SEM कोर्ट क्या है, जहां CJP नेता आशुतोष रांका और सौरव दास तीसरी बार होंगे पेश?
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कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता आशुतोष रांका और सौरव दास बीते 7 दिनों से दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद हैं. दोनों पर जंतर-मंतर पर बिना अनुमति के प्रदर्शन करने पर गिरफ्तार किया गया था. 21 अक्टूबर 2026 को तीसरी बार दोनों की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेशी होने वाली है, जिस पर जमानत पर फैसला होगा. आइए जानते हैं क्या होता है स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट का कोर्ट और किन-किन मामलों को सुन सकता है? स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के पास क्या-क्या अधिकार हैं? दिल्ली पुलिस में कौन-कौन अधिकारी हैं, जो स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट बन सकते हैं?
सौरव दास और आशुतोष रांका किस-किस कोर्ट में बार-बार पेश हो रहे हैं?
नई दिल्ली. कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका बीते सात दिनों से तिहाड़ जेल में बंद हैं. 13 अक्टूबर को दोनों को जंतर-मंतर पर बिना अनुमति के प्रवेश करने और गेट फांदने के आरोप में दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था. सीजेपी के दोनों नेताओं को बुधवार यानी 21 अक्टूबर 2026 को तीसरी बार स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की कोर्ट में पेश किया जाएगा.इससे पहले दो बार दोनों का बेल रिजेक्ट हो गया था. आइए जानते हैं क्या होता स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट का कोर्ट और कैसे यह कोर्ट काम करता है? स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट का कोर्ट किन-किन मामलों को सुन सकता है. स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के पास क्या-क्या अधिकार हैं? दिल्ली पुलिस में कौन-कौन अधिकारी स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट बन सकते हैं?
इस मामले को समझने के लिए तीन चीजों में अंतर करना जरूरी है. पहला, स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट, दूसरा, नियमित न्यायिक मजिस्ट्रेट और तीसरा, पुलिस की निवारक कार्रवाई. दिल्ली में स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की व्यवस्था का कानूनी आधार केवल दिल्ली पुलिस का कोई एक्ट नहीं है. इसमें केंद्र सरकार की ओर से लागू आपराधिक प्रक्रिया संबंधी कानून, दिल्ली में मजिस्ट्रेट नियुक्त करने की अधिसूचनाएं और पुलिस अधिकारियों को दी गई शक्तियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं.
स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कौन बन सकता है?
दिल्ली पुलिस के एसीपी ललित मोहन नेगी कहते हैं, ‘स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ऐसा अधिकारी होता है जिसे कानून के तहत कुछ विशेष मजिस्ट्रेटी शक्तियां दी जाती हैं. इसका मुख्य उद्देश्य किसी संभावित अपराध, शांति भंग या सार्वजनिक व्यवस्था में गड़बड़ी को रोकने के लिए निवारक कार्रवाई करना है. दिल्ली में इस व्यवस्था की एक खास बात यह है कि निर्धारित कानूनी अधिकार मिलने पर पुलिस अधिकारी भी स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की भूमिका निभा सकते हैं. लेकिन एसईएम नियमित न्यायिक मजिस्ट्रेट नहीं होता. वह सामान्य आपराधिक मुकदमों की सुनवाई करके दोषसिद्धि नहीं कर सकता. उसकी शक्तियां कानून और उसे दिए गए अधिकारों तक सीमित होती हैं. वह दो से तीन तक न्यायिक हिरासत में भेज सकता है, ताकि व्यक्ति उसके गलती का एहसास हो.’
किस कानून के तहत SEM कोर्ट बैठती है?
नेगी आगे कहते हैं, ‘केंद्र सरकार अधिसूचना जारी करके दिल्ली पुलिस कमिश्नर और निर्धारित रैंक से नीचे नहीं आने वाले अधीनस्थ पुलिस अधिकारियों को कार्यकारी मजिस्ट्रेट की कुछ शक्तियां दे सकती है. धारा 70(1)(b) में न्यूनतम रैंक ACP निर्धारित है. यह अधिकार अधिसूचना में बताई गई शक्तियों, शर्तों और क्षेत्रों के अधीन होता है. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023- धारा 15 में यह स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की नियुक्ति और उन्हें कार्यकारी मजिस्ट्रेट की शक्तियां देने का सामान्य प्रावधान है. फिलहाल 1 जुलाई 2024 से यह दिल्ली में लागू है. धारा 15 में पुलिस अधिकारी के लिए न्यूनतम रैंक पुलिस अधीक्षक या उसके समकक्ष रखी गई है.
स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के पास क्या-क्या अधिकार हैं?
- शांति बनाए रखने के लिए बांड मांगना: यदि शांति भंग होने की आशंका के पर्याप्त आधार हों, तो संबंधित व्यक्ति को कारण बताने के लिए बुलाया जा सकता है और कानून के मुताबिक शांति बनाए रखने का बांड देने की कार्यवाही हो सकती है.
- संभावित अपराध रोकने की कार्रवाई: पुलिस द्वारा किसी संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए की गई निवारक गिरफ्तारी के बाद व्यक्ति को संबंधित प्रक्रिया के अनुसार मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जा सकता है.
- कारण बताओ नोटिस और जांच: लागू प्रावधानों के अनुसार व्यक्ति से पूछा जा सकता है कि उससे शांति बनाए रखने के लिए बांड क्यों न लिया जाए. उसे अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए.
- हिरासत से संबंधित आदेश: कानून द्वारा अनुमत प्रक्रिया, संबंधित व्यक्ति की स्थिति और लागू न्यायिक निर्देशों के अधीन ही हिरासत या न्यायिक रिमांड से संबंधित आदेश दिए जा सकते हैं.