क्‍या है शमोंडा वायरस? जानवरों में म‍िलता था, पहली बार इंसान में म‍िला, हुई मौत

क्‍या है शमोंडा वायरस? जानवरों में म‍िलता था, पहली बार इंसान में म‍िला, हुई मौत


शमोंडा वायरस, जो अभी तक गायों या दूसरे जानवरों में ही म‍िलता था, पहली बार एक इंसान में पाया गया है. फ्रांस के ल्योन शहर में एक गंभीर बीमारी का इलाज करा रहे मरीज के भीतर ये संक्रमण म‍िला है. अक्टूबर, 2025 की शुरुआत में ही इस मरीज की मौत हो गई. हालांकि, यह साफ नहीं है कि मरीज की मौत वायरस के कारण हुई या किसी दूसरी बीमारी की वजह से क्‍योंकि वह पहले से ही गंभीर रूप से बीमार था. फ्रांस के स्वास्थ्य और कृषि मंत्रालय ने गुरुवार को एक संयुक्त बयान जारी कर इस मामले की पुष्टि की. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, संक्रमित मरीज की इम्यूनिटी बहुत कमजोर थी. अधिकारियों ने कहा है कि फिलहाल आम लोगों के लिए किसी खतरे की पहचान नहीं हुई है.

मंत्रालय ने बताया कि शमोंडा वायरस कई दशकों से अफ्रीका और एशिया में मौजूद है, लेकिन इससे पहले इंसानों में इसके संक्रमण का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ था. अधिकारियों के मुताबिक, यह बेहद कमजोर इम्यूनिटी वाले व्यक्ति में सामने आया एक रेयर मामला हो सकता है.

क्या है शमोंडा वायरस?
शमोंडा वायरस उन वायरस के समूह से जुड़ा है, जो काटने वाले छोटे कीड़ों के जरिए फैल सकते हैं. इनमें खास तौर पर कुलिकोइड्स नाम की बहुत छोटी मक्खियां शामिल हैं. इन्हें आम तौर पर बाइटिंग मिड्ज कहा जाता है. यह वायरस मुख्य रूप से गायों में पाया गया है. हालांकि, भेड़, बकरी और घोड़ों जैसे दूसरे जानवरों में भी इससे जुड़े संक्रमण सामने आए हैं. इस वायरस को पहली बार 1965 में नाइजीरिया में गायों से अलग किया गया था. इसके बाद अफ्रीका के कुछ हिस्सों और जापान में भी पशुओं में इसके मामले सामने आए.

फ्रांस के अधिकारियों को आशंका है कि मरीज को पूर्वी फ्रांस में किसी संक्रमित कीड़े के काटने से वायरस लगा हो सकता है. हालांकि, अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है. यूरोपीय सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल (ECDC) के मुताबिक, यह भी स्पष्ट नहीं है कि संक्रमण फैलाने में किस प्रजाति के कीड़े की भूमिका रही होगी.

फ्रांस के कृषि मंत्रालय के मुताबिक, मरीज ल्योन के हॉस्पिस सिविल्स डी ल्योन अस्पताल में एक गंभीर बीमारी का इलाज करा रहा था. उसकी इम्‍यूनिटी बहुत कमजोर थी. मंत्रालय ने बताया कि मरीज की मौत से पहले उसके दिमाग में कुछ गंभीर जटिलताएं देखी गई थीं. शुरुआती जांच के आधार पर आशंका है कि इन जटिलताओं का संबंध शमोंडा वायरस के संक्रमण से हो सकता है. इस मामले की जांच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और ECDC के सहयोग से की जा रही है. इसमें मरीज की मेडिकल रिपोर्ट, लैब जांच और संक्रमण से जुड़ी परिस्थितियों का अध्ययन किया जा रहा है.

क्या शमोंडा वायरस इंसानों के लिए खतरनाक है?
फ्रांस के स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि अभी तक आम आबादी के लिए किसी खतरे का पता नहीं चला है. मौजूदा जानकारी के आधार पर इस संक्रमण को आम लोगों के लिए व्यापक स्वास्थ्य जोखिम नहीं माना गया है. फिर भी यह मामला वैज्ञानिकों के लिए अहम है, क्योंकि इससे पहले इंसानों में शमोंडा वायरस के संक्रमण का कोई केस समाने नहीं आया है. वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या इस तरह का संक्रमण केवल खास परिस्थितियों में हो सकता है या कमजोर इम्‍यून‍िटी वालों को दूसरे लोगों को भी इससे खतरा हो सकता है.

यूरोप में जानवरों के बीच कैसे फैला इससे मिलता-जुलता वायरस?
इंसान में शमोंडा वायरस मिलने का मामला ऐसे समय सामने आया है, जब 2026 में पश्चिमी यूरोप के कुछ देशों में पशुओं के बीच इससे मिलता-जुलता एक वायरस पाया गया. साइंस पत्रिका में अगस्त 2026 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, वैज्ञानिकों ने दक्षिणी जर्मनी, स्विट्जरलैंड और फ्रांस की डेयरी गायों में एक ऐसे वायरस की पहचान की, जिसका जेनेटिक कोड शमोंडा वायरस से काफी मिलता था. दोनों के जीनोम में 90 प्रतिशत से अधिक समानता पाई गई.

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय जीनोम डेटाबेस में इस वायरस का मिलान शमोंडा वायरस के किसी ज्ञात स्ट्रेन से नहीं हुआ. इसलिए वैज्ञानिकों ने फिलहाल इसे ‘शमोंडा-लाइक’ नाम दिया. इसका मतलब है कि यह शमोंडा वायरस से मिलता-जुलता है, लेकिन इसकी सही पहचान और वर्गीकरण पर अभी काम चल रहा है. फ्रांस की नेशनल वेटरनरी स्कूल ऑफ टूलूज के शोधकर्ता जीन-ल्यूक गेरिन ने कहा कि इस वायरस को समझने और इसकी जांच के नए तरीके विकसित करने के लिए तेजी से काम करना होगा.

जर्मनी के फ्रेडरिक लोफ्लर इंस्टीट्यूट के पशु-वायरोलॉजिस्ट मार्टिन बीयर ने चिंता जताई कि अगर ऐसा वायरस स्थानीय स्तर पर पशुओं के झुंडों में फैलने लगे, तो उस पर काबू पाना मुश्किल हो सकता है. वैज्ञानिक यह भी जांच कर रहे हैं कि यह वायरस पश्चिमी यूरोप तक कैसे पहुंचा. एक आशंका यह है कि संक्रमित कीड़े किसी विमान के जरिए वहां पहुंचे हों. इसके बाद अनुकूल तापमान मिलने से वायरस को फैलने का मौका मिला हो.

जानवरों में क्‍या हैं इस वायरस के लक्षण?
गायों में शमोंडा वायरस के संक्रमण से बुखार, सुस्ती और दस्त जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. संक्रमित डेयरी गायों में दूध का उत्पादन भी काफी घट सकता है. यूरोप में मिले शमोंडा-लाइक वायरस को लेकर वैज्ञानिक इसलिए भी चिंतित हैं, क्योंकि इससे डेयरी पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है. वे यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या संक्रमित पशुओं में गर्भपात, मृत बच्चे का जन्म या जन्म के समय दूसरी समस्याएं हो सकती हैं.

फिलहाल इंसान में मिले शमोंडा वायरस के इस मामले और यूरोप के पशुओं में पाए गए शमोंडा-लाइक वायरस के बीच सीधा संबंध स्थापित नहीं हुआ है. इसलिए दोनों को एक ही वायरस मानना सही नहीं होगा. आगे की जांच से ही पता चलेगा कि संक्रमण कैसे हुआ और इंसानों तथा पशुओं के स्वास्थ्य के लिए इसका क्या महत्व है.



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