नई दिल्ली. जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड (Jio Platforms) के मेगा आईपीओ ने बाजार में धूम मचा दी है. बड़े वैश्विक और घरेलू संस्थागत निवेशकों के साथ ही खुदरा निवेशक भी इस आईपीओ में जमकर पैसा लगा रहे हैं. हर तरफ से मिले असाधारण समर्थन से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि जियो शेयर की लिस्टिंग काफी मजबूत हो सकती है. शेयर अलॉटमेंट की उम्मीद लगाए बैठे बहुत से निवेशकों के मन में लिस्टिंग गेन के साथ ही बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह शेयर लंबी अवधि में कितना रिटर्न देगा? क्या जियो भविष्य में एक ऐसा हाई-ग्रोथ टेलीकॉम और टेक शेयर साबित हो सकता है जो निवेशकों की वेल्थ में लगातार इजाफा करे?
जियो अब सिर्फ सिम कार्ड बेचने या नए मोबाइल ग्राहक जोड़ने तक सीमित कंपनी नहीं रह गई है. कंपनी ने भारत में दुनिया का सबसे बड़ा डेटा नेटवर्क खड़ा कर लिया है. अब कंपनी के विस्तार का दूसरा चरण शुरू हो रहा है, जिसका मकसद इस विशाल नेटवर्क का इस्तेमाल करके प्रति यूजर ज्यादा कमाई (ARPU) करना और एंटरप्राइज, ब्रॉडबैंड व क्लाउड जैसी डिजिटल सेवाओं को भुनाना है.
लिस्टिंग गेन के कितने मजबूत संकेत?
मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को लेकर शुरुआती रुझान बेहद सकारात्मक रहे हैं. कंपनी की ₹8,110 करोड़ की एंकर बुक में उपलब्ध शेयरों के मुकाबले 30 गुना से भी अधिक की मांग दर्ज की गई. संस्थागत निवेशकों की कुल मांग करीब ₹2.5 लाख करोड़ तक पहुंच गई. लॉन्ग-ओनली फंड्स, सॉवरेन वेल्थ फंड्स, घरेलू म्यूचुअल फंड्स और बड़ी बीमा कंपनियों ने एंकर बुक में हिस्सा लिया. बड़े फंडों की यह आक्रामक भागीदारी दर्शाती है कि बाजार के बड़े खिलाड़ियों को कंपनी की बुनियादी मजबूती पर भरोसा है.
अनलिस्टेड मार्केट में ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) 20% से अधिक लिस्टिंग गेन की तरफ इशारा कर रहा है. हालांकि, बाजार के जानकार हमेशा यह आगाह करते हैं कि ग्रे मार्केट के रुझान अनौपचारिक होते हैं और वे लिस्टिंग के दिन का सटीक पैमाना नहीं हो सकते. इसके बावजूद, संस्थागत निवेशकों की रिकॉर्ड दिलचस्पी यह साफ संकेत देती है कि 28 अक्टूबर को शेयर बाजारों में जब यह शेयर लिस्ट होगा, तो इसकी शुरुआत काफी आकर्षक और मजबूत रहने की पूरी संभावना है.
लिस्टिंग पर फायदा तय, पर मल्टीबैगर की उम्मीद न पालें
बाजार के प्रमुख विश्लेषकों ने जियो के शेयर को लेकर संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण पेश किया है. विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को अपनी उम्मीदों को वास्तविकता के धरातल पर रखना चाहिए. स्वतंत्र विश्लेषक अंबरीश बालिगा का कहना है कि आईपीओ के लिए जिस तरह का रिस्पॉन्स दिखा है, वह सीधे तौर पर मजबूत लिस्टिंग की ओर इशारा करता है. एंकर बुक में 30 गुना की मांग यह दर्शाती है कि बड़े फंड्स केवल अलॉटमेंट लेने नहीं आए हैं, बल्कि लिस्टिंग के बाद भी वे शेयर में खरीदारी जारी रख सकते हैं. संस्थागत निवेशकों की यह निरंतर मांग शेयर को नीचे गिरने से बचाएगी.
हेलिओस कैपिटल के संस्थपक समीर अरोड़ा ने इस आईपीओ को “नो-ब्रेनर” करार दिया है, यानी एक ऐसा सुरक्षित और सीधा निवेश विकल्प जिसमें ज्यादा उलझन की गुंजाइश नहीं है. उनका मानना है कि निवेशकों को इस इश्यू से कमाई जरूर होगी. लिस्टिंग के बाद यह शेयर इंडेक्स की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है. अरोड़ा का कहना है कि यह जरूरी नहीं कि जियो का रिटर्न असाधारण रूप से बहुत बड़ा हो. उनके अनुसार, यह उन शेयरों में आता है जहां स्थिर और वाजिब रिटर्न मिलने का भरोसा काफी मजबूत होता है.
वैलम कैपिटल के मनीष भंडारी ने कहा है कि जियो शेयर को किसी मल्टीबैगर शेयर की तरह नहीं देखना चाहिए. जियो पहले से ही एक विशालकाय कंपनी है. यह शेयर लिस्टिंग पर निवेशकों को अच्छा मुनाफा दे सकता है और बाद में जब इसे निफ्टी या सेंसेक्स जैसे प्रमुख सूचकांकों में शामिल किया जाएगा, तो पैसिव और इंडेक्स फंडों की तरफ से आने वाली निरंतर खरीदारी से इसे बाजार में मजबूत सपोर्ट मिलता रहेगा.
आंकड़े क्यों ठहराते हैं प्रीमियम को सही?
जियो के वित्तीय और ऑपरेशनल आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि निवेशक इसके लिए प्रीमियम वैल्यूएशन देने को क्यों तैयार हैं. भारतीय दूरसंचार बाजार में कंपनी का पैमाना प्रतिद्वंद्वियों पर भारी पड़ता दिख रहा है:
| मेट्रिक्स | जियो प्लेटफॉर्म्स (FY26) | भारती एयरटेल (भारत कारोबार) |
|---|---|---|
| कुल सब्सक्राइबर्स | 52.44 करोड़ | 48.24 करोड़ |
| सालाना नए ग्राहक जोड़ | 3.62 करोड़ | – |
| प्रति यूजर औसत राजस्व (ARPU) | ₹214 | – |
| सालाना डेटा ट्रैफिक | 241.4 अरब GB | 101.3 अरब GB |
| मासिक डेटा खपत (प्रति यूजर) | 42.3 GB | 31.4 GB |
| ग्राहक छोड़ने की दर (Churn Rate) | 1.67% (बेहतर स्थिरता) | 2.43% |
| वायरलेस ब्रॉडबैंड मार्केट शेयर | 50% | 35% |
| सालाना राजस्व (Revenue) | ₹1,47,000 करोड़ | – |
| EBITDA / मार्जिन | ₹76,255 करोड़ (51.9%) | ₹82,193 करोड़ (58.6%) |
| शुद्ध लाभ (Net Profit) | ₹30,049 करोड़ | – |
आंकड़ों से स्पष्ट है कि डेटा खपत और वायरलेस ब्रॉडबैंड हिस्सेदारी के मामले में जियो का कोई मुकाबला नहीं है. वित्त वर्ष 2024 में ₹181.7 और 2025 में ₹206.2 के बाद वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का ARPU बढ़कर ₹214 पर पहुंच चुका है, जो यह साबित करता है कि कंपनी अपने मौजूदा ग्राहकों से धीरे-धीरे ज्यादा रेवेन्यू निकालने में सफल हो रही है.
भविष्य में कमाई की रणनीति
भारत का टेलीकॉम बाजार अब मुख्य रूप से दो बड़े दिग्गजों यानी जियो और एयरटेल के बीच सिमट चुका है. ऐसे में बाजार में अब करोड़ों नए मोबाइल ग्राहक जोड़ने की गुंजाइश पहले जैसी नहीं रह गई है. विश्लेषकों का मानना है कि भविष्य में विकास की रफ्तार नए यूजर्स के बजाय मौजूदा यूजर्स से होने वाली कमाई पर निर्भर करेगी.
मनीष भंडारी का कहना है कि भविष्य में टैरिफ बढ़ाने और कई तरह की वैल्यू-एडेड सेवाओं को बंडल करने से जियो के पास रेवेन्यू बढ़ाने की अच्छी गुंजाइश है. हालांकि, नए ग्राहकों को जोड़ने की गति आने वाले समय में स्वाभाविक रूप से धीमी पड़ेगी. इस पर कंपनी की सोच भी बिल्कुल स्पष्ट है. जियो के चेयरमैन आकाश अंबानी ने एक हालिया इंटरव्यू में साफ संकेत दिया था कि कंपनी कमाई बढ़ाने के लिए सिर्फ डेटा महंगा करने पर निर्भर नहीं है. उनका मानना है कि जैसे-जैसे ग्राहक नेटवर्क पर ज्यादा समय बिताते हैं, होम ब्रॉडबैंड, एयरफाइबर (FWA) और क्लाउड आधारित सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं, कंपनी के लिए नए रेवेन्यू स्ट्रीम अपने आप खुलते हैं. जियो होम ब्रॉडबैंड और एंटरप्राइज बिजनेस का विस्तार करके हर घर और ऑफिस से ज्यादा से ज्यादा वैल्यू हासिल करने की दीर्घकालिक रणनीति पर काम कर रही है.
पूंजीगत खर्च और टेक्नोलॉजी एक्सपोर्ट
टेलीकॉम कारोबार की सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि यह एक पूंजी-प्रधान सेक्टर है. स्पेक्ट्रम खरीदने, 5G टावर लगाने, फाइबर बिछाने और नेटवर्क अपग्रेड करने के लिए कंपनियों को लगातार हजारों करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च (Capex) करना पड़ता है. निवेशकों की चिंता रहती है कि लगातार होने वाले इस भारी खर्च के बीच क्या कंपनी अपने लगाए गए पैसे पर बेहतर रिटर्न (ROCE) दे पाएगी?
3P इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के प्रशांत जैन का मानना है कि जियो की सबसे बड़ी ताकत उसका स्वदेशी टेक्नोलॉजी स्टैक और पेटेंट पोर्टफोलियो है. जैन का कहना है कि चीन के बाहर दुनिया का सबसे बड़ा मोबाइल डेटा ट्रैफिक संभालने वाली जियो अब एक पारंपरिक टेलीकॉम ऑपरेटर से आगे निकल चुकी है. जियो अपने द्वारा विकसित किए गए 5G और डिजिटल नेटवर्क सिस्टम को दुनिया भर के विदेशी टेलीकॉम ऑपरेटरों को लाइसेंस या पार्टनरशिप के जरिए एक्सपोर्ट कर सकती है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि जियो को विदेशों में नेटवर्क बनाने के लिए अपनी जेब से भारी पूंजी नहीं लगानी पड़ेगी, बल्कि वह एक सॉफ्टवेयर और प्लेटफॉर्म कंपनी की तरह टेक्नोलॉजी देकर शुद्ध रॉयल्टी और रेवेन्यू कमा सकेगी.
वैल्यूएशन का गणित
प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर जियो प्लेटफॉर्म्स का कुल वैल्यूएशन लगभग ₹10.3 लाख करोड़ आंका गया है. तुलनात्मक रूप से देखें तो भारती एयरटेल का मौजूदा मार्केट कैप लगभग ₹11.2 लाख करोड़ है. हालांकि, एयरटेल के इस वैल्यूएशन में उसके अफ्रीकी टेलीकॉम ऑपरेटर, इंडस टावर्स की हिस्सेदारी और अन्य विदेशी निवेश भी शामिल हैं.
ब्रोकरेज फर्म नोमुरा के अनुसार, एयरटेल के केवल भारतीय कारोबार का मूल्य करीब ₹9.5 लाख करोड़ बैठता है. अनुमानित एक-वर्षीय फॉरवर्ड EV/EBITDA के आधार पर जियो का वैल्यूएशन 10.9 गुना है, जबकि एयरटेल इंडिया का 9.2 गुना है. इसका मतलब है कि जियो अपने भारतीय प्रतिद्वंद्वी की तुलना में करीब 15% प्रीमियम पर आ रही है.
कमाई में जोरदार उछाल की उम्मीद
एयरटेल के पास 58.6% का ज्यादा मजबूत EBITDA मार्जिन है और हालिया जून 2026 तिमाही में उसने 95 लाख नए ग्राहक जोड़े थे, जबकि जियो ने 89 लाख ग्राहक जोड़े. इसके बावजूद जियो को प्रीमियम मिलने की मुख्य वजह उसका विशाल स्केल, अधिक डेटा खपत और ऑपरेटिंग लेवरेज का फायदा है. कंपनी ने नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने का सबसे भारी खर्च पहले ही पूरा कर लिया है. अब आने वाला अतिरिक्त रेवेन्यू सीधे कंपनी के मुनाफे में जुड़ेगा. अंबरीश बालिगा का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में किए गए भारी कैपेक्स के दम पर आने वाले तिमाहियों में जियो की कमाई में तेज उछाल देखने को मिलेगा.
(Disclaimer: IPO में किया गया निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. यदि आप आईपीओ में पैसा लगाना चाहते हैं तो पहले सर्टिफाइड इनवेस्टमेंट एडवायजर से परामर्श कर लें. आपके किसी भी तरह की लाभ या हानि के लिए लिए News18 जिम्मेदार नहीं होगा.)
(डिस्क्लेमर – नेटवर्क18 और टीवी18 कंपनियां चैनल/वेबसाइट का संचालन करती हैं, जिनका नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज एकमात्र लाभार्थी है.)