बांग्लादेश की सेना के अंदर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. पाकिस्तान की मिलिट्री एकेडमी में एक बांग्लादेशी कैडेट को गोल्ड मेडल मिलने की खबर ने सेना के अंदर चल रही नाराजगी को फिर चर्चा में ला दिया है. नॉर्थईस्ट न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, सेना के अधिकारियों में इस बात को लेकर बेचैनी है. ऐसा इसलिए क्योंकि जिस सेना से लड़ने के लिए बांग्लादेश के पुरखों ने अपना खून बहाया, आज उसी से मेडल लिया जा रहा है. हालांकि, मामला सिर्फ पाकिस्तान में ट्रेनिंग लेने या मेडल जीतने तक सीमित नहीं है. रिटायर्ड सैन्य अधिकारियों को पिछली तारीख से प्रमोशन और फायदे देने, सेना के अहम पदों में बदलाव और सेना प्रमुख की नाराजगी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.
बांग्लादेश ने 1971 के मुक्ति संग्राम के बाद पाकिस्तान से अलग होकर अपनी आजादी हासिल की थी. ऐसे में बांग्लादेशी कैडेट का पाकिस्तान की सैन्य एकेडमी में सम्मान पाना एक संवेदनशील मुद्दा बन गया है. लेकिन खबर में जिस बड़ी परेशानी की ओर इशारा किया गया है, वह सेना के अंदर बढ़ता असंतोष और सैन्य मामलों में सरकार के फैसलों को लेकर उठ रहे सवाल हैं.
पाकिस्तान में बांग्लादेशी कैडेट को मिला गोल्ड मेडल
रिपोर्ट के मुताबिक, रियाद महमूद खान नाम के बांग्लादेशी कैडेट को पाकिस्तान मिलिट्री अकादमी (PMA) में चीफ ऑफ ओवरसीज गोल्ड मेडल मिला. यह सम्मान 17 अक्टूबर, 2036 को काकुल में 154वें लॉन्ग कोर्स की पासिंग आउट परेड के दौरान दिया गया. रियाद ने सात दूसरे देशों के कैडेटों के साथ वहां ट्रेनिंग ली थी और फ्रेंडली कंट्री कंपनी के सीनियर अंडर ऑफिसर के तौर पर काम किया था.
इस खबर ने बांग्लादेश की सेना के कुछ अधिकारियों के बीच नाराजगी पैदा की है. इसकी एक वजह दोनों देशों का इतिहास है. बांग्लादेश की स्वतंत्र सेना का गठन पाकिस्तान के खिलाफ मुक्ति संग्राम में जीत के बाद हुआ था. ऐसे में पाकिस्तान की सैन्य अकादमी में ट्रेनिंग और वहां सम्मान मिलने को कुछ लोग अलग नजर से देख रहे हैं. हालांकि, अचानक पाकिस्तान की सैन्य अकादमी में ट्रेनिंग लेना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि बांग्लादेश की सेना की सोच बदल गई है. रिपोर्ट में सामने आया असली सवाल यह है कि इस घटनाक्रम के बीच सेना के अंदर पहले से चल रही नाराजगी क्यों बढ़ रही है.
150 पूर्व सैन्य अधिकारियों को प्रमोशन देने पर विवाद
बांग्लादेश की सेना में नाराजगी की एक बड़ी वजह 150 पूर्व सैन्य अधिकारियों को पिछली तारीख से प्रमोशन और दूसरे फायदे देने का फैसला बताया गया है. यह फैसला ऐसे अधिकारियों के लिए किया गया, जिन्हें पहले नौकरी से निकाल दिया गया था या समय से पहले रिटायर होने के लिए मजबूर किया गया था. रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरिम सरकार की ओर से बनाई गई एक राष्ट्रीय समिति की सिफारिशों के आधार पर इन अधिकारियों को ‘डिप्राइव्ड कोटा’ के तहत लाभ देने का गजट जारी किया गया. बताया गया है कि इस फैसले पर सेना, नौसेना और वायुसेना के प्रमुखों की सहमति नहीं थी. यहीं से विवाद और बढ़ गया. मौजूदा अधिकारियों के बीच इस फैसले को लेकर नाराजगी की बात सामने आई है. आसान भाषा में समझें तो विवाद यह है कि पुराने अधिकारियों को अब दोबारा प्रमोशन और फायदे देने का फैसला किन आधारों पर हुआ.
सेना प्रमुख की नाराजगी की चर्चा क्यों?
नॉर्थईस्ट न्यूज की रिपोर्ट में बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमान और स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स (SSF) के प्रमुख मेजर जनरल महबूबुस समद चौधरी के बीच हुई एक कथित घटना का भी जिक्र है. रिपोर्ट में कुछ प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से दावा किया गया है कि पिछले सितंबर में एक छावनी में हुए कार्यक्रम के दौरान सेना प्रमुख सेना के कमान ढांचे में बड़े बदलावों और पूर्व अधिकारियों को पिछली तारीख से प्रमोशन देने के फैसले से नाराज थे. उन्होंने कथित तौर पर SSF प्रमुख से कहा, ‘आप ही सेना चलाइए, फिर!’ रिपोर्ट के मुताबिक, सेना के कुछ वरिष्ठ अधिकारी विवादों से दूर रहकर रिटायर होना चाहते हैं. वहीं, मिड-लेवल यानी बीच के पदों पर तैनात अधिकारियों के दबाव के बाद सेना में अनुशासन बनाए रखने और पूर्व अधिकारियों के प्रभाव को कम करने की कोशिशें की जा रही हैं.
सेना प्रमुख की भारत यात्रा को लेकर भी उठे सवाल
रिपोर्ट में भारत के साथ बांग्लादेश के सैन्य संबंधों का मुद्दा भी उठाया गया है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जनरल वकार-उज-जमान कई अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय रक्षा सम्मेलनों में शामिल नहीं हो सके. इनमें भारत में होने वाली बैठकें भी शामिल थीं. दावा है कि पहले मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार और बाद में BNP सरकार के दौरान भी सेना प्रमुख की विदेश यात्रा को लेकर हिचकिचाहट रही. सितंबर के आखिरी सप्ताह में भी उनकी भारत यात्रा नहीं हो सकी. रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि अंतरिम सरकार के दौरान जमात-ए-इस्लामी के दबाव के कारण यात्रा की मंजूरी में देरी हुई थी.
सेना प्रमुख को हटाने की अटकलें भी लगीं
रिपोर्ट के मुताबिक, जनरल वकार-उज-जमान जब विदेश यात्रा पर थे तब उन्हें सेना प्रमुख के पद से हटाए जाने की अटकलें भी लग रही थीं. हालांकि जनरल ने खुद ही ऐसी चाल चली कि उन्हें हटाया नहीं जा सका. इसके बीच वह 17 अक्टूबर को बांग्लादेश लौटे. अगले दिन, 18 अक्टूबर को, वह सावर छावनी में एक कार्यक्रम में शामिल हुए, जहां प्रधानमंत्री भी मौजूद थे. कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने सेना के कई रेजिमेंटों को उनकी पेशेवर उपलब्धियों के लिए नेशनल स्टैंडर्ड प्रदान किए. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि सेना के माहौल से उनका पुराना परिचय रहा है, क्योंकि वह एक सैन्य परिवार से आते हैं.