़े. इससे अविश्वास प्रस्ताव पास नहीं हो सका. हम लोगों ने काफी प्रयास किया. हमें जानकारी नहीं है कि किसने हमें वोट नहीं दिया है. कांग्रेस के लोगों ने धोखेबाजी की है या गोंडवाना पार्टी ने यह हमें नहीं मालूम है. हमारा संगठन इस पर संज्ञान लेगा.
भाजपा विधायक कांग्रेस विधायकों की बताई मनगढ़त कहानी
भाजपा विधायक दिनेश राय ने कहा कि मैं हमारे वरिष्ठ नेतृत्व को धन्यवाद देता हूं. हमारे मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष और सबके मार्गदर्शन में अविश्वास प्रस्ताव गिर गया है. यह आना ही नहीं चाहिए था. यह कांग्रेस के कुछ लोगों की मनगढ़त कहानी है. अब सदस्यों ने उसको मुंहतोड़ जवाब दे दिया है.
अब अविश्वास प्रस्ताव गिरने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या कांग्रेस पार्टी ने पहले पूरी प्लानिंग नहीं थी. यह फिर प्रस्ताव पर वोटिंग के दौरान उसके ही लोग उसका हाथ छोड़कर चले गए. वजह कुछ भी रही हो, लेकिन कांग्रेस पार्टी की एक बार फिर से फजीहत हो गई है.