हफ्ते में 5 दिन नौकरी, वीकेंड पर खेती; हैदराबाद की युवती ने पेश की अनूठी मिसाल
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Shanti Gattineni Success Story: हैदराबाद में रहने वाली कामकाजी युवती शांति गट्टिनेनी ने सप्ताह में 5 दिन नौकरी और वीकेंड पर प्राकृतिक खेती करके एक शानदार मिसाल पेश की है. उन्होंने बिना केमिकल और कम से कम हस्तक्षेप वाली ‘डू नथिंग फार्मिंग’ तकनीक अपनाकर लीज की एक एकड़ जमीन पर खेती शुरू की. मात्र 2 लाख रुपये के शुरुआती निवेश से उन्होंने अरहर, सहजन, पपीता और केला जैसी फसलें उगाई हैं. सिर्फ सहजन से उन्हें 50 हजार रुपये की आमदनी हुई है और पिछले डेढ़ साल से हर हफ्ते 50 से 100 किलो पपीता निकल रहा है.
Hyderabad: आज के भागदौड़ भरे दौर में जहां ज्यादातर लोग अपनी व्यस्त कॉर्पोरेट दिनचर्या और नौकरी के तनाव में ही उलझे रहते हैं, वहीं हैदराबाद की एक कामकाजी युवती ने अपनी जीवनशैली से एक मिसाल कायम की है. सप्ताह के पांच दिन दफ्तर की जिम्मेदारी संभालने वाली यह युवती अपने शनिवार और रविवार यानी वीकेंड के समय का सदुपयोग खेतों में पसीना बहाकर कर रही है. उन्होंने बिना किसी रासायनिक खाद या कीटनाशकों के पूरी तरह शुद्ध अनाज, फल और सब्जियां उगाकर यह साबित कर दिया है कि लगन हो तो शौक और काम दोनों को साथ निभाया जा सकता है.
युवती शांति गट्टिनेनी के अनुसार, उन्हें बचपन से ही प्रकृति, हरियाली और पर्यावरण से गहरा लगाव रहा है. अपने परिवार को पूरी तरह शुद्ध, केमिकल-मुक्त और पौष्टिक आहार देने की इच्छा ने उन्हें खेती की ओर प्रेरित किया. प्राकृतिक खेती से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण किताबें पढ़ने के बाद उनका ज्ञान और उत्साह दोनों बढ़े, जिसके बाद उन्होंने अपनी नौकरी छोड़े बिना वीकेंड पर खेती करने का अनूठा फैसला किया. वह अपनी खेती में जापानी कृषि विशेषज्ञ मसासानु फुकुओका के सिद्धांत ‘डू नथिंग फार्मिंग’ यानी बिना अधिक कृत्रिम छेड़छाड़ वाली प्राकृतिक खेती की तकनीक अपनाती हैं.
कम हस्तक्षेप और बेहतर पैदावार का फॉर्मूला
शांति का मानना है कि मिट्टी को बार-बार जोतने और उसमें हानिकारक कीटनाशक डालने से जमीन की प्राकृतिक सेहत और उर्वरता नष्ट होती है. जमीन की बायोडायवर्सिटी को जितना कम छेड़ा जाए, मिट्टी उतनी ही उपजाऊ बनी रहती है. चूंकि वह केवल वीकेंड पर ही खेत पर जा पाती हैं, इसलिए यह तकनीक उनके लिए वरदान साबित हुई है. कम हस्तक्षेप और प्रकृति के नियमों के अनुकूल खेती करने से उन्हें बिना अधिक मेहनत के बेहतरीन पैदावार मिल रही है, जिससे उनका समय और ऊर्जा दोनों बचते हैं.
मात्र 2 लाख के निवेश से शुरू किया सफर
शांति ने लीज पर एक एकड़ जमीन लेकर कुल 2 लाख रुपये के छोटे से निवेश के साथ इस कृषि सफर की शुरुआत की थी. इस शुरुआती बजट में जमीन का किराया, गुणवत्तापूर्ण बीज और खेत की शुरुआती तैयारी का खर्च शामिल था. साल 2024 में उन्होंने आधे एकड़ जमीन में अरहर की दाल उगाई, जिसकी फसल से मिलने वाली दाल का इस्तेमाल आज भी उनके घर में नियमित रूप से हो रहा है. बाकी के आधे एकड़ में उन्होंने तेजी से बढ़ने वाले और खरपतवार के बीच टिकने वाले पौधे जैसे सहजन (ड्रमस्टिक), पपीता और केला लगाए.
बंपर पैदावार और शानदार आमदनी
उनकी यह मेहनत और प्राकृतिक तकनीक रंग लाई. मात्र 7 महीने में सहजन, 8 महीने में पपीता और 13 महीने की अवधि में केले की फसल पूरी तरह तैयार हो गई. अकेले सहजन की फसल से उन्हें करीब 50 हजार रुपये की शुद्ध आमदनी हो चुकी है. इसके अलावा, पिछले डेढ़ साल से उनके खेत से हर हफ्ते लगातार 50 से 100 किलो तक ताजा पपीता निकल रहा है. शांति निजी जीवन में भी सादगी और पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाती हैं ताकि औद्योगीकरण का दबाव घटे और प्रकृति को कम से कम नुकसान पहुँचे.