अमेरिका से मिले F-16 फाइटर जेट से लेकर अपने बनाए बुराक ड्रोन पर पाकिस्तान खूब उछलता है. ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय एयरफोर्स के पराक्रम के आगे भले ही पाकिस्तानी सेना बुरी तरह फेल रही, लेकिन उसकी ऐंठन अभी तक गई नहीं है. हालांकि अब उसके इन फाइटर जेट्स लेकर ड्रोन तक की हेकड़ी निकलने वाली है. भारतीय सेना ने इन लड़ाकू विमानों और ड्रोन के खिलाफ निगरानी क्षमता मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. रक्षा मंत्रालय ने बेहतर क्षमता वाले हल्के रडार खरीदने के लिए भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के साथ करीब 770 करोड़ रुपये का करार किया है. ये रडार लड़ाकू विमान के आकार वाले हवाई लक्ष्यों के साथ छोटे-छोटे ड्रोन का भी चुटकियों में पता लगा सकते हैं. यानी आसमान में मंडराने वाले बड़े हवाई खतरों से लेकर छोटे ड्रोन तक पर नजर रखने की क्षमता को मजबूत करने की तैयारी है.
छोटा रडार, हवाई निगरानी में बड़ी भूमिका
आधुनिक युद्ध में अब केवल बड़े लड़ाकू विमान ही चुनौती नहीं हैं. अब छोटे ड्रोन भी निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और हमले के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं. कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ऐसे लक्ष्यों का पता लगाना कई बार मुश्किल हो सकता है. ऐसे में बेहतर क्षमता वाले हल्के रडार सेना के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं.
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इन रडार को कम ऊंचाई पर हवाई निगरानी के लिए तैयार किया गया है. इनकी मदद से लड़ाकू विमान के आकार वाले लक्ष्यों के अलावा छोटे और सूक्ष्म ड्रोन का भी पता लगाया जा सकेगा. इससे सेना को संदिग्ध हवाई गतिविधियों की पहचान करने और संभावित खतरे की स्थिति का आकलन करने में मदद मिलेगी. हालांकि, मंत्रालय ने इन रडार की पहचान क्षमता, अधिकतम दूरी या किसी खास विमान अथवा ड्रोन के खिलाफ प्रदर्शन से जुड़े विस्तृत तकनीकी आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं.
रक्षा मंत्रालय की घोषणा के मुताबिक, इन रडार का मकसद हवाई लक्ष्यों का पता लगाना, उनकी गतिविधियों पर नजर रखना और उनकी प्राथमिकता तय करने में मदद देना है. किसी खतरे को रोकने या नष्ट करने के लिए रडार से मिली जानकारी के साथ अन्य एयर डिफेंस सिस्टम और परिचालन क्षमताओं की भी भूमिका होती है.
दुश्मन के हवाई लक्ष्यों की प्राथमिकता भी तय करेंगे
इन रडार की एक अहम विशेषता केवल हवाई लक्ष्य का पता लगाना ही नहीं, बल्कि उसकी गतिविधियों पर नजर रखना और प्राथमिकता तय करना भी है. अगर निगरानी के दौरान एक से अधिक हवाई लक्ष्य दिखाई देते हैं, तो उनकी प्राथमिकता निर्धारित करने की क्षमता सेना को अधिक महत्वपूर्ण खतरों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद कर सकती है.
यह सुविधा खास तौर पर ऐसे समय में उपयोगी हो सकती है, जब एक ही क्षेत्र में अलग-अलग आकार और क्षमता वाले हवाई लक्ष्य मौजूद हों. छोटे ड्रोन से लेकर लड़ाकू विमान के आकार वाले लक्ष्यों तक की निगरानी के लिए बेहतर रडार क्षमता सेना को परिस्थितियों का आकलन करने में मदद दे सकती है. इसके बाद संबंधित एयर डिफेंस सिस्टम और सैन्य यूनिट जरूरत के मुताबिक कार्रवाई का निर्णय ले सकती हैं.
770 करोड़ रुपये का करार, स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा
रक्षा मंत्रालय ने 21 अक्टूबर को नई दिल्ली में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के साथ करीब 770 करोड़ रुपये का यह अनुबंध किया. इस दौरान रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह उपस्थित थे. इस करार के तहत बेहतर क्षमता वाले हल्के रडार खरीदे जाएंगे, जिनका उद्देश्य सेना की हवाई निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना है.
यह सौदा रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है. भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड देश की प्रमुख रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में शामिल है और रक्षा जरूरतों से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों तथा प्रणालियों के निर्माण में अहम भूमिका निभाती है. इस तरह की खरीद से घरेलू रक्षा उद्योग को प्रोत्साहन मिल सकता है और रक्षा उत्पादन से जुड़े MSMEs के लिए भी अवसर बढ़ सकते हैं.
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह करार भारत की रक्षा क्षमताओं को स्वदेशी माध्यमों से मजबूत करने की रणनीति के अनुरूप है. इसका उद्देश्य घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा देना, आधुनिक उपकरणों के निर्माण की क्षमता बढ़ाना और भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी रक्षा विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ना है.
कुल मिलाकर, करीब 770 करोड़ रुपये का यह करार भारतीय सेना की हवाई निगरानी क्षमता को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. छोटे और सूक्ष्म ड्रोन से लेकर लड़ाकू विमान के आकार वाले हवाई लक्ष्यों तक पर नजर रखने की क्षमता आधुनिक युद्ध में अहम है.